26 जुलाई 2026 को रवि प्रदोष व्रत मनाया जाएगा। जानिए पूजा का शुभ समय, शिवलिंग अभिषेक की सही विधि, बेलपत्र अर्पित करने का महत्व और भोलेनाथ की कृपा पाने के आसान उपाय।
Ashadha Pradosh Vrat 2026
- Published: 25 Jul 2026, 09:46 AM IST
- Last Updated: 25 Jul 2026, 09:46 AM IST
Ashadha Pradosh Vrat 2026: हिंदू धर्म में प्रदोष व्रत भगवान शिव की उपासना का अत्यंत शुभ अवसर माना जाता है। प्रत्येक माह की त्रयोदशी तिथि को रखा जाने वाला यह व्रत शिव भक्तों के लिए विशेष महत्व रखता है। इस वर्ष आषाढ़ माह का अंतिम प्रदोष व्रत 26 जुलाई 2026, रविवार को मनाया जाएगा। रविवार को पड़ने के कारण इसे रवि प्रदोष व्रत भी कहा जाएगा।
धार्मिक मान्यता है कि प्रदोष काल में भगवान शिव और माता पार्वती की विधिवत पूजा करने से सभी प्रकार के कष्ट दूर होते हैं, परिवार में सुख-शांति आती है और मनोकामनाओं की पूर्ति होती है।
प्रदोष व्रत की तिथि और शुभ समय
पंचांग के अनुसार, आषाढ़ शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि 26 जुलाई 2026 को दोपहर 1:57 बजे शुरू होगी और 27 जुलाई 2026 को शाम 4:14 बजे समाप्त होगी। प्रदोष व्रत में पूजा का महत्व प्रदोष काल में होता है, इसलिए व्रत 26 जुलाई को रखा जाएगा।
ऐसे करें भगवान शिव की पूजा
- सुबह स्नान करके व्रत का संकल्प लें।
- प्रदोष काल में भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा करें।
- शिवलिंग पर जल, गंगाजल, दूध, दही, घी और शहद से अभिषेक करें।
- अभिषेक के दौरान 'ॐ नमः शिवाय' मंत्र का जाप करें।
- शिवलिंग पर बेलपत्र, धतूरा, सफेद पुष्प और चंदन अर्पित करें।
- शिव चालीसा, शिव आरती और महामृत्युंजय मंत्र का पाठ करें।
बेलपत्र चढ़ाने का महत्व
भगवान शिव की पूजा में बेलपत्र का विशेष स्थान है। मान्यता है कि तीन पत्तियों वाला स्वच्छ बेलपत्र श्रद्धापूर्वक अर्पित करने से भोलेनाथ शीघ्र प्रसन्न होते हैं और भक्तों की मनोकामनाएं पूर्ण करते हैं।
महामृत्युंजय मंत्र का करें जाप
प्रदोष व्रत के दिन शिवलिंग पर जल अर्पित करने के बाद महामृत्युंजय मंत्र का जाप करना अत्यंत शुभ माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इससे जीवन की बाधाएं दूर होती हैं, मानसिक शांति मिलती है और भगवान शिव की विशेष कृपा प्राप्त होती है।
दान-पुण्य का भी है विशेष महत्व
प्रदोष व्रत पर पूजा के साथ दान-पुण्य करना भी शुभ माना गया है। अपनी क्षमता के अनुसार जरूरतमंद लोगों को अन्न, वस्त्र या भोजन का दान करने से पुण्य की प्राप्ति होती है और भगवान शिव प्रसन्न होकर सुख-समृद्धि का आशीर्वाद देते हैं।