80 हजार बैठकें, 43 बिरादरियों पर फोकस... UP चुनाव से पहले BJP-RSS का 'सर्व समाज' मास्टरप्लान

Published on 8 अक्टू॰ 2026

उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव को लेकर बीजेपी और RSS ने अपनी चुनावी रणनीति को जमीन पर उतारना शुरू कर दिया है. संघ, बीजेपी और सहयोगी संगठनों की बैठकों का दौर जारी है. इन बैठकों में चुनावी तैयारियों के साथ-साथ संगठन के भीतर की नाराजगी और कार्यकर्ताओं की शिकायतों पर भी चर्चा हुई. सूत्रों के अनुसार हाल में ही यूपी के सुल्तानपुर में हुई समन्वय बैठक में जमीनी कार्यकर्ताओं की नाराजगी प्रमुखता से सामने आई. कार्यकर्ताओं की शिकायत है कि सरकार के विभिन्न निकायों, आयोगों और संस्थाओं में उन्हें अपेक्षित प्रतिनिधित्व नहीं मिला और कई जगह उन्हें नजरअंदाज किए जाने का भाव रहा है.

नगर पालिका जैसे स्थानीय निकायों में नॉमिनेशन कोटे में देरी को लेकर भी कार्यकर्ताओं के बीच असंतोष की बात सामने आई. सूत्रों के मुताबिक कार्यकर्ताओं की शिकायतों को सुनने के बाद संघ के वरिष्ठ पदाधिकारियों ने साफ संदेश दिया कि फिलहाल आपसी शिकायतों और मतभेदों पर चर्चा का समय नहीं है.

2027 का चुनाव बेहद महत्वपूर्ण है. संगठन के सामने फिलहाल सबसे बड़ी प्राथमिकता चुनाव की तैयारी और बीजेपी के संगठन को मजबूत करना है, जो भी समस्याएं हैं, उनका समाधान चुनाव के बाद किया जाएगा. अभी पूरा फोकस चुनाव पर होना चाहिए.

“सर्व समाज बैठक” पर फोकस

संघ ने बीजेपी के साथ बैठक में “सर्व समाज बैठक” पर फोकस किया है और चुनाव से पहले हर एक जाति वर्ग और समुदाय तक गहरी पैठ बनाने की रणनीति बनाई है. सर्व समाज बैठक के तहत पूरे उत्तर प्रदेश में लगभग 80000 बैठक के आयोजित की जाएंगी.

पूरे उत्तर प्रदेश में संघ ने लगभग 42 से 43 बिरादरियों की पहचान किया है. इनके बीच जाकर संघ को और बीजेपी के कार्यकर्ताओं को स्पर्श करना है. बीजेपी शक्ति केंद्र स्तर पर अलग-अलग बिरादरियों की बैठक करेगी. गौरतलब है की 3 से 5 बूथों के समूह को शक्ति केंद्र कहते हैं.

शहरी क्षेत्र में सर्व समाज बैठकों को ड्राइंग रूम बैठक का नाम दिया गया है. इसके अलावा ग्रामोदय से बूथोदय की रणनीति भी बनाई गई है. इसी रणनीति के तहत संघ-बीजेपी ने कनेक्ट एजेंडा पर फोकस करते हुए कई योजनाएं बनाई हैं. इन योजनाओं के तहत अगले चार महीनों में वैचारिक संगठनों को जमीन पर काम करने की रणनीति बनाई गई है.

सर्व समाज बैठक से गांव-गांव पहुंचेगा संगठन

जन-स्पर्श अभियान के तहत गांव-गांव जाकर आम वोटर, लाभार्थियों और कमजोर वर्गों से सीधा संपर्क स्थापित किया जाएगा. साथ ही पारंपरिक वोटरों, स्थानीय लोगों और कार्यकर्ताओं की नाराजगी सुनना और उसका समाधान तलाशना कि योजना बनाई गई है.

जन-जागरण अभियान के तहत योगी सरकार द्वारा किए गए डेवलपमेंट, वेलफेयर स्कीम और गवर्नेंस के काम को गांव-गांव तक पहुंचाने की योजना बनाई गई है. इस के साथ ही संगठन-संवाद अभियान चलाकर कार्यकर्ताओं, स्थानीय नेताओं और विधायकों के बीच coordination मजबूत करना और सरकार-संगठन के communication gap को कम करने की योजना बनाई गई है.

सर्व समाज के जरिए वोटरों से सीधा संपर्क

यूपी के ग्रामीण इलाकों को मूल में रखकर ग्राम-स्पर्श अभियान चलाकर बीजेपी के समर्थन बेस को बढ़ाने की रणनीति भी बनाई गई है. इसके साथ ही गांव से लेकर बूथ और शक्ति केंद्र तक संगठन को सक्रिय और मजबूत करने की राजनीति बनाई गई है.

इस पूरे अभियान को सिर्फ कागजों तक सीमित नहीं रखने के लिए समग्र रूप से मॉनिटरिंग सिस्टम पर भी जोर दिया जा रहा है. ग्राउंड लेवल की गतिविधियों को तीन स्तर के व्हाट्सएप ग्रुप और पार्टी के अपने ऐप सरल के जरिए real-time track करने की व्यवस्था की गई है. इसकी मॉनिटरिंग सबसे पहले जिला स्तर होगी और उसके ऊपर लखनऊ स्थित वार रूम से इसकी निगरानी की जाएगी.

यानी आगामी विधानसभा चुनाव का पूरा फोकस गांव तक सरकार का काम काज पहुंचना, जनता तक संगठन की पहुंच बढ़ाना, कार्यकर्ता के सम्मान को उठाना और बूथ स्तर पर पूरी ताकत के साथ काम करने की बनाई गई है.

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Amod Rai

Amod Rai

21 सालों से राजनीतिक, सामाजिक और पॉलिसी संबंधित विषयों की रिपोर्टिंग और लेखन का अनुभव। लगातार 2 दशक से बीजेपी, संघ परिवार, संसद और केंद्र सरकार की खबरों पर विशेष निगाह

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