मोबाइल से लेकर टीवी, फ्रिज और फर्नीचर तक, आज लगभग हर बड़ी खरीदारी के साथ EMI का विकल्प मिल रहा है. आसान किस्तों ने महंगी चीजें खरीदना जरूर आसान कर दिया है, लेकिन इससे युवाओं में खर्च और कर्ज लेने की आदत भी बढ़ रही है.
महंगी चीजें खरीदना हुआ आसान
12 तारीख की शाम 5:30 बजे से iPhone 18 Pro, Pro Max और iPhone Duo की बुकिंग शुरू होने वाली है. इनकी शुरुआती कीमत क्रमशः 1.65 लाख, 1.80 लाख और 3 लाख रुपये है. सिद्धार्थ के पास पहले से अच्छा फोन है, फिर भी वह iPhone Duo को EMI पर खरीदने की तैयारी कर रहा है.
दरअसल, अब किसी सामान को खरीदने के लिए पूरी रकम जमा होने का इंतजार नहीं करना पड़ता. हर महीने छोटी रकम देकर महंगा सामान घर लाया जा सकता है. यही सुविधा युवाओं को आकर्षित कर रही है.
35 साल से कम उम्र के युवाओं में बढ़ा कर्ज
ट्रांसयूनियन सिबिल की मार्च 2026 की रिपोर्ट के मुताबिक, दिसंबर 2025 की तिमाही में 35 साल से कम उम्र के नए कर्ज लेने वालों की संख्या एक साल पहले की तुलना में 17% बढ़ी. पहली बार कर्ज लेने वालों में इस उम्र वर्ग की हिस्सेदारी 58% रही.
इसी अवधि में टीवी, फ्रिज और दूसरे कंज्यूमर ड्यूरेबल्स खरीदने के लिए लिए गए लोन में 22% की बढ़ोतरी हुई. वहीं, RBI के आंकड़ों के अनुसार मार्च 2025 में बैंकों का पर्सनल लोन क्रेडिट सालाना आधार पर 14% बढ़ा था.
छोटी-छोटी EMI मिलकर बन सकती है बड़ा बोझ
एक फोन की EMI 3-4 हजार रुपये है तो यह रकम छोटी लग सकती है. लेकिन इसके बाद लैपटॉप, टीवी, बाइक या दूसरे सामान की EMI शुरू हो जाए तो महीने का कुल बोझ काफी बढ़ सकता है.
सीनियर इकॉनमिस्ट आकाश जिंदल के मुताबिक, युवाओं को अपनी आय का अधिकतम 30% हिस्सा ही EMI में रखना चाहिए. बाकी आय को घरेलू खर्च, बचत और अचानक आने वाले खर्चों के लिए रखना जरूरी है.
EMI लेने से पहले इन बातों का रखें ध्यान
EMI से खर्च कम नहीं होता, बल्कि बड़ी रकम छोटी किस्तों में बंट जाती है. इसलिए खरीदारी से पहले यह देखना जरूरी है कि कुल कितनी रकम चुकानी होगी, EMI कितने समय तक चलेगी और ब्याज व अन्य चार्ज कितने हैं.
EMI सुविधा जरूरत के समय मददगार हो सकती है, लेकिन सिर्फ इसलिए खरीदारी करना कि सामान आसान किस्तों पर मिल रहा है, आगे चलकर आर्थिक बोझ बन सकता है. युवाओं के लिए बेहतर यही है कि इच्छाएं पूरी करने के साथ बचत और EMI के बीच संतुलन बनाए रखें.

प्रमिला दीक्षित
दो दशक से पत्रकारिता में सक्रिय... कश्मीर से केदारनाथ और काशी तक, अपराध से आतंकवाद तक, दंगों की क्रूरता से दरियादिली की कहानी तक, राजनीति से साहित्य की रवानी तक, तथ्य, तर्क और संवेदना के साथ हर विषय पर रिपोर्टिंग करती रही हैं. वीडियो, रेडियो, ब्लॉग- लेख, कविता और मॉडरेशन उनकी अभिव्यक्ति के माध्यम है.
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