सहारनपुर में बाप-बेटे को उम्रकैद की सजा: 8 साल पहले घर में घुसकर युवक के सिर में गोली मारकर की थी हत्या - Saharanpur News

Published on 24 सित॰ 2026

सहारनपुर कोर्ट ने गुरुवार को अलीशेर हत्याकांड में नदीम और उसके बेटे इकबाल को दोषी करार देते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई है। अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश न्यायालय संख्या-10 ने दोनों पर 20-20 हजार रुपए का जुर्माना भी लगाया। कोर्ट ने पत्रावली पर मौजूद साक्ष

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ADGC संजय कुमार के मुताबिक, घटना 14 मार्च 2018 की शाम करीब 7:15 बजे कोतवाली देहात क्षेत्र में हुई थी। मुकर्रम का बेटा अलीशेर अपने घर में था। इसी दौरान नदीम और इकबाल तमंचे लेकर घर में घुस आए।

घर में घुसकर सिर के पीछे मारी थी गोली

आरोप था कि नदीम ने अलीशेर के सिर के पीछे गोली मार दी। इकबाल ने भी फायर किया, लेकिन गोली लोहे के गेट में लगी। गंभीर हालत में परिजन अलीशेर को अस्पताल ले गए। हालत बिगड़ने पर उसे दिल्ली रोड स्थित मेगा सिटी अस्पताल रेफर किया गया।

करीब चार दिन इलाज के बाद 18 मार्च 2018 को अलीशेर की मौत हो गई। इसके बाद पुलिस ने मुकदमे में हत्या की धारा 302 बढ़ाई।

बहन के दहेज केस और तेजाब कांड से जुड़ी थी रंजिश

अभियोजन के मुताबिक, दोनों पक्षों के बीच पहले से विवाद और मुकदमेबाजी चल रही थी। अलीशेर की बहन शबनम की शादी आरोपी शौकीन से हुई थी। शबनम ने ससुराल पक्ष के खिलाफ दहेज का मुकदमा दर्ज कराया था।

इसके अलावा 5 जनवरी 2018 को शबनम और अलीशेर पर तेजाब डालने का मामला भी दर्ज हुआ था। अभियोजन ने इसी पुरानी रंजिश को हत्या की वजह बताया।

शौकीन को भी मुकदमे में आरोपी बनाया गया था, लेकिन सुनवाई के दौरान उसकी मौत हो गई। इसके बाद 10 फरवरी 2023 को उसके खिलाफ न्यायिक कार्यवाही समाप्त कर दी गई।

10 गवाहों ने दिए बयान

मामले की सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने 10 गवाह पेश किए। वादी मुकर्रम ने कोर्ट को बताया कि घटना के समय उसका बेटा अलीशेर घर के अंदर आया था। तभी नदीम और इकबाल वहां पहुंचे। नदीम ने अलीशेर के सिर में गोली मारी, जबकि इकबाल का फायर लोहे के गेट में लगा। दोनों धमकी देते हुए भाग गए।

पुलिस ने विवेचना के दौरान 22 मार्च 2018 को नदीम को सरकड़ी शेख गांव में गैस गोदाम के सामने से गिरफ्तार किया था। पुलिस के मुताबिक, उसके पास से 315 बोर का तमंचा और तीन जिंदा कारतूस बरामद हुए थे।

बचाव में कहा- घटना के समय गांव में था इकबाल

सुनवाई के दौरान दोनों आरोपियों ने खुद को निर्दोष बताया। इकबाल की ओर से कहा गया कि घटना के समय वह गांव में दूध निकलवाने गया था। बचाव पक्ष ने फुरकान और तेलूराम को गवाह के तौर पर पेश किया।

वहीं, सजा पर बहस के दौरान बचाव पक्ष ने नदीम के B.Tech होने और इकबाल की अधिक उम्र का हवाला देकर कम सजा की मांग की। परिवार में दूसरे कमाने वाले सदस्य के नहीं होने की दलील भी दी गई।

कोर्ट ने दोनों पक्षों की दलीलों और साक्ष्यों पर विचार करने के बाद नदीम और इकबाल को दोषी ठहराते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई। कोर्ट ने आदेश दिया कि जुर्माने की रकम वसूल होने पर उसकी आधी राशि अलीशेर की पत्नी को प्रतिकर के रूप में दी जाएगी।