कंज्यूमर कोर्ट में इंसाफ की लंबी कतार, 6 लाख केस पेंडिंग; 864 पद हैं खाली

Published on 22 अग॰ 2026

देश में उपभोक्ताओं को जल्दी इंसाफ दिलाने के लिए बनाई गई कंज्यूमर कमीशन व्यवस्था खुद मामलों के भारी बोझ तले दबी नजर आ रही है. केंद्र सरकार के ताजा आंकड़ों के मुताबिक, जुलाई 2026 तक देश की तीनों लेवल की कंज्यूमर कमीशनों राष्ट्रीय, राज्य और जिला में कुल 5,93,109 मामले पेंडिंग हैं. सबसे बड़ी चिंता की बात यह है कि इतने केसों के निपटारे के लिए जिम्मेदार सैकड़ों पोस्ट खाली पड़ी हैं, जिससे मामलों के निपटारे की रफ्तार पर सीधा असर पड़ रहा है. सरकारी आंकड़े बताते हैं कि पेंडिंग मामलों का सबसे बड़ा हिस्सा जिला कंज्यूमर कमीशनों पर है, जहां 4,48,687 मामले अटके हुए हैं. यह कुल पेंडेंसी का करीब 75.7 प्रतिशत है. इसके बाद राज्य कमीशनों में 1,27,507 और नेशनल कंज्यूमर डिस्प्यूट्स रिड्रेसल कमीशन में 16,915 मामले पेंडिंग हैं.

यह स्थिति संसद में दिए गए एक जवाब के आंकड़ों से तुलना करने पर और साफ हो जाती है. लोकसभा में 11 फरवरी 2026 को उपभोक्ता मामले, खाद्य और सार्वजनिक वितरण राज्य मंत्री बी.एल. वर्मा ने बताया था कि जनवरी 2026 तक तीनों लेवल की कमीशनों में कुल 5,74,333 मामले पेंडिंग थे. इनमें NCDRC में 16,382, राज्य कमीशनों में 1,21,922 और जिला कमीशनों में 4,36,029 मामले शामिल थे. यानी जनवरी से जुलाई 2026 के बीच महज छह महीनों में पेंडेंसी में करीब 18,800 मामलों का इजाफा हुआ है. इससे पता चलता है कि नए मामलों के दाखिल होने की रफ्तार निपटारे की रफ्तार से आगे निकल रही है.

Consumer Court Vacant Seat

860 से ज्यादा पोस्ट खाली, इंसाफ पर पड़ रहा असर

पेंडेंसी की बढ़ती संख्या के पीछे एक बड़ी वजह अध्यक्ष और सदस्यों की भारी कमी मानी जा रही है. ताजा रिपोर्टों के अनुसार, राज्य और जिला लेवल की कमीशनों में अध्यक्ष और सदस्यों को मिलाकर कुल 864 पोस्ट खाली हैं. इनमें राज्य लेवल पर 18 अध्यक्ष और 74 सदस्यों के पद खाली हैं, जबकि जिला लेवल पर स्थिति और गंभीर है. यहां 234 अध्यक्ष और 538 सदस्यों के पद खाली पड़े हैं.

यह आंकड़ा सरकार की ओर से संसद में दिए गए पहले के जवाब से भी ज्यादा चिंताजनक तस्वीर दिखाता है. 31 दिसंबर 2025 तक राज्य कमीशनों में अध्यक्ष के 18 और सदस्यों के 75 पद खाली थे. वहीं जिला कमीशनों में अध्यक्ष के 169 और सदस्यों के 379 पद खाली थे. यानी उस समय कुल 641 पोस्ट खाली थीं. कुछ ही महीनों में यह संख्या बढ़कर 864 तक पहुंच गई. उत्तर प्रदेश, पश्चिम बंगाल, कर्नाटक, मध्य प्रदेश और तमिलनाडु जैसे बड़े राज्यों में जिला कमीशनों में सबसे ज्यादा पोस्ट खाली बताई गई हैं. बिहार, गुजरात और झारखंड में भी जिला अध्यक्ष और सदस्यों के कई पद खाली हैं. इसका सीधा असर उपभोक्ताओं को समय पर सुनवाई मिलने में देरी के रूप में सामने आता है.

कानून क्या कहता है

कंज्यूमर प्रोटेक्शन एक्ट, 2019 की धारा 38(7) के तहत हर शिकायत का जल्द से जल्द निपटारा किया जाना चाहिए. सामान्य मामलों को नोटिस मिलने की तारीख से तीन महीने में और जिन मामलों में सामान की जांच या टेस्ट जरूरी हो, उन्हें पांच महीने में निपटाने का प्रयास करने का प्रावधान है. कानून यह भी कहता है कि बिना पर्याप्त वजह के सुनवाई टाली नहीं जा सकती. अगर सुनवाई टाली जाती है तो इसकी वजह लिखित रूप में दर्ज करना जरूरी है.

रिक्तियों को लेकर कंज्यूमर प्रोटेक्शन रूल्स, 2020 के नियम 6(4) के अनुसार, राज्य सरकारों को किसी पद के खाली होने से कम से कम छह महीने पहले नियुक्ति की प्रक्रिया शुरू कर देनी चाहिए. हालांकि राज्य और जिला लेवल की कमीशनों में नियुक्तियां भरने की जिम्मेदारी राज्य सरकारों की होती है. केंद्र सरकार का कहना है कि वह खाली पदों को जल्द भरने के लिए राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के संपर्क में है.

Consumer Court Pending

e-Jagriti पोर्टल से राहत की कोशिश

पेंडेंसी घटाने और सुनवाई को आसान बनाने के लिए सरकार ने 1 जनवरी 2025 को e-Jagriti पोर्टल लॉन्च किया था. यह पोर्टल OCMS, e-Daakhil, NCDRC CMS और CONFONET जैसी पुरानी डिजिटल व्यवस्थाओं को एक साथ जोड़ता है. इसके जरिए ऑनलाइन शिकायत दर्ज करने, दस्तावेज जमा करने, फीस भरने और वर्चुअल सुनवाई जैसी सुविधाएं मिलती हैं. सरकार का कहना है कि इससे दूरी और सुनवाई की तारीखों के टकराव जैसी समस्याएं कम हुई हैं. आंकड़ों के अनुसार, 2025 में 1,62,474 मामले दाखिल हुए, जिनमें से 1,50,197 मामलों का निपटारा किया गया. यह 2024 के मुकाबले बेहतर प्रदर्शन था.

NCDRC के अलावा चंडीगढ़, छत्तीसगढ़, हिमाचल प्रदेश, कर्नाटक, मध्य प्रदेश, मेघालय, नगालैंड, पुडुचेरी, पंजाब, राजस्थान, तमिलनाडु और उत्तराखंड के राज्य कमीशनों ने जुलाई 2025 के बाद 100 प्रतिशत से ज्यादा निपटान दर हासिल की. वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से सुनवाई की सुविधा फिलहाल NCDRC की 10 और राज्य कमीशनों की 35 बेंचों पर उपलब्ध है. यानी पूरे देश में सुनवाई को पूरी तरह डिजिटल बनाने का लक्ष्य अभी काफी दूर है. आंकड़े बताते हैं कि तकनीकी सुधारों के बावजूद पेंडेंसी घटने के बजाय बढ़ रही है और खाली पोस्ट की संख्या भी कम नहीं हो रही.

देवेश कुमार पांडेय

देवेश कुमार पांडेय

देवेश कुमार पांडेय TV9 Hindi में बतौर सब-एडिटर काम कर रहे हैं. उत्तर प्रदेश के अमेठी के रहने वाले देवेश को राजनीति के अलावा इतिहास, साहित्य में दिलचस्पी है.  साल 2024 में भारतीय जन संचार संस्थान (IIMC) के अमरावती कैंपस से पत्रकारिता की पढ़ाई की है. देवेश को घूमना, लिखना, पढ़ना और पॉडकास्ट सुनना पसंद है.

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