राष्ट्रमंडल खेल (ग्लासगो 2026) की पैरा पावरलिफ्टिंग प्रतियोगिता में बिहार के लाल झंडू कुमार ने शानदार प्रदर्शन करते हुए कांस्य पदक जीतकर देश, प्रदेश और अपने गृह क्षेत्र का नाम रोशन कर दिया। उनकी इस ऐतिहासिक उपलब्धि से न केवल बिहार और नालंदा बल्कि पूरे देश में खुशी का माहौल है। अंतरराष्ट्रीय पैरा पावरलिफ्टर झंडू कुमार ने अपने अद्भुत साहस, कड़ी मेहनत और मजबूत इच्छाशक्ति के दम पर यह सफलता हासिल की है। उन्होंने साबित कर दिया कि यदि हौसला बुलंद हो तो शारीरिक चुनौतियां और कठिन परिस्थितियां भी सफलता की राह में बाधा नहीं बन सकतीं। उनकी यह उपलब्धि दिव्यांग खिलाड़ियों और युवाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत बन गई है।
रोमांचक मुकाबले में तीसरा स्थान हासिल कर भारत को दिलाया कांस्य पदक
ग्लासगो में आयोजित कॉमनवेल्थ गेम्स की मेंस हेवीवेट पैरा पावरलिफ्टिंग स्पर्धा में दुनिया के कई दिग्गज खिलाड़ियों ने हिस्सा लिया। बेहद कांटे की टक्कर वाले मुकाबले में नाइजीरिया के रिलुवान इदरीस ने 132.8 अंक के साथ स्वर्ण पदक जीता, जबकि इंग्लैंड के मैथ्यू हार्डिंग ने 131.0 अंक के साथ रजत पदक अपने नाम किया। भारत का प्रतिनिधित्व कर रहे बिहार के झंडू कुमार ने 130.9 अंक हासिल कर तीसरा स्थान प्राप्त किया और देश की झोली में कांस्य पदक डाला। स्वर्ण और रजत पदक से मामूली अंतर से चूकने के बावजूद उनका यह कांस्य पदक ऐतिहासिक उपलब्धि माना जा रहा है।
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परिवार में जश्न, रातभर जागकर देखते रहे मुकाबला
झंडू कुमार की सफलता से उनके पैतृक गांव में जश्न का माहौल है। ग्रामीण और शुभचिंतक लगातार उनके घर पहुंचकर परिवार को बधाई दे रहे हैं। झंडू के पिता रामानंद पासवान ने भावुक होकर बताया कि वे पूरी रात सो नहीं पाए और मोबाइल पर बेटे का मुकाबला देखते रहे। उन्होंने कहा कि बेटे की जीत उनके जीवन का सबसे गर्व का पल है। झंडू के भाई कुंदन कुमार ने बताया कि पूरा परिवार रात नौ बजे से ही मुकाबला देख रहा था। उन्होंने कहा कि तनाव और रोमांच के बीच मोबाइल की बैटरी भी लगभग खत्म होने वाली थी, लेकिन जैसे ही झंडू ने पदक जीता, पूरे परिवार की खुशी का ठिकाना नहीं रहा। उन्होंने कामना की कि झंडू आगे भी देश के लिए ऐसे ही पदक जीतते रहें। माता कमला देवी ने कहा कि उन्होंने हमेशा अपने बेटे को तिरंगा लहराने और देश का नाम रोशन करने का आशीर्वाद दिया था। आज उनका सपना साकार हो गया।
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संघर्षों के बीच सरकारी सहायता नहीं मिलने का दर्द
एक ओर जहां झंडू कुमार की उपलब्धि पर पूरा देश गर्व कर रहा है, वहीं उनके परिवार ने सरकारी सहायता नहीं मिलने की पीड़ा भी साझा की। पिता रामानंद पासवान ने बताया कि इस मुकाम तक पहुंचने के लिए परिवार को किसी प्रकार की सरकारी आर्थिक सहायता या स्थानीय प्रशासन का सहयोग नहीं मिला। उन्होंने कहा कि आज तक उन्हें इंदिरा आवास योजना या प्रधानमंत्री आवास योजना जैसी बुनियादी योजनाओं का भी लाभ नहीं मिल पाया। नगर पंचायत स्तर पर आश्वासन जरूर मिले, लेकिन जमीनी स्तर पर कोई मदद नहीं पहुंची। इसके बावजूद झंडू ने अपने संघर्ष, मेहनत और परिवार के सहयोग के दम पर यह मुकाम हासिल किया।
खेल जगत ने दी बधाई
झंडू कुमार की इस अंतरराष्ट्रीय उपलब्धि पर खेल जगत में खुशी की लहर है। नालंदा पैरा स्पोर्ट्स एसोसिएशन के सचिव एवं कोच कुंदन कुमार पांडे, बिहार पैरा स्पोर्ट्स एसोसिएशन के सचिव संदीप कुमार, नालंदा पैरा स्पोर्ट्स एसोसिएशन के पदाधिकारियों, हरनौत के खेलप्रेमियों, नालंदा जिले के नागरिकों और बिहार के विभिन्न खेल संगठनों ने उन्हें बधाई और शुभकामनाएं दी हैं। सभी ने विश्वास जताया कि झंडू कुमार भविष्य में भी अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में देश के लिए स्वर्णिम सफलता हासिल करेंगे और विश्व मंच पर भारत का तिरंगा बुलंद करेंगे।