Home National आसमान में बादलों की स्पीड कितनी होती है, क्या बादलों के ऊपर खड़े हो सकते हैं - Amazing facts about clouds
personUpdesh Awasthee
7/14/2026 10:14:00 AM
आसमान में उड़ते बादल कितने अच्छे लगते हैं। कई बार तो ऐसा लगता है जैसे स्लो मोशन में जा रहे हैं, लेकिन क्या आपको पता है आसमान में बादलों की स्पीड कितनी होती है। फिल्मों और कहानियों में परियां, बच्चे और जादू वाला बाबा बादल के ऊपर बैठे हुए दिखाई देते हैं। क्या सचमुच हम बदल के ऊपर खड़े हो सकते हैं। इस इंटरेस्टिंग ब्लॉग में हम आपको यह सारी मजेदार जानकारी देने वाले हैं:-
बादलों की असली रफ़्तार: कछुआ या खरगोश?
हमें जमीन से देखने पर बादल भले ही कछुए की चाल चलते हुए लगें, लेकिन असल में वे हवा की रफ़्तार से मुकाबला करते हैं। सच तो यह है कि बादल उतनी ही तेज़ी से चलते हैं जितनी तेज़ी से उस ऊँचाई पर हवा चल रही होती है।
निचले बादल (0-2 किमी की ऊँचाई): ये थोड़े सुस्त होते हैं और 30 से 80 किमी प्रति घंटा की रफ़्तार से उड़ते हैं।
ऊँचे बादल (5-13 किमी की ऊँचाई): ये असली 'स्पीडस्टर' होते हैं। जेट स्ट्रीम के प्रभाव में इनकी रफ़्तार 100 से 250 किमी प्रति घंटा तक पहुँच सकती है। यानी एक रेसिंग कार से भी तेज़!
फिर ये इतने धीरे क्यों दिखाई देते हैं?
यह सिर्फ हमारी आँखों का धोखा (Optical Illusion) है। चूंकि बादल हमसे बहुत ऊँचे और आकार में बहुत विशाल होते हैं, इसलिए उनकी तेज़ रफ़्तार भी हमें 'स्लो मोशन' जैसी लगती है, ठीक वैसे ही जैसे आसमान में उड़ता हुआ तेज़ रफ़्तार हवाई जहाज़ हमें धीरे चलता महसूस होता है।
क्या हम बादलों पर बैठकर सैर कर सकते हैं?
फिल्मों में परियों को बादलों पर चलते देखना अच्छा लगता है, लेकिन वैज्ञानिक रूप से यह असंभव है। बादल कोई रुई के फाहे या स्पंज जैसी ठोस चीज़ नहीं हैं, बल्कि वे हवा में तैरती पानी की नन्हीं बूंदों या बर्फ के क्रिस्टल का एक समूह हैं।
एक सामान्य बादल में 1 घन मीटर हवा में सिर्फ 0.5 ग्राम पानी होता है, जबकि उतनी ही हवा का वजन 1200 ग्राम होता है। इसका मतलब है कि बादल ज़्यादातर हवा ही होते हैं। अगर आप उन पर खड़े होने की कोशिश करेंगे, तो आप कोहरे के बीच से गिरते हुए सीधे नीचे आ जाएंगे। विमान भी हर दिन बादलों के बीच से आसानी से निकल जाते हैं; अगर बादल ठोस होते, तो विमान उनसे टकराकर क्रैश हो जाते!
वैज्ञानिकों ने बादलों की रफ़्तार कैसे नापी?
पुराने समय में लोग सिर्फ अंदाज़ा लगाते थे, लेकिन 19वीं शताब्दी में 'नेफोस्कोप' (Nephoscope) नामक एक यंत्र आया।
स्वीडिश वैज्ञानिक कार्ल गॉटफ्रिड फाइनमैन ने 1886 के आसपास एक 'मिरर नेफोस्कोप' बनाया था, जिसमें दर्पण पर बादल की परछाई देखकर उसकी दिशा और गति का पता लगाया जाता था।
आज के दौर में हम सैटेलाइट ट्रैकिंग, डॉपलर रडार और लेज़र (लाइडार) जैसी आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल करते हैं, जिससे बादलों की रफ़्तार का सटीक पता चल जाता है।
तो अगली बार जब आप बादलों को आसमान में धीरे-धीरे सरकते देखें, तो याद रखिएगा कि वे शायद 100 की रफ़्तार से दौड़ रहे हैं।
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