लोन के लिए बढ़ा-चढ़ाकर बताई नेटवर्थ, CBI ने सुभाष चंद्रा समेत 8 के खिलाफ दर्ज किया केस

Published on 5 सित॰ 2026

September 5, 2026

लोन के लिए बढ़ा-चढ़ाकर बताई नेटवर्थ, CBI ने सुभाष चंद्रा समेत 8 के खिलाफ दर्ज किया केस

नई दिल्ली। केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने कारोबारी सुभाष चंद्रा और सात अन्य लोगों के खिलाफ कथित लोन फ्रॉड का मामला दर्ज किया है। आरोप है कि लोन हासिल करने के लिए सुभाष चंद्रा की नेटवर्थ को बढ़ा-चढ़ाकर दिखाने वाले सर्टिफिकेट का इस्तेमाल किया गया। इससे LIC Housing Finance को कथित तौर पर 1,322 करोड़ रुपये से ज्यादा का नुकसान हुआ।

CBI ने यह मामला 31 अगस्त 2026 को दर्ज किया। FIR एलआईसी हाउसिंग फाइनेंस की जनरल मैनेजर नीता मेन्घानी की शिकायत के आधार पर दर्ज की गई है। शिकायत मुंबई के कफ परेड स्थित कंपनी के कॉर्पोरेट ऑफिस से की गई थी। CBI की बैंकिंग सिक्योरिटी एंड फ्रॉड ब्रांच ने इस मामले में FIR नंबर RC0742026E0007 दर्ज किया है। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि कथित धोखाधड़ी साल 2018 से मुंबई और अन्य जगहों पर हुई।

किन लोगों के खिलाफ केस?

सुभाष चंद्रा के अलावा FIR में वसंत सागर प्रॉपर्टीज के निदेशक पंकज सुरोलिया, डिजिटल सब्सक्राइबर मैनेजमेंट एंड कंसल्टेंसी सर्विसेज के निदेशक अमीश पंड्या और स्पिरिट इंफ्रापावर एंड मल्टीवेंचर्स के निदेशक राजीव ढोलकिया समेत संबंधित कंपनियों को आरोपी बनाया गया है। मामला दो लोन अकाउंट से जुड़ा है, जो सुभाष चंद्रा की पर्सनल गारंटी पर लिए गए थे।

980 करोड़ रुपये के दो लोन का मामला

LIC Housing Finance की शिकायत के मुताबिक, एक लोन अकाउंट के तहत वसंत सागर प्रॉपर्टीज और पैन इंडिया इंफ्राप्रोजेक्ट्स को 500 करोड़ रुपये की लोन सुविधा दी गई थी। दूसरे लोन अकाउंट के तहत डिजिटल सब्सक्राइबर मैनेजमेंट एंड कंसल्टेंसी सर्विसेज और स्पिरिट इंफ्रापावर एंड मल्टीवेंचर्स को 480 करोड़ रुपये का लोन दिया गया था। कंपनी का आरोप है कि दोनों लोन सुविधाओं को मंजूरी देने में सुभाष चंद्रा की बताई गई नेटवर्थ महत्वपूर्ण आधार थी।

नेटवर्थ को लेकर क्या आरोप है?

‘वसंत सागर लोन सुविधा’ के लिए 28 मार्च 2018 को जारी एक नेटवर्थ सर्टिफिकेट जमा किया गया था। इसमें दावा किया गया था कि 31 मार्च 2017 तक सुभाष चंद्रा की नेटवर्थ 59,113.21 करोड़ रुपये थी। इसी तरह, ‘डिजिटल लोन सुविधा’ के लिए 6 जुलाई 2018 को जारी एक अन्य नेटवर्थ सर्टिफिकेट जमा किया गया। इसमें उनकी नेटवर्थ 40,562 करोड़ रुपये बताई गई थी। CBI के मुताबिक, शिकायत में आरोप लगाया गया है कि इन जानकारियों का इस्तेमाल लोन हासिल करने के लिए किया गया और इससे LIC Housing Finance को आर्थिक नुकसान हुआ।

CBI ने किन धाराओं में केस दर्ज किया?

CBI की FIR में आपराधिक साजिश, धोखाधड़ी, आपराधिक विश्वासघात और भ्रष्टाचार से जुड़े प्रावधानों के तहत मामला दर्ज किया गया है। CBI के पुलिस अधीक्षक रोशन लाल यादव ने शिकायत की शुरुआती जांच के आधार पर कहा कि मामले में प्रथम दृष्टया IPC और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की संबंधित धाराओं के तहत अपराध बनता है। इसके बाद CBI ने नियमित मामला दर्ज कर जांच शुरू की। गौरतलब है कि FIR में लगाए गए आरोप अभी जांच के अधीन हैं। आरोप साबित होना बाकी है और संबंधित पक्षों का दोष अदालत के अंतिम फैसले के बाद ही तय होगा।