Ranchi : गढ़वा अंचल के पूर्व सीओ सफी आलम के खिलाफ जमीन हेराफेरी और अवैध खरीद-बिक्री से जुड़े आरोपों की जांच भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एसीबी) ने शुरू कर दी है. मामले में शिकायतकर्ता एवं सेंटर फॉर आरटीआई के अध्यक्ष पंकज कुमार यादव गवाही के लिए एसीबी के समक्ष उपस्थित हुए हैं. गवाही की प्रक्रिया शुरू हो गई है.
एक वर्ष पूर्व की गई थी शिकायत
जानकारी के अनुसार, सेंटर फॉर आरटीआई के अध्यक्ष पंकज कुमार यादव ने करीब एक वर्ष पूर्व एसीबी को पत्र लिखकर गढ़वा अंचल में बड़े पैमाने पर जमीन की कथित अवैध खरीद-बिक्री और हेराफेरी की शिकायत की थी.
शिकायत में तत्कालीन सीओ सफी आलम और अंचलकर्मियों पर जमीन माफियाओं के साथ मिलीभगत कर जमीन के नेचर में बदलाव, अवैध हस्तांतरण और करोड़ों रुपये की कथित उगाही के आरोप लगाए गए थे.
शिकायतकर्ता ने आरोपों से संबंधित दस्तावेज भी एसीबी को उपलब्ध कराए थे. अब करीब एक साल बाद एसीबी ने मामले में शिकायतकर्ता की गवाही की प्रक्रिया शुरू की है, जिसके बाद मामले की जांच आगे बढ़ने की उम्मीद बढ़ी है.
कई खाता और प्लॉट में अनियमितता का आरोप
शिकायत में गढ़वा अंचल के विभिन्न मौजा की जमीनों का उल्लेख किया गया है. इनमें सोनपुरवा, नारायणपुर एवं प्रतापपुर की जमीनें शामिल हैं. शिकायतकर्ता के अनुसार, सोनपुरवा के खाता संख्या 50, प्लॉट संख्या 321 व खाता संख्या 164, प्लॉट संख्या 402 और नारायणपुर के खाता संख्या 67, प्लॉट संख्या 254 में जमीन के नेचर से छेड़छाड़ एवं अनियमितता के प्रमाण एसीबी को सौंपे गए हैं. इसी प्रकार प्रतापपुर के खाता संख्या 65, 60, 102, 75, 44 एवं 77 के अंतर्गत प्लॉट संख्या 1200, 1199, 1198, 1214 एवं 1212 समेत अन्य जमीनों में कथित हेराफेरी और अवैध खरीद-बिक्री के आरोप लगाए गए हैं.
गवाही के बाद कार्रवाई पर नजर
एसीबी द्वारा शिकायतकर्ता को गवाही के लिए बुलाए जाने के बाद अब इस मामले में आगे की कार्रवाई पर नजर है. शिकायतकर्ता की गवाही और उपलब्ध दस्तावेजों के आधार पर जांच किस दिशा में आगे बढ़ती है, यह आने वाले समय में स्पष्ट होगा.
हाईकोर्ट के निर्देश के बाद बढ़ी उम्मीद
उल्लेखनीय है कि झारखंड हाईकोर्ट ने लंबित एसीबी मामलों में त्वरित कार्रवाई को लेकर राज्य सरकार को निर्देश दिए हैं. इसके बाद लंबे समय से लंबित मामलों में कार्रवाई की उम्मीद बढ़ी है. इस मामले में पंकज कुमार यादव इंटरवीनर भी हैं.
पंकज कुमार ने मांग की है कि एसीबी में लंबित उनके सभी मामलों पर तत्काल कार्रवाई की जाए. अब देखना यह है कि शिकायतकर्ता की गवाही के बाद एसीबी इस मामले में क्या कदम उठाती है.
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