'सरेंडर स्ट्राइक' से नक्सलियों की टूटी कमर, झारखंड में ₹60 लाख के इनामी 18 माओवादी डालेंगे हथियार

Published on 27 जुल॰ 2026

Jharkhand News: झारखंड में नक्सलवाद के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान के तहत सुरक्षा बलों को बड़ी सफलता मिली है. इस बार सफलता किसी मुठभेड़ या ऑपरेशन से नहीं, बल्कि ‘सरेंडर स्ट्राइक’ के जरिए हासिल हुई है. झारखंड सरकार की आत्मसमर्पण एवं पुनर्वास नीति ‘नई दिशा-एक नई पहल’ से प्रभावित होकर कुल ₹60 लाख के इनामी 18 खूंखार माओवादी एक साथ हथियार छोड़कर मुख्यधारा में लौटने जा रहे हैं. इन सभी का सामूहिक आत्मसमर्पण 28 जुलाई को राजधानी रांची स्थित झारखंड पुलिस मुख्यालय में कराया जाएगा.

पुलिस के अनुसार, आत्मसमर्पण करने वाले नक्सलियों में कई बड़े और सक्रिय कमांडर शामिल हैं. इनमें 15 लाख रुपये का इनामी रिजनल कमांडर संतोष उर्फ गांधी भी शामिल है, जिसे माओवादी संगठन की रणनीतिक गतिविधियों का प्रमुख चेहरा माना जाता रहा है. इसके अलावा एक करोड़ रुपये के इनामी शीर्ष माओवादी पोलित ब्यूरो सदस्य मिसिर बेसरा का करीबी सहयोगी और बॉडीगार्ड शनीचरवा भी हथियार डालने जा रहा है. सुरक्षा एजेंसियां इसे माओवादी संगठन के लिए बड़ा झटका मान रही हैं.

18 माओवादी करेंगे सरेंडर

जानकारी के मुताबिक, आत्मसमर्पण करने वाले 18 माओवादियों में तीन जोनल कमांडर, जिन पर 10-10 लाख रुपये का इनाम घोषित है, तीन सब-जोनल कमांडर, जिन पर 5-5 लाख रुपये का इनाम है, तथा छह एरिया कमांडर और संगठन के अन्य सक्रिय सदस्य शामिल हैं. ये सभी लंबे समय से पश्चिमी सिंहभूम के कोल्हान क्षेत्र, गिरिडीह और लातेहार सहित कई इलाकों में सक्रिय रहे हैं और अनेक नक्सली गतिविधियों में शामिल बताए जाते हैं.

सरकार की नीति का असर

झारखंड पुलिस का कहना है कि राज्य को नक्सलमुक्त बनाने के लिए सुरक्षा अभियान के साथ-साथ आत्मसमर्पण और पुनर्वास नीति पर भी लगातार काम किया जा रहा है. सरकार की इस नीति के तहत आत्मसमर्पण करने वाले नक्सलियों को समाज की मुख्यधारा से जोड़ने, रोजगार उपलब्ध कराने और पुनर्वास की सुविधाएं दी जाती हैं. इसी का परिणाम है कि बड़ी संख्या में नक्सली हिंसा का रास्ता छोड़कर सामान्य जीवन अपनाने के लिए आगे आ रहे हैं.

पहले भी नक्सली कर चुके है सरेंडर

गौरतलब है कि इससे पहले 21 मई 2026 को भी झारखंड पुलिस ने राज्य के इतिहास का सबसे बड़ा सामूहिक आत्मसमर्पण कराया था. उस समय 27 नक्सलियों और उग्रवादियों ने डीजीपी के समक्ष हथियार डाले थे. अब 18 और इनामी माओवादियों के सामूहिक आत्मसमर्पण को नक्सलवाद के खिलाफ अभियान की एक और बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है. सुरक्षा एजेंसियों का मानना है कि इससे माओवादी संगठन की गतिविधियों और नेटवर्क को गहरा झटका लगेगा तथा राज्य में शांति और विकास की दिशा में महत्वपूर्ण बढ़त मिलेगी.

अशोक कुमार

अशोक कुमार

अशोक कुमार को पत्रकारिता के क्षेत्र में 7 वर्षों से अधिक का अनुभव है. राजनीति, क्राइम और ऑफबीट खबरों में दिलचस्पी रखने के कारण इन क्षेत्रों की खबरों पर बेहतरीन पकड़ है. नई जगहों को एक्सप्लोर करने के साथ पढ़ने-लिखने का शौक रखते हैं. झारखंड की स्थानीय न्यूज़ चैनल में विभिन्न पदों पर काम करने के साथ-साथ, इन्होंने एपीएन न्यूज़ में बतौर ब्यूरो चीफ के रूप में भी काम किया है. अशोक कुमार ने झारखंड में पिछले 7 वर्षों के दौरान हुई छोटी-बड़ी राजनीतिक हलचलों को रिपोर्ट किया है. वर्तमान में वो टीवी9 डिजिटल से जुड़े हैं.

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