Devshayani Ekadashi 2026: 25 जुलाई को देवशयनी एकादशी, करें ये 5 विष्णु मंत्रों का जाप, मिलेगा विशेष आशीर्वाद - Haribhoomi

Published on 23 जुल॰ 2026

देवशयनी एकादशी 25 जुलाई 2026 को मनाई जाएगी। इसी दिन से चातुर्मास की शुरुआत होगी। धार्मिक मान्यता है कि इस दिन भगवान विष्णु की पूजा और मंत्र जाप करने से सुख, समृद्धि और आध्यात्मिक लाभ प्राप्त होते हैं।

Devshayani Ekadashi 2026

Devshayani Ekadashi 2026

  • Published: 23 Jul 2026, 10:13 AM IST
  • Last Updated: 23 Jul 2026, 10:13 AM IST

सनातन धर्म में देवशयनी एकादशी का विशेष महत्व माना जाता है। आषाढ़ शुक्ल पक्ष की एकादशी पर मनाया जाने वाला यह पर्व भगवान विष्णु के योगनिद्रा में जाने का प्रतीक माना जाता है। इसी दिन से चातुर्मास का आरंभ होता है, जिसके दौरान कई शुभ और मांगलिक कार्यों पर विराम लग जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन श्रद्धा भाव से व्रत, पूजा और मंत्र जाप करने से भगवान विष्णु की विशेष कृपा प्राप्त होती है।

इस वर्ष देवशयनी एकादशी का व्रत 25 जुलाई 2026 को रखा जाएगा। पंचांग के अनुसार यह दिन भगवान विष्णु के शयनकाल की शुरुआत का प्रतीक माना जाता है। मान्यता है कि इस दिन भगवान विष्णु योगनिद्रा में चले जाते हैं और चार महीने बाद देवउठनी एकादशी पर जागते हैं।

देवशयनी एकादशी का धार्मिक महत्व
हिंदू मान्यताओं के अनुसार देवशयनी एकादशी से चातुर्मास प्रारंभ होता है। यह चार महीने का विशेष धार्मिक काल माना जाता है, जिसमें विवाह, गृह प्रवेश और अन्य मांगलिक कार्य सामान्यतः नहीं किए जाते। हालांकि पूजा-पाठ, जप, तप और धार्मिक साधना के लिए यह समय अत्यंत शुभ माना जाता है।

पूजा के समय करें इन 5 विष्णु मंत्रों का जाप
देवशयनी एकादशी पर भगवान विष्णु की पूजा के दौरान इन मंत्रों का जाप विशेष फलदायी माना जाता है—
ॐ नमो नारायणाय॥
ॐ नमो भगवते वासुदेवाय॥
ॐ श्री विष्णवे च विद्महे वासुदेवाय धीमहि। तन्नो विष्णुः प्रचोदयात्॥
शान्ताकारं भुजगशयनं पद्मनाभं सुरेशम्...
मङ्गलं भगवान विष्णुः, मङ्गलं गरुड़ध्वजः...
धार्मिक मान्यता है कि इन मंत्रों का श्रद्धापूर्वक जाप करने से मन को शांति मिलती है और भगवान विष्णु का आशीर्वाद प्राप्त होता है।

देवशयनी एकादशी पारण मुहूर्त
व्रत का पारण 26 जुलाई को किया जाएगा। पारण का शुभ समय सुबह 6:13 बजे से सुबह 8:50 बजे तक रहेगा। द्वादशी तिथि दोपहर 1:57 बजे तक रहेगी।

क्या है चातुर्मास?
देवशयनी एकादशी से शुरू होकर देवउठनी एकादशी तक का समय चातुर्मास कहलाता है। इसमें श्रावण, भाद्रपद, आश्विन और कार्तिक मास शामिल होते हैं। धार्मिक दृष्टि से यह काल आत्मचिंतन, साधना और भक्ति के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है।

क्यों खास है यह दिन?
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार देवशयनी एकादशी पर विधिपूर्वक व्रत और पूजा करने से जीवन में सुख-शांति, समृद्धि और आध्यात्मिक उन्नति का मार्ग प्रशस्त होता है। कई श्रद्धालु इस दिन भगवान विष्णु की आराधना कर परिवार की खुशहाली और कल्याण की कामना करते हैं।