अयोध्या कैंट बोर्ड में भर्ती के नाम पर रिश्वतखोरी का खुलासा, CBI ने सहायक सैनिटरी इंस्पेक्टर को रंगे हाथों किया गिरफ्तार

Published on 1 अग॰ 2026

सीबीआई ने ट्रैप ऑपरेशन के दौरान आरोपी को 60 हजार रुपये की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों पकड़ लिया. इस मामले में 30 जुलाई 2026 को शिकायत के आधार पर एफआईआर दर्ज की गई थी

सीबीआई ने ट्रैप ऑपरेशन के दौरान आरोपी को 60 हजार रुपये की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों पकड़ लिया. इस मामले में 30 जुलाई 2026 को शिकायत के आधार पर एफआईआर दर्ज की गई थी

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केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) ने उत्तर प्रदेश के अयोध्या स्थित कैंटोनमेंट बोर्ड (Cantt. Board) में कथित रिश्वतखोरी के एक मामले में बड़ी कार्रवाई करते हुए सहायक सैनिटरी इंस्पेक्टर जितेंद्र सिंह को गिरफ्तार किया है. आरोपी पर हाउसकीपिंग कर्मचारियों की संविदा (कॉन्ट्रैक्ट) पर भर्ती कराने के बदले रिश्वत मांगने का आरोप है. सीबीआई ने ट्रैप ऑपरेशन के दौरान आरोपी को 60 हजार रुपये की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों पकड़ लिया.

20,000 रुपये रिश्वत की मांग की

सीबीआई के अनुसार, इस मामले में 30 जुलाई 2026 को शिकायत के आधार पर एफआईआर दर्ज की गई थी. शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया कि उसने 28 जुलाई 2026  को अपने परिचित कुछ लोगों को कैंटोनमेंट बोर्ड में हाउसकीपिंग कार्य के लिए संविदा पर नियुक्त कराने का अनुरोध किया था. इस पर आरोपी सहायक सैनिटरी इंस्पेक्टर ने प्रत्येक कर्मचारी की भर्ती के बदले 20,000 रुपये रिश्वत की मांग की.

कर्मचारी को नौकरी पर नहीं रखा जाएगा

आरोप है कि आरोपी ने शिकायतकर्ता को निर्देश दिया कि वह कम से कम 20 श्रमिकों के दस्तावेज 30 जुलाई 2026 की शाम तक जमा कराए. साथ ही यह भी धमकी दी कि यदि रिश्वत नहीं दी गई तो किसी भी कर्मचारी को नौकरी पर नहीं रखा जाएगा.

आरोपी ने रिश्वत की रकम स्वीकार की

शिकायत मिलने के बाद सीबीआई ने मामले का सत्यापन कर 30 जुलाई को जाल (Trap) बिछाया. बातचीत के बाद रिश्वत की राशि 20,000 रुपये प्रति कर्मचारी से घटाकर 12,000 रुपये प्रति कर्मचारी तय हुई. इसके बाद शिकायतकर्ता ने पांच कर्मचारियों की भर्ती के लिए कुल 60,000 रुपये आरोपी को दिए. जैसे ही आरोपी ने रिश्वत की रकम स्वीकार की, पहले से मौजूद सीबीआई टीम ने उसे मौके पर ही गिरफ्तार कर लिया.

गिरफ्तारी के बाद आरोपी को 31 जुलाई 2026 को लखनऊ की सक्षम अदालत में पेश किया गया. अदालत ने आरोपी को 13 अगस्त 2026 तक न्यायिक हिरासत में भेज दिया है. मामले की आगे की जांच सीबीआई द्वारा जारी है. जांच एजेंसी यह भी पता लगा रही है कि क्या भर्ती प्रक्रिया में अन्य अधिकारी या कर्मचारी भी इस कथित भ्रष्टाचार में शामिल थे.