प्रदेश के इकलौते मत्स्य विज्ञान संस्थान में फैकल्टी संकट: फिशरीज कॉलेज में प्रोफेसर के 8 में से 6 पद खाली, कमान भी हॉर्टीकल्चर डीन को - Udaipur News

Published on 8 सित॰ 2026

शिक्षा और शोध को लेकर सरकारी तंत्र की अनदेखी का बड़ा उदाहरण उदयपुर में राज्य के एकमात्र सरकारी कॉलेज ऑफ फिशरीज (एमपीयूएटी) में देखने को मिल रहा है। जिस संस्थान को प्रदेश में मत्स्य विज्ञान शिक्षा और शोध का प्रमुख केंद्र होना चाहिए था, वह गंभीर प्रशास

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इस बदहाली की सबसे बड़ी वजह फैकल्टी का भारी संकट है। मत्स्य विभाग के लिए स्वीकृत 8 प्रोफेसरों के पदों में से 6 पद बरसों से खाली हैं। वर्ष 2010 के बाद से केवल एक ही स्थायी नियुक्ति हुई है। अभी मत्स्य विभाग के दो ही प्रोफेसर तैनात हैं। इनमें से भी एक प्रोफेसर अगले साल सेवानिवृत्त होने वाले हैं। इसके बाद कॉलेज में केवल एक स्थायी प्रोफेसर रह जाएगा। फिलहाल 5 से 6 अतिथि शिक्षकों (गेस्ट फैकल्टी) के भरोसे जैसे-तैसे कक्षाओं का संचालन कर खानापूर्ति की जा रही है।

असर: पीजी 4 व पीएचडी 6 साल से बंद, 120 छात्र दूसरे राज्यों में जा रहे

इस अव्यवस्था की मार यहां पढ़ रहे 120 से अधिक स्नातक (बीएससी फिशरीज) विद्यार्थियों पर पड़ रही है। मत्स्य विज्ञान में स्नातक के बाद आगे की पढ़ाई के लिए प्रदेश में कोई विकल्प नहीं है, जिसके कारण मेधावी विद्यार्थियों को उच्च शिक्षा के लिए दूसरे राज्यों का रुख करना पड़ रहा है।

डीन पद पर रार: छात्र बोले- विशेषज्ञता नहीं, रजिस्ट्रार बोले- मजबूरी में दिया चार्ज

कॉलेज में लगातार गैर-संबंधित विषय के डीन की नियुक्ति से विद्यार्थियों और मत्स्य शिक्षा से जुड़े विशेषज्ञों में असंतोष है। वर्तमान डीन डॉ. एलएन महावर उद्यानिकी विभाग से हैं, जबकि उनसे पहले इस पद पर रहे डॉ. आरएल सोनी और डॉ. आरए कौशिक भी कृषि क्षेत्र से ही जुड़े थे।

विद्यार्थियों का आरोप है कि डीन का प्रभार मिलने के बाद वे फिशरीज कॉलेज के बजाय अपने मूल विभाग में बैठते हैं, जिससे छात्र अपनी शैक्षणिक और प्रशासनिक समस्याओं के समाधान के लिए भटकते रहते हैं। दूसरी ओर, एमपीयूएटी के रजिस्ट्रार अशोक कुमार का कहना है कि फिशरीज कॉलेज में कोई प्रोफेसर उपलब्ध न होने के कारण किसी ने आवेदन नहीं किया। मजबूरी में एडिशनल चार्ज के रूप में डीन का जिम्मा डॉ. महावर को दिया गया है, जो डीन के साथ-साथ प्रोफेसर के रूप में भी कार्य कर रहे हैं।

200 से अधिक जलस्रोत फिर भी शोध ठप; उपकरण खा रहे धूल

उदयपुर जिले में 200 से अधिक तालाब, झीलें और बांध हैं, जहां मत्स्य पालन के क्षेत्र में रोजगार, उत्पादन और वैज्ञानिक शोध की अपार संभावनाएं हैं। इसके बावजूद कॉलेज की शोध व्यवस्था ठप पड़ी है। विभिन्न सरकारी योजनाओं के तहत अनुसंधान कार्यों के लिए लाखों-करोड़ों रुपये के महंगे वैज्ञानिक उपकरण खरीदे गए थे, लेकिन पीजी व पीएचडी बंद होने और शिक्षकों की कमी के कारण ये उपकरण प्रयोगशालाओं में बंद पड़े धूल फांक रहे हैं। विद्यार्थियों का सीधा सवाल है कि जब आधारभूत ढांचा और संसाधन मौजूद हैं, तो सरकार और विश्वविद्यालय प्रशासन इस इकलौते कॉलेज को बचाने के लिए गंभीर क्यों नहीं है।