उनाकोटी में हैं भगवान की 99,99,999 मूर्तियां! किसने और कब बनवाई ये प्रतिमाएं, जानें भगवान शिव से जुड़ा रहस्य

Published on 16 अग॰ 2026

Aug 16, 2026 03:56 pm ISTलाइव हिन्दुस्तान

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भारत के ऐसे कई मंदिर हैं, जिनका रहस्य लोगों को हैरान कर देता है। ऐसा ही रहस्य है उनाकोटी में बनीं 1 करोड़ से एक कम भगवान की मूर्तियों का। चलिए आपको उनाकोटी के बारे में सबकुछ बताते हैं।

why unakoti of tripura has 99,99,999 gods statue

उनाकोटी में क्यों हैं एक करोड़ से सिर्फ एक कम मूर्तियां

भारत में हर राज्य, शहर, गांवों में आपको अनोखी चीजें देखने और सुनने को मिलेंगी, खासतौर पर धार्मिक मान्यताओं से जुड़ी हुई। कहीं पर किसी मंदिर में भगवान के अनोखे दर्शन की कहानी मिलेगी, तो कोई मंदिर पानी में डूबा हुआ दिखेगा। आज हम आपको जिस मंदिर की कहानी बताने जा रहे हैं, वह सीधा भगवान शिव से जोड़ी जाती है और वहां पर 1 करोड़ से एक कम भगवानों की मूर्तियों बनी हुई हैं। इस जगह को देखने के लिए लोग दूर-दूर से आते हैं और यहां पर सुकून पाते हैं। इन मूर्तियों को देखकर लगता है जैसे किसी शिल्पकार ने इन्हें शिद्दत से तराशा है और यहां पर भगवान शिव, गणेश, राम, लक्ष्मी, दुर्गा समेत कई भगवानें की प्रतिमाएं आपको देखने को मिलेंगी। सवाल यह उठता है कि आखिर चट्टानों पर इतनी प्रतिमाएं किसने और कब बनवाई। चलिए आपको इन मूर्तियों के रहस्य के बारे में बताते हैं।

उनाकोटी में हैं 1 करोड़ से एक कम मूर्तियां

पूर्वोत्तर भारत के त्रिपुरा राज्य में रघुनंदन पहाड़ियों की गोद में बसा 'उनाकोटी' एक प्राचीन स्थल है। उनाकोटी का मतलब होता है 1 करोड़ से एक कम। इन चट्टानों पर 99 लाख 99 हजार 999 मूर्तियां बनी हुई हैं और इसी वजह से इस जगह का नाम उनाकोटी पड़ गया। इस स्थान पर चट्टानों को काटकर लगभग इतनी ही संख्या में मूर्तियां और आकृतियां उकेरी गई हैं, जो देखने में बेहद आकर्षित लगती हैं।

किसने और कब बनवाईं ये प्रतिमाएं

यहां पर सभी भगवानों की मूर्तियों के साथ रावण की प्रतिमा भी बनी हुई है, जिनके हाथ में धनुष है। सबसे बड़ी मूर्ती यहां पर भगवान शिव की है और उनके आस-पास नंदी बने हुए हैं। इन मूर्तियों को कब और किसने बनवाया आजतक इसका रहस्य कोई सुलझा नहीं पाया है। इन मूर्तियों को लेकर कई कहानियां वहां प्रचलित है और सभी में भगवान शिव मुख्य हैं। कुछ लोग मानते हैं कि पाल साम्राज्य के दौरान यह जगह बनी, तो कोई कहता है कि 8वीं-9वीं शताब्दी में यह जगह बनी। अभी तक इन दावों को लेकर कुछ भी पुख्ता नहीं है।

भगवान शिव ने दिया सभी को श्राप

डिस्कवरी प्लस के शो एकांत में बताई गई पहली कहानी ये है कि सभी भगवान इसी रास्ते से होकर काशी जा रहे थे। रात में थकान के कारण सभी ने रघुनंदन की पहाड़ियों पर आराम करने का सोचा। भगवान शिव ने सभी को कहा कि सूर्य निकलने से पहले ही उठकर चलना है। दुर्भाग्य से अगली सुबह किसी भी देवी-देवता की नींद नहीं खुली और भगवान शिव ने उन्हें मूर्ती बनने का श्राप दिया और खुद वहां से चले गए। सवाल ये है कि शिव जी भी चले गए थे तो उनकी मूर्ती वहां क्यों बनी है।

कल्लू कुम्हार ने बनाईं मूर्तियां

अन्य किंवदंती है कि कल्लू कुम्हार ने माता पार्वती और शिव जी को इस रास्ते से कैलाश की ओर जाते देखा, तो उन्होंने भी कैलाश पर्वत साथ लेकर चलने को कहा। ऐसे में मां पार्वती ने कुम्हार की परीक्षा लेने के लिए 1 करोड़ देवी-देवता की मूर्तियां बनाने को कहा और कल्लू ने रातभर मेहनत कर मूर्तियां बनाईं लेकिन इसमें एक कम रह गई। इस वजह से वह कैलाश नहीं जा पाया और इस जगह को उनाकोटी कहा जाने लगा।

विश्व धरोहर स्थल बना

अब उनाकोटी सिर्फ धार्मिक तीर्थ ही नहीं बल्कि भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) ने उनाकोटी को राष्ट्रीय धरोहर स्थल का दर्जा भी दिया है। इसे लॉस्ट हिल ऑफ फेसेज भी कहा जाता है, इसका मतलब हुआ चेहरों का खोया हुआ पहाड़। यहां पर लोग दूर-दूर से घूमने और इन मूर्तियों को देखने आते हैं। यहां पर लोगों को अजीब सी शांति का एहसास होता है। यहां पर आस-पास हरियाली फैली हुई है, जहां का नजारा आंखों को सुकून देता है।

लेखक के बारे में

Deepali Srivastava

दीपाली श्रीवास्तव पिछले 8 वर्षों से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय हैं और 5 सालों से लाइव हिन्दुस्तान (हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप) में डेप्युटी चीफ कंटेंट प्रोड्यूसर के रूप में कार्यरत हैं। संस्थान में साल 2021 में वेब स्टोरी से अपने सफर की शुरुआत करने के बाद, वह आज लाइफस्टाइल टीम का अहम हिस्सा हैं। डिजिटल मीडिया के बदलते ट्रेंड्स, यूजर बिहेवियर और पाठकों की रुचि को समझने में उनकी मजबूत पकड़ उन्हें एक भरोसेमंद और प्रभावशाली कंटेंट प्रोफेशनल बनाती है।

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