By Oneindia Staff
Published: Monday, July 27, 2026, 21:16 [IST]
Prabhat Jha Death Anniversary: भाजपा के पूर्व राष्ट्रीय उपाध्यक्ष एवं पूर्व राज्यसभा सांसद स्वर्गीय प्रभात झा की दूसरी पुण्यतिथि के अवसर पर नई दिल्ली स्थित हिंदी भवन में उनके व्यक्तित्व एवं कृतित्व पर एक संगोष्ठी का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में केंद्रीय जल शक्ति राज्य मंत्री राज भूषण चौधरी मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। इस दौरान उन्होंने प्रभात झा के जीवन, विचारों और संगठनात्मक योगदान को याद करते हुए कहा कि उनके विचारों ने पीढ़ियों का पथ आलोकित किया और उन्होंने अपने विचार, लेखनी, संगठन क्षमता एवं राष्ट्र समर्पित जीवन से भारतीय जनता पार्टी को सशक्त बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
राज भूषण चौधरी ने अपने संबोधन में कहा कि प्रभात झा केवल एक राजनेता नहीं थे, बल्कि वे एक सजग पत्रकार, संवेदनशील लेखक, कुशल संगठनकर्ता और राष्ट्रहित को सर्वोपरि मानने वाले कर्मयोगी थे। उन्होंने कहा कि प्रभात झा के शब्दों में विचारों की दृढ़ता झलकती थी, जबकि उनके व्यक्तित्व में आत्मीयता का अद्भुत तेज दिखाई देता था। उन्होंने कहा कि प्रभात झा का सार्वजनिक जीवन राष्ट्र और समाज के प्रति समर्पण का उदाहरण था, जिससे नई पीढ़ी प्रेरणा ले सकती है।
कार्यक्रम की अध्यक्षता वरिष्ठ पत्रकार एवं इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र (आईजीएनसीए) के अध्यक्ष रामबहादुर राय ने की। उन्होंने प्रभात झा को बहुआयामी व्यक्तित्व का धनी बताते हुए कहा कि उनकी सबसे बड़ी विशेषता यह थी कि उन्होंने सत्य के धर्म का भी पालन किया और राजनीतिक दल के अनुशासन एवं बंधन का भी पूरी निष्ठा से निर्वहन किया। उन्होंने कहा कि प्रभात झा ने कई महत्वपूर्ण पुस्तकों का संपादन किया और हिंदी भाषा पर उनका असाधारण अधिकार था।
रामबहादुर राय ने आयोजकों से आग्रह किया कि प्रभात झा की स्मृति में इस प्रकार के आयोजनों की निरंतरता बनाए रखी जाए, ताकि समाज उनके विचारों और लेखनी से परिचित हो सके। उन्होंने सुझाव दिया कि अगली पुण्यतिथि से प्रभात झा को प्रिय विषयों पर स्मारक व्याख्यानों की श्रृंखला प्रारंभ की जानी चाहिए, जिससे उनके वैचारिक योगदान को आगे बढ़ाया जा सके।
संगोष्ठी में विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित पांचजन्य के संपादक हितेश शंकर ने प्रभात झा के व्यक्तित्व को याद करते हुए कहा कि उनके विचारों में अद्भुत स्पष्टता थी। उन्होंने कहा कि राजनीति में विचार के प्रति इतना आग्रह रखने वाले लोग बहुत कम मिलते हैं और प्रभात झा उसी विलक्षण एवं विरल परंपरा के प्रतिनिधि थे।
हितेश शंकर ने कहा कि सामान्यतः शक्ति मिलने पर व्यक्ति के स्वभाव में कठोरता आ जाती है, लेकिन प्रभात झा ऐसे व्यक्तित्व थे, जिनके पास शक्ति होने के बावजूद उनके व्यवहार में मृदुलता और सहजता बनी रही। उन्होंने कहा कि प्रभात झा के कार्यों में गहराई दिखाई देती थी। उन्होंने अपने व्यवहार और कार्यशैली से लोगों के भीतर विश्वास जगाया और उसी विश्वास के आधार पर समाज में अपनी पहचान बनाई।
कमल संदेश पत्रिका के संपादक शिव शक्ति नाथ बक्सी ने भी प्रभात झा के योगदान को याद करते हुए कहा कि वे हमेशा नेपथ्य में रहकर संगठन को मजबूत करने वाले नेताओं में शामिल रहे। उन्होंने कहा कि प्रभात झा लोकसंग्रही व्यक्तित्व के धनी थे और उन्होंने मध्यप्रदेश तथा दिल्ली में संगठनकर्ता के रूप में उल्लेखनीय कार्य किया। उन्होंने बताया कि कमल संदेश पत्रिका में परिवार भाव से कार्य करने की प्रेरणा उन्हें प्रभात झा से ही मिली।
कार्यक्रम में छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री के मीडिया सलाहकार पंकज कुमार झा ने कहा कि राजनीतिक जीवन में कार्यकर्ताओं को जोड़ना और उन्हें साथ लेकर चलना अत्यंत चुनौतीपूर्ण कार्य होता है, जिसे प्रभात झा ने सफलतापूर्वक निभाया। उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश भाजपा में संवाद प्रमुख के रूप में प्रभात झा ने महत्वपूर्ण योगदान दिया और संगठनात्मक मजबूती में उनकी भूमिका हमेशा याद रखी जाएगी।
संगोष्ठी के दौरान प्रभात झा के जीवन और कार्यों पर आधारित दो पुस्तकों का भी लोकार्पण किया गया। इनमें कमल संदेश के सह संपादक संजीव सिन्हा द्वारा संपादित 'प्रभात झा : व्यक्ति एवं कृतित्व' तथा सुमित मिश्र द्वारा लिखित 'नवभारत का न्याय दर्शन' शामिल हैं। अतिथियों ने दोनों पुस्तकों के प्रकाशन को प्रभात झा के विचारों को नई पीढ़ी तक पहुंचाने की दिशा में महत्वपूर्ण प्रयास बताया।
कार्यक्रम का संचालन संजीव सिन्हा ने किया, जबकि धन्यवाद ज्ञापन शरत झा ने प्रस्तुत किया। संगोष्ठी में प्रभात झा के जीवन, उनकी वैचारिक प्रतिबद्धता, पत्रकारिता, संगठन कौशल तथा सार्वजनिक जीवन के विभिन्न आयामों पर विस्तार से चर्चा की गई।
इस अवसर पर वरिष्ठ पत्रकार अवधेश कुमार, मनोज मिश्र, विधायक अभय वर्मा, भाजपा पूर्वांचल मोर्चा दिल्ली प्रदेश अध्यक्ष संतोष ओझा, विद्यानंद ठाकुर, तुष्मुल झा, अंजनी झा सहित अनेक गणमान्य अतिथि एवं विशिष्टजन उपस्थित रहे। सभी वक्ताओं ने प्रभात झा के व्यक्तित्व एवं कृतित्व को स्मरण करते हुए उन्हें एक ऐसे जननेता, विचारक और संगठनकर्ता के रूप में याद किया, जिन्होंने अपने जीवन के प्रत्येक क्षेत्र में राष्ट्रहित और संगठन को सर्वोच्च प्राथमिकता दी।