Updated On: Jul 13, 2026 | 12:00 PM IST
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सार
Bullet Train Project: मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन प्रोजेक्ट जमीन मुआवजे के विवाद के कारण खटाई में पड़ता दिख रहा है। बढ़े मुआवजे से परियोजना पर 40,000 करोड़ का भारी-भरकम अतिरिक्त बोझ आ सकता है।

बुलेट ट्रेन (सोर्स: सोशल मीडिया)
विस्तार
Mumbai Ahmedabad Bullet Train Project Land Acquisition Dispute: भारत की पहली और बेहद महत्वाकांक्षी मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन परियोजना एक नए और बड़े संकट में घिर गई है। जमीन अधिग्रहण के मुआवजे को लेकर उपजे विवाद के कारण इस 1.10 लाख करोड़ रुपये की महा-परियोजना के भविष्य पर तलवार लटक गई है। प्रोजेक्ट के मुख्य प्रबंधक ने अब इस मामले को लेकर गुजरात हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया है।
गुजरात हाईकोर्ट में महाधिवक्ता की गंभीर चेतावनी
मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन परियोजना जमीन अधिग्रहण मुआवजे को लेकर नई मुश्किलों में घिरती दिख रही है। बुलेट ट्रेन प्रोजेक्ट के मुख्य प्रबंधक ने इसे लेकर अब गुजरात हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। उन्होंने अपनी याचिका में कहा है कि अगर भूमि अधिग्रहण, पुनर्वास और पुनर्स्थापन प्राधिकरण (LARRA) की तरफ तय बढ़े हुए मुआवजे को लागू किया गया, तो बुलेट ट्रेन प्रोजेक्ट पर करीब 40,000 करोड़ रुपये का अतिरिक्त बोझ पड़ सकता है। इससे 1.10 लाख करोड़ रुपये की इस परियोजना का भविष्य प्रभावित हो सकता है।
गुजरात हाईकोर्ट में सुनवाई के दौरान राज्य के महाधिवक्ता कमल त्रिवेदी ने दलील दी कि जनवरी और फरवरी में एलएआरआरए की तरफ से दिए गए संशोधित मुआवजा आदेशों से परियोजना की लागत में भारी बढ़ोतरी होगी। उन्होंने अदालत से कहा कि अगर यह बोझ प्रोजेक्ट पर डाला गया तो इसके आगे बढ़ने पर गंभीर खतरा पैदा हो जाएगा।
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कोर्ट का मुआवजे पर सवाल
गुजरात हाईकोर्ट ने सूरत और भरूच जिले से जुड़े तीन मामलों में बुलेट ट्रेन प्रोजेक्ट मैनेजमेंट की अपील स्वीकार कर ली है। इन मामलों की अगली सुनवाई 5 अगस्त को होगी। उस दिन अदालत यह भी तय कर सकती है कि एलएआरआरए के आदेश पर अंतरिम रोक लगाई जाए या नहीं। साथ ही कोर्ट ने प्रोजेक्ट अथॉरिटी से पूछा है कि वह मुआवजे की राशि में से कितना पैसा जमा कराने को तैयार है।
भरूच के ओच्छन गांव की जमीन से जुड़ा विवाद
यह पूरा विवाद भरूच जिले के अमोद तहसील के ओच्छन गांव की जमीन से जुड़ा है। वर्ष 2018 में यहां भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया शुरू हुई थी और 2020 में अधिग्रहण अधिकारी ने मुआवजा 50 रुपये प्रति वर्ग मीटर तय किया था। इसी आधार पर एक जमीन मालिक को करीब 85.8 लाख रुपये का मुआवजा मिला। हालांकि, उसने अपना मुआवजा बढ़ाने की मांग की थी। इसके बाद एलएआरआरए ने मुआवजा बढ़ाकर 660 रुपये प्रति वर्ग मीटर कर दिया, जिससे उसी जमीन का मुआवजा बढ़कर करीब 8.4 करोड़ रुपये हो गया।
…तो बुलेट ट्रेन प्रोजेक्ट आगे नहीं बढ़ पाएगा
बुलेट ट्रेन प्रोजेक्ट मैनेजमेंट का कहना है कि एलएआरआरए ने मुआवजा तय करते समय पास के गांवों की जमीन की कीमतों को नजरअंदाज कर 14 किलोमीटर दूर स्थित सिमार्था गांव की बिक्री दर को आधार बनाया, जो उचित नहीं है। प्राधिकरण का तर्क है कि मुआवजा आसपास के समान प्रकृति वाली जमीन के औसत बाजार मूल्य के आधार पर तय होना चाहिए।
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मामले की सुनवाई के दौरान महाधिवक्ता कमल त्रिवेदी ने कहा कि ब्याज जोड़ने के बाद अतिरिक्त वित्तीय बोझ करीब 40,000 करोड़ रुपये तक पहुंच सकता है। रिपोर्ट के मुताबिक, उन्होंने अदालत में साफ शब्दों में कहा, ‘अगर यह अतिरिक्त बोझ परियोजना पर पड़ा तो बुलेट ट्रेन प्रोजेक्ट आगे नहीं बढ़ पाएगा। मैं बहुत गंभीर बात कह रहा हूं।
