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आदिवासी बहुल आलीराजपुर वर्ष 2011 की जनगणना में देश का सबसे असाक्षर जिला था। 15 साल बीतने के बाद भी यहां हालात बेहतर नहीं हो सके हैं। मप्र के 1.35 करोड़ असाक्षरों को साक्षर बनाने के लिए राज्य शिक्षा केंद्र की अगुवाई में उल्लास नवभारत साक्षरता कार्यक्रम (2022–2027) शुरू किया गया था। इसमें आलीराजपुर जिले में 69 फीसदी लक्ष्य हासिल करने की बात कही गई है, पर जमीनी हकीकत बिलकुल जुदा है।
जिले के सबसे बड़े सोंडवा ब्लॉक में 134 गांव हैं। लेकिन, ग्रामीणों के मुताबिक यहां अभियान की कोई पहुंच नहीं है। इसकी बड़ी वजह इलाके की भौगोलिक स्थिति और रोजगार के लिए पलायन है। आलीराजपुर जिले में भील, भिलाला परिवारों की संख्या सबसे अधिक है। इसके अलावा नायक और मानकर जाति के परिवार भी हैं। असाक्षर आबादी के चलते आज भी यहां शासन को योजनाओं समेत अन्य जानकारी देने के लिए कोटवारों पर निर्भर रहना पड़ता है। कोटवार से भी ग्रामीणों को जानकारी मुश्किल से मिल पाती है।
पहाड़ियों में बसाहट, स्कूल के लिए कई किमी का सफर, कैसे जाएं स्कूल
भील और भिलाला परिवारों के कई गांव ऊंची पहाड़ियों पर बसे हैं। ये पहाड़ियों में बमुश्किल खेती कर जीवन यापन कर रहे हैं। यहां से मुख्य मार्ग और स्कूलों-अस्पतालों तक पहुच मुश्किल है। सोंडवा ब्लॉक का उमरठ गांव कई किमी पहाड़ियों में फैला है। स्थानीय युवा शैलेश कनेरा बताते हैं कि इन आदिवासी गांवों के रहवासी रोजगार की तलाश में महाराष्ट्र, गुजरात जाते हैं, बच्चों को अकेला छोड़ने की बजाय साथ ले जाने से इनकी शिक्षा शुरुआत में ही दम तोड़ देती है। हालांकि सोंडवा ब्लॉक में दो सांदीपनि स्कूल इस साल शुरू हुए हैं, पर इनमें से सोंडवा स्थित स्कूल में ही परिवहन सेवा शुरू हुई है।
उल्लास कार्यक्रम में भोपाल प्रदेश में सबसे फिसड्डी उल्लास कार्यक्रम में 1.35 करोड़ के लक्ष्य के मुकाबले अभी तक 84.46 लाख (62%) ही साक्षर हो पाए हैं। 51,18 लाख अभी भी असाक्षर हैं। राजधानी भोपाल का ही प्रदर्शन सबसे शर्मनाक रहा। 3.76 लाख के लक्ष्य के मुकाबले भोपाल में महज 14% (52,524) लोग ही साक्षर बनाए जा सके। इंदौर (36%), ग्वालियर (34%) और सागर (34%) का प्रदर्शन भी निराशाजनक रहा। झाबुआ, नीमच और विदिशा ने सौ फीसदी लक्ष्य हासिल किया है।
उल्लास कार्यक्रम में शहरी क्षेत्रों की तुलना में ग्रामीण क्षेत्र में बेहतर काम हुआ है। भोपाल समेत अन्य शहरों में अब नौंवी, दसवीं समेत ग्यारहवीं और बारहवीं के छात्रों को प्रोजेक्ट के रूप में इसे शामिल किया है। आलीराजपुर, झाबुआ, बड़वानी जिलों में साक्षरता को लेकर बेहतर काम हुआ है।' - डॉ. राकेश दुबे, नियंत्रक, उल्लास नवभारत साक्षरता कार्यक्रम, राज्य शिक्षा केंद्र