Sep 05, 2026 07:33 pm ISTलाइव हिन्दुस्तान

मुख्य बातें
- अडानी डिफेंस एंड एयरोस्पेस ने इंडो-रशियन राइफल्स प्राइवेट लिमिटेड के साथ 5 साल के लिए एक बड़ी डील की है
- इस डील की खास बात यह है कि AK-203 की राइफल और उसके लिए इस्तेमाल होने वाली गोलियां और बारूद एक ही घरेलू सप्लाई चेन का हिस्सा बन जाएंगे

अडानी समूह की बड़ी डील
गौतम अडानी समूह की कंपनी- अडानी डिफेंस एंड एयरोस्पेस ने इंडो-रशियन राइफल्स प्राइवेट लिमिटेड के साथ 5 साल के लिए एक बड़ी डील की है। इसके तहत अडानी डिफेंस पांच साल तक AK-203 राइफल के लिए जरूरी छोटे हथियारों के गोलियां और बारूद की आपूर्ति करेगी। बता दें कि AK-203 एके सीरीज की आधुनिक असॉल्ट राइफल है, जिसे भारतीय सशस्त्र बलों के लिए भारत में बनाया जा रहा है।
अमेठी में होगी मैन्युफक्चरिंग
इसके निर्माण की जिम्मेदारी इंडो-रशियन राइफल्स प्राइवेट लिमिटेड (IRRPL) को दी गई है। यह एक ज्वाइंट वेंचर कंपनी है। इसमें भारत की तरफ से एडवांस्ड वेपन्स एंड इक्विपमेंट इंडिया लिमिटेड और म्यूनिशंस इंडिया लिमिटेड जबकि रूस की तरफ से कंसर्न कलाश्निकोव और रोसोबोरोनएक्सपोर्ट शेयरधारक हैं। कंपनी का मैन्युफैक्चरिंग प्लांट उत्तर प्रदेश के अमेठी जिले के कोरवा में स्थित है।
6 लाख से ज्यादा AK-203 बनाने का लक्ष्य
सरकार ने दिसंबर 2021 में इंडो-रशियन राइफल्स प्राइवेट लिमिटेड के साथ 6,01,427 एके-203 राइफल के निर्माण के लिए अनुबंध किया था। इन सभी राइफल का निर्माण कोरवा स्थित प्लांट में किया जाना है। बता दें कि IRRPL की स्थापना वर्ष 2019 में भारत-रूस के अंतर-सरकारी समझौते के तहत की गई थी।
अडानी ग्रुप की भूमिका
इंडो-रशियन राइफल्स प्राइवेट लिमिटेड जहां AK-203 राइफल का निर्माण कर रही है, वहीं अडानी ग्रुप की कंपनी डिफेंस उसके लिए जरूरी गोला-बारूद तैयार करेगी। जानकारी के मुताबिक अडानी डिफेंस 7.62x39 मिमी छोटे हथियारों के गोला-बारूद की सप्लाई करेगी। अडानी डिफेंस की इस डील से भविष्य में गोला-बारूद की सप्लाई के लिए विदेशों पर निर्भरता कम करने में मदद मिल सकती है। अडानी डिफेंस पहले से ही भारत में छोटे हथियारों के गोला-बारूद के उत्पादन की क्षमता विकसित कर रही है। कंपनी का कानपुर में भी मैन्युफैक्चरिंग प्लांट है।
हर साल एक लाख हथियार बनाने की क्षमता
अडानी डिफेंस एंड एरोस्पेस के CEO आशीष राजवंशी ने इस बात पर जोर दिया कि उनका मकसद सिर्फ हार्डवेयर सप्लाई करना नहीं बल्कि भारत में अलग-अलग तरह के छोटे हथियारों के लिए एक मजबूत मैन्युफैक्चरिंग इंफ्रास्ट्रक्चर बनाना है। उन्होंने यह भी बताया कि अडानी डिफेंस एंड एरोस्पेस के पास हर साल एक लाख हथियार बनाने की क्षमता है। राजवंशी ने कहा, "इस मुकाम तक पहुंचने में हमें 6 साल लगे। हम गर्व के साथ कह सकते हैं कि हम सिर्फ पार्ट्स बनाने वाली कंपनी से एक पूरी गन बनाने वाली कंपनी (OEM) बन गए हैं। हमारा पूरा ध्यान सिर्फ कोई प्रोडक्ट या गन सप्लाई करने पर नहीं था बल्कि भारत में छोटे हथियारों की पूरी रेंज के लिए गहरी क्षमता विकसित करने पर था। जो काम लाइट मशीन गन के कॉन्ट्रैक्ट से शुरू हुआ था, वह असल में देश के भीतर लाइट मशीन गन, असॉल्ट राइफल, पिस्तौल, स्नाइपर और कार्बाइन बनाने की पूरी क्षमता विकसित करने का काम बन गया।"