BCI चेयरमैन को पद से हटाने की मांग को लेकर SC में याचिका दायर, मनन मिश्रा ने कहा- इस्तीफा नहीं दूंगा - petition filed in supreme court to remove bci chairman manan mishra say i will not resign after cjp and aap protest bar council nalsar cji row

Published on 22 अग॰ 2026

सुप्रीम कोर्ट में बार काउंसिल ऑफ इंडिया (BCI) के अध्यक्ष मनन कुमार मिश्रा को पद से हटाने की मांग को लेकर याचिका दायर की गई है।

मनन मिश्रा ने कहा- मैं इस्तीफा नहीं दूंगा (जागरण)

मनन मिश्रा ने कहा- मैं इस्तीफा नहीं दूंगा (जागरण)

HighLights

  1. BCI अध्यक्ष मनन मिश्रा के खिलाफ SC में याचिका दायर।

  2. याचिका में लगातार कार्यकाल को नियमों के खिलाफ बताया।

  3. मिश्रा ने कहा, चुनाव से आया हूं, इस्तीफा नहीं दूंगा।

डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। हैदराबाद की NALSAR यूनिवर्सिटी ऑफ लॉ का मामला अब सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया है। चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया सूर्यकांत को दीक्षांत समारोह में बुलाने पर हंगामा मचा था।

बार काउंसिल के अध्यक्ष मनन कुमार मिश्रा ने यूनिवर्सिटी के 2026 बैच के स्टूडेंट्स का एनरोलमेंट रद करने का आदेश दिया था, लेकिन 15 मिनट बाद ही ये आदेश वापस लिया गया। लेकिन इसके बाद अब स्टूडेंट्स BCI अध्यक्ष के इस्तीफे की मांग कर रहे हैं।

'मैं इस्तीफा नहीं दूंगा'

इस विवाद के बीच सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका दायर कर BCI चेयरमैन के तौर पर मिश्रा के बने रहने को चुनौती दी गई है। इस पर मनन कुमार मिश्रा ने कहा, वे चुनाव के जरिए इस पद पर हैं और देश भर के करीब 25 लाख वकीलों का प्रतिनिधित्व करते हैं।

BCI अध्यक्ष मनन कुमार मिश्रा ने कहा, 'मैं एक चुना हुआ प्रतिनिधि हूं। मुझे बार काउंसिल ऑफ इंडिया के लिए न तो चुना गया था और न ही नॉमिनेट किया गया था। यह एडवोकेट्स एक्ट के तहत बनी एक कानूनी संस्था है। इस सिस्टम में देश भर के 25 लाख से ज्यादा वकील वोटर हैं।'

मनन कुमार मिश्रा ने बार काउंसिल के अध्यक्ष चुने जाने की प्रक्रिया के बारे में बताते हुए कहा, 'सबसे पहले, वे स्टेट बार काउंसिल के लिए अपने प्रतिनिधि चुनते हैं। फिर सभी स्टेट बार काउंसिल के प्रतिनिधि मिलकर बार काउंसिल ऑफ इंडिया के लिए अपने प्रतिनिधि चुनते हैं, और सभी राज्यों के ये प्रतिनिधि मिलकर चेयरमैन और वाइस-चेयरमैन को चुनते हैं।'

BCI अध्यक्ष ने बताया, 'यह मेरा सातवां कार्यकाल है। पिछले छह कार्यकाल में मैं निर्विरोध चुना गया हूं। आज भी, बार काउंसिल के दो-तिहाई से ज्यादा सदस्य मेरा समर्थन करते हैं। अगर कुछ लोग बेबुनियाद आरोप लगा रहे हैं, चाहे वह ट्रस्ट के बारे में हों या किसी रिश्तेदार की नियुक्ति के बारे में, तो उनमें कोई सच्चाई नहीं है। ये बेबुनियाद दावे अब सामने आ रहे हैं।'

मनन मिश्रा ने आगे कहा, 'ट्रस्ट की बात करें तो इसका पूरा कामकाज पूरी तरह पारदर्शी है। मैनेजिंग ट्रस्टीज में जाने-माने लोग शामिल हैं। बार काउंसिल के सदस्य और सीनियर वकील। कोई भी आकर अकाउंट्स की जांच कर सकता है, ट्रस्ट का सालाना ऑडिट होता है।'

बार काउंसिल के अध्यक्ष ने कॉकरोच जनता पार्टी पर आरोप लगाते हुए कहा, 'ऑडिट रिपोर्ट को बजट में शामिल किया जाता है, पब्लिश किया जाता है और पब्लिक डोमेन में उपलब्ध कराया जाता है। ये बेबुनियाद आरोप कुछ ऐसे लोग लगा रहे हैं, जैसे CJP के लोग, जिनका बार काउंसिल से कोई लेना-देना नहीं है।'

मनन मिश्रा ने आगे कहा, 'सीजेपी ने वकीलों को लीगल कॉकरोच तक कह दिया है। यह कानूनी बिरादरी के लिए बहुत शर्मनाक है, और वकीलों का समुदाय ऐसी बेबुनियाद और बचकानी बातों को कभी बर्दाश्त नहीं करेगा... मनन मिश्रा तब तक प्रेसिडेंट बने रहेंगे जब तक देश के वकील, यानी वोटर, चाहेंगे कि वे बने रहें।'

मिश्रा ने यह बात दिल्ली के अलग-अलग बार एसोसिएशन के वकीलों के एक समूह द्वारा नई दिल्ली में BCI ऑफिस के बाहर विरोध प्रदर्शन करने के एक दिन बाद कही।

सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर

सुप्रीम कोर्ट में वकील दीपक प्रकाश के जरिए वकील योगमाया MG के जरिए दायर की गई याचिका में बार काउंसिल ऑफ इंडिया के अध्यक्ष पर आरोप लगाया गया है कि एक दशक से ज्यादा समय तक उनका लगातार कार्यकाल BCI के नियमों के खिलाफ है।

याचिकाकर्ता ने BCI नियमों के नियम 12(2) का हवाला दिया है, जिसमें चेयरमैन और वाइस-चेयरमैन के लिए दो साल के कार्यकाल या उनके सदस्य न रहने तक (जो भी पहले हो) का प्रविधान है।

याचिका में 21 अप्रैल, 2025 के उस गैजेट नोटिफिकेशन को भी चुनौती दी गई है, जिसके तहत कथित तौर पर मिश्रा का कार्यकाल 2030 तक बढ़ा दिया गया था। इसमें सुप्रीम कोर्ट से नोटिफिकेशन को रद करने और BCI को इसे वापस लेने या निरस्त करने का निर्देश देने की मांग की गई है।

याचिका के अनुसार, मिश्रा पहली बार 2012 में BCI चेयरमैन बने थे। हालांकि 2014 में उन्होंने कुछ समय के लिए यह पद छोड़ दिया था, लेकिन उसी साल नवंबर में वे फिर से चेयरमैन बन गए और तब से इस पद पर बने हुए हैं। याचिकाकर्ता का दावा है कि मार्च 2025 में उनका फिर से चुना जाना उनका लगातार सातवां कार्यकाल था।

याचिका में तर्क दिया गया है कि बार-बार फिर से चुने जाने पर कोई कुल सीमा न होने के कारण यह पद लंबे समय तक एक ही व्यक्ति के पास बना रहता है।

याचिका में कहा गया है, "हालाँकि नियम 12(2) में दो साल के कार्यकाल का प्रावधान है, लेकिन बार-बार फिर से चुने जाने पर कोई ठोस रोक नहीं है। नतीजतन, यह पद लगभग बारह वर्षों से एक ही व्यक्ति के पास है।

इस तरह का लंबा एकाधिकार प्रथम दृष्टया धारा 4(1)(c) में शामिल प्रतिनिधि व्यवस्था के असंगत है, जिसके तहत प्रत्येक राज्य बार काउंसिल, बार काउंसिल ऑफ इंडिया के गठन में योगदान देती है।

पूरे कानूनी पेशे का प्रतिनिधित्व करने वाली एक राष्ट्रीय संस्था को अपने सर्वोच्च पद को अनिश्चित काल तक एक ही व्यक्ति या किसी सीमित क्षेत्रीय समूह के पास केंद्रित नहीं रहने देना चाहिए।

मिश्रा ने CJI मामले पर रखा अपना पक्ष

मनन कुमार मिश्रा ने कहा, 'हाल ही में सोशल मीडिया पर बहुत सी गैर-जिम्मेदाराना और बेतुकी बातें चल रही हैं। हैदराबाद की NALSAR यूनिवर्सिटी के छात्रों ने भारत के मुख्य न्यायाधीश, जो उनके चांसलर भी हैं, उनका बहिष्कार करने का फैसला किया  था और उस दीक्षांत समारोह में शामिल होने से इनकार कर दिया जिसकी अध्यक्षता उन्हें ही करनी थी।'

बार काउंसिल के चेयरमैन ने आगे कहा, 'बार काउंसिल ऑफ इंडिया के चेयरमैन के तौर पर, मुझे यह बात बहुत गलत लगी। इस मामले को लेकर BCI ने शुरू में एक आदेश जारी किया था कि इसमें शामिल छात्रों का एनरोलमेंट प्रोसेस नहीं किया जाएगा।'

मनन मिश्रा ने आगे बताया, '15 मिनट के भीतर ही वह आदेश वापस ले लिया गया और छात्रों की शिकायतों का समाधान कर दिया गया।'

मिश्रा ने आम आदमी पार्टी और कॉकरोच जनता पार्टी पर आरोप लगाते हुए कहा, 'बाद में AAP के सदस्यों और CJP ग्रुप ने उनके इस्तीफे की मांग के लिए इस घटना का इस्तेमाल किया।'

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