चेक बार-बार लौटाने पर बैंक को भुगतान के निर्देश: 45 दिन में SBI और TMB बैंक को उपभोक्ता को 67 हजार रुपए देंगे - Jalore News

Published on 22 अग॰ 2026

जालोर जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग ने बैंकिंग सेवा में कमी के मामले में महत्वपूर्ण आदेश दिया है। पीठासीन अधिकारी धनश्याम यादव के आदेश में भारतीय स्टेट बैंक सहित दो बैंकों को परिवादी मोहनलाल को कुल 67 हजार रुपए देने के निर्देश दिए गए हैं। मोहनलाल

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जालोर जिला उपभोक्ता कोर्ट।

जालोर जिला उपभोक्ता कोर्ट।

SBI खाते में लगाया था TMB बैंक का चेक

जालोर एफसीआई कॉलोनी निवासी मोहनलाल पुत्र हबताराम ने भारतीय स्टेट बैंक की कचहरी परिसर, जालोर शाखा और TMB बैंक, पीथमपुर शाखा के खिलाफ जिला उपभोक्ता आयोग में परिवाद पेश किया था। परिवादी ने बताया कि जालोर में भारतीय स्टेट बैंक में उसका बैंक खाता खुला हुआ है। आर्युविटा कंपनी ने उसे TMB बैंक का एक चेक 22 मई 2019 को जारी किया था। मोहनलाल ने इस चेक को अपने SBI बैंक खाते में भुगतान के लिए लगाया था। परिवादी के अनुसार चेक जमा करने के बाद भी बैंकिंग प्रक्रिया में उसे बार-बार अलग-अलग कारण बताते हुए वापस कर दिया गया।

आर्थिक नुकसान और मानसिक परेशानी की बात कही

परिवादी ने उपभोक्ता आयोग को बताया कि बैंक स्तर पर हुई इस कार्रवाई के कारण उसे आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा। इसके साथ ही उसे मानसिक परेशानी का भी सामना करना पड़ा। मामले की सुनवाई के दौरान परिवादी की ओर से दस्तावेजी सबूत और शपथ पत्र पेश किए गए। आयोग ने मामले से जुड़े रिकॉर्ड और दोनों पक्षों की दलीलों पर विचार किया।

आयोग ने दोनों बैंकों को सेवा में कमी का जिम्मेदार माना

आयोग के अध्यक्ष धनश्याम यादव और सदस्य निरंजन शर्मा ने मामले में बैंकिंग सेवा में कमी मानी। इसके बाद आयोग ने परिवाद को स्वीकार करते हुए दोनों बैंकों को परिवादी को आर्थिक और मानसिक नुकसान की भरपाई करने के निर्देश दिए।

50 हजार आर्थिक नुकसान, 7 हजार मानसिक परेशानी के

आदेश के अनुसार, दोनों विपक्षी पक्ष मिलकर परिवादी को 50,000 रुपए आर्थिक नुकसान के रूप में देंगे। इसके अलावा आयोग ने 7,000 रुपए मानसिक संताप और 10,000 रुपए परिवाद खर्च के रूप में देने का आदेश दिया है। इस तरह आर्थिक नुकसान, मानसिक परेशानी और परिवाद खर्च समेत परिवादी को कुल 67,000 रुपए का भुगतान करना होगा।

45 दिन में आदेश की पालना के निर्देश

आयोग ने दोनों बैंकों को आदेश की पालना निर्धारित 45 दिन की अवधि में करने के निर्देश दिए हैं। आदेश की पालना तय समय में नहीं होने पर निर्धारित शर्तों के अनुसार ब्याज भी देना होगा। यह फैसला बैंकिंग सेवाओं में उपभोक्ता को होने वाली परेशानी से जुड़े मामले में दिया गया है।