CSIR-केंद्रीय औषधीय एवं सगंध पौधा संस्थान (CIMAP) में मंगलवार को 48वां वार्षिक दिवस मनाया गया। कार्यक्रम में वैज्ञानिक शोध को किसानों, गांवों, उद्योगों और समाज तक पहुंचाने पर जोर दिया। मुख्य अतिथि पद्मश्री प्रो.अनिल कुमार गुप्ता ने कहा कि जहां भी कोई
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उन्होंने कहा कि किसानों, वैज्ञानिकों, उद्यमियों और स्थानीय समुदायों को जोड़कर नेटवर्क और क्लस्टर विकसित करने की जरूरत है। पारंपरिक ज्ञान से विकसित उत्पादों में किसानों, स्थानीय समुदायों और पारंपरिक ज्ञान के मूल धारकों को भी उचित पहचान मिलनी चाहिए। कार्यक्रम की शुरुआत दीप प्रज्वलन से हुई।
तकनीक पर दिया जोर
CIMAP के निदेशक डॉ.प्रबोध कुमार त्रिवेदी ने संस्थान की पिछले एक साल की उपलब्धियों की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि सीमैप ने प्रयोगशाला में विकसित तकनीकों को देशभर के किसानों, खासकर दूरदराज और जनजातीय क्षेत्रों तक पहुंचाने के लिए क्षेत्र स्तर की तकनीकों में बदलने पर काम किया है।
एरोमा मिशन को मिला राष्ट्रीय विज्ञान पुरस्कार
डॉ.प्रबोध कुमार त्रिवेदी ने बताया कि सीएसआईआर एरोमा मिशन के तहत देशभर में उन्नत किस्मों और तकनीकों को किसानों, उद्योगों और उद्यमियों तक पहुंचाया गया। मिशन को राष्ट्रीय विज्ञान पुरस्कार-2025 (कृषि) से सम्मानित किया गया है। वहीं, सतत कृषि और किसान केंद्रित तकनीकों में योगदान के लिए सीएसआईआर-सीमैप को FICCI सस्टेनेबल एग्रीकल्चर अवार्ड-2025 मिला।
फाइटो-फार्मास्युटिकल मिशन के तहत संस्थान ने 14 औषधीय और सगंध पौधों की छह नई किस्में जारी की। वर्ष 2025-26 में 16 हर्बल फॉर्मुलेशन तकनीकों का हस्तांतरण किया गया। इस दौरान छह पेटेंट दाखिल करने के साथ 23 संस्थागत और औद्योगिक समझौते भी किए गए।
हल्दी को वैश्विक बाजार तक पहुंचाने की तैयारी
विशेष अतिथि महाराष्ट्र सरकार के राज्यमंत्री (कैबिनेट रैंक) हेमंत पाटिल ने कहा कि हल्दी के क्षेत्र में CIMAP की साझेदारी महाराष्ट्र की जीआई टैग प्राप्त वासमत हल्दी को खेतों से वैश्विक बाजार तक पहुंचाने में मदद करेगी। विज्ञान आधारित मूल्य संवर्धन से किसानों की आय मजबूत करने में भी मदद मिलेगी।
चार संस्थानों से समझौते
वार्षिक दिवस पर बालासाहेब ठाकरे हरिद्रा (हल्दी) अनुसंधान एवं प्रशिक्षण केंद्र के साथ समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर हुए। इसके तहत वासमत हल्दी के लिए संयुक्त शोध, जर्मप्लाज्म संरक्षण, फाइटोकेमिकल प्रोफाइलिंग, मूल्य संवर्धन और किसान प्रशिक्षण किया जाएगा।
इसके अलावा डीयूवीएएसयू, मथुरा के साथ औषधीय एवं सगंध पौधों के पशु चिकित्सा और कुक्कुट प्रबंधन से जुड़े क्षेत्रों में शोध के लिए समझौता हुआ। गुजरात ग्रासरूट्स इनोवेशन ऑगमेंटेशन नेटवर्क (GIAN), अहमदाबाद के साथ हिमालयी और जनजातीय पारंपरिक ज्ञान के प्रमाणीकरण, सामुदायिक सूक्ष्म उद्यम, उत्पाद विकास और ई-कॉमर्स को बढ़ावा देने के लिए समझौता किया गया।
वहीं, किसानों और कृषि समुदायों के लिए कार्बन क्रेडिट और ग्रीन क्रेडिट कार्यक्रम लागू करने के लिए कम्प्लायंस कार्ट प्राइवेट लिमिटेड, नोएडा के साथ सहयोग समझौता हुआ।