फरीदकोट में स्पीकर आवास पर किसानों का मोर्चा: ADC से वार्ता के बाद जाम कार्यक्रम एक दिन टला, मांगें पूरी न होने पर तेज आंदोलन - Faridkot News

Published on 11 अग॰ 2026

पंजाब विधानसभा के स्पीकर के गांव संधवां स्थित निवास स्थान के बाहर भारतीय किसान यूनियन (BKU) एकता सिद्धूपुर द्वारा लगाया गया पक्का मोर्चा मंगलवार को लगातार सातवें दिन भी जारी रहा। इस बीच, किसानों द्वारा रेलवे ट्रैक और नेशनल हाईवे जाम करने की दी गई कड़

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किसानों के कड़े रुख को देखते हुए एडीसी (ADC) केशव गोयल के नेतृत्व में प्रशासनिक अधिकारियों की एक उच्च स्तरीय टीम धरना स्थल पर पहुंची। अधिकारियों ने किसान नेताओं के प्रतिनिधिमंडल के साथ लंबी बातचीत की और उनकी मांगों पर अब तक की गई प्रशासनिक कार्रवाई का ब्यौरा सांझा किया।

प्रशासन ने किसानों को विश्वास दिलाया कि सरकार और जिला प्रशासन उनकी सभी मांगों को लेकर पूरी तरह गंभीर हैं और इन्हें जल्द से जल्द पूरा करवाने के प्रयास किए जा रहे हैं। अधिकारियों ने इस दौरान किसानों से मोर्चा समाप्त करने की भी अपील की।

धरने के दौरान नारेबाजी करते किसान

धरने के दौरान नारेबाजी करते किसान

मोर्चा उठाने से इनकार, मांगों पर अड़े किसान

प्रशासनिक अपील के बावजूद किसान नेताओं ने धरना खत्म करने से साफ इनकार कर दिया। किसान नेता काका सिंह कोटड़ा ने स्पष्ट किया कि उनकी अधिकांश मुख्य मांगें अभी भी जस की तस लटकी हुई हैं और अब तक उन्हें केवल कोरे आश्वासन ही मिले हैं। किसान नेताओं का कहना है कि प्रशासन ने कुछ छोटी मांगों पर तो कार्रवाई की है, लेकिन बड़े मसले अभी भी लंबित हैं।

किसान नेताओं से बातचीत करते एडीसी केशव गोयल

किसान नेताओं से बातचीत करते एडीसी केशव गोयल

जानिए प्रमुख मांगों के बारे में

शंभू और खनौरी बॉर्डर पर चल रहे आंदोलन के दौरान किसानों के हुए नुकसान की उचित भरपाई की जाए।

लैंड मॉर्गेज बैंकों द्वारा कर्जदार किसानों से जबरन लिए गए खाली चेक तुरंत वापस करवाए जाएं।

किसानों का संपूर्ण कर्ज पूरी तरह से माफ किया जाए।

जानकारी देते किसान नेता काका सिंह कोटड़ा

जानकारी देते किसान नेता काका सिंह कोटड़ा

प्रशासन को मिला 24 घंटे का समय, अन्यथा होगा चक्का जाम

किसान यूनियन ने प्रशासन को चेताया है कि वे अपने हक लिए तीखे संघर्ष से पीछे नहीं हटेंगे। उन्होंने मांगों को अमलीजामा पहनाने के लिए प्रशासन को महज एक दिन (24 घंटे) का और समय दिया है। नेताओं ने दो टूक कहा कि यदि तय समय में ठोस परिणाम सामने नहीं आए, तो वे रेलवे ट्रैक और नेशनल हाईवे को पूरी तरह जाम करने जैसा कड़ा कदम उठाने पर मजबूर होंगे, जिसकी जिम्मेदारी सरकार की होगी।

मांगों पर गंभीरता से विचार किया जा रहा है

इस पूरे घटनाक्रम पर एडीसी केशव गोयल ने कहा कि किसान नेताओं के साथ सकारात्मक माहौल में बातचीत हुई है। उन्हें भरोसा दिया गया है कि सरकार के स्तर पर उनकी मांगों पर गंभीरता से विचार किया जा रहा है और जल्द ही कोई न कोई उचित समाधान निकाल लिया जाएगा।