Explainer: 26 रनों का वो भूत जिससे आज भी डरता है टेस्ट क्रिकेट! क्या कभी नहीं टूटेगा 71 साल पुराना 'कलंक'?

Published on 7 सित॰ 2026

Test Records: टेस्ट क्रिकेट के इतिहास में कई ऐसे रिकॉर्ड हैं जो किसी भी खिलाड़ी या टीम के लिए गर्व की बात हैं. चाहे टेस्ट क्रिकेट में सर डॉन ब्रैडमैन का 99.94 का बल्लेबाजी औसत हो या मुथैया मुरलीधरन के 800 टेस्ट विकेट, ये ऐसे मील के पत्थर हैं जिन्हें छूना आज के दौर में नामुमकिन सा लगता है. लेकिन क्रिकेट के इस शानदार इतिहास के ठीक उलट, एक ऐसा रिकॉर्ड भी दर्ज है जिसे दुनिया की कोई भी टीम कभी भी अपने नाम नहीं करना चाहेगी. यह रिकॉर्ड टेस्ट क्रिकेट इतिहास के सबसे कम टीम स्कोर का है जो न्यूजीलैंड के नाम दर्ज है. आज की आधुनिक बल्लेबाजी का मिजाज बदल चुका है. T20 और वनडे के आने से बल्लेबाज अब हर गेंद पर शॉट खेलने का प्रयास करते हैं, जिससे टेस्ट क्रिकेट में उनका डिफेंस कमजोर हुआ है. दूसरी ओर, गेंदबाजों की आक्रामक तकनीक और स्विंग कराती तेज गेंदें आज भी बल्लेबाजों को घुटने टेकने पर मजबूर कर देती हैं, लेकिन फिर भी यह सवाल उठता है कि क्या न्यूजीलैंड का बनाया हुआ 26 रनों का यह न्यूनतम स्कोर उतना ही सुरक्षित है जितना दिखता है? तो लिए आइए इस ऑर्टिकल में जानते हैं कि किन परिस्तिथियों में यह रिकॉर्ड टूट सकता है.

26 रन का वह ऐतिहासिक साया  

साल 1955 में ऑकलैंड के मैदान पर एक कलंक लिखा गया था. इंग्लैंड के खिलाफ न्यूजीलैंड की टीम सिर्फ 26 रनों पर ऑल आउट हो गई थी. पिछले 7 दशकों से यह रिकॉर्ड एक ऐसी चट्टान की तरह खड़ा रहा है, जिसे कोई छू नहीं सका. क्रिकेट जगत में लंबे समय तक यह माना जाता रहा कि आधुनिक युग में, जहां पिचें बेहतर हैं और बल्लेबाजों के पास तकनीक और सुरक्षा उपकरण हैं, यह रिकॉर्ड पूरी तरह सुरक्षित है. हालांकि पिछले कुछ सालों में घटी कुछ अविश्वसनीय घटनाओं, आधुनिक बल्लेबाजी के बदलते मिजाज और गेंदबाजों की आक्रामक तकनीक ने इस धारणा को हिलाकर रख दिया है. आज यह सवाल उठना लाजिमी है कि क्या 26 रन का यह सबसे कम स्कोर का रिकॉर्ड सचमुच उतना ही सुरक्षित है जितना दिखता है, या आने वाले सालों में आधुनिक बल्लेबाजी की जल्दबाजी और गेंदबाजों का कहर इसे इतिहास के पन्नों से मिटा देगा? यह तो वक्त ही बताएगा, लेकिन इतना तय है कि क्रिकेट अनिश्चितताओं का खेल है और यहां कभी भी कुछ भी हो सकता है. 

कैसे टूटेगा टेस्ट क्रिकेट का सबसे छोटा टीम टोबल का रिकॉर्ड?

यह सोचना कि 1955 में न्यूजीलैंड द्वारा बनाया गया 26 रनों का न्यूनतम स्कोर हमेशा के लिए सुरक्षित है, एक बहुत बड़ी भूल होगी. क्रिकेट के बदलते फॉर्मेट, पिचों का मिजाज और बल्लेबाजों की तकनीक में आ रहे बदलाव इस बात का स्पष्ट संकेत हैं कि यह रिकॉर्ड बेहद संवेदनशील मोड़ पर है. अगर आने वाले समय में किसी टेस्ट मैच के पहले सेशन में घने बादल छाए रहे, पिच से गेंदबाजों को तीखी मदद मिली, बल्लेबाजों ने गैर-जिम्मेदाराना शॉट खेले और डीआरएस के फैसले गेंदबाजों के पक्ष में गए, तो वह दिन दूर नहीं जब क्रिकेट जगत एक नया न्यूनतम स्कोर देखेगा. 26 का यह आंकड़ा सुरक्षित दिखने वाला एक भ्रम मात्र है. कहते हैं कि रिकॉर्ड बनते ही हैं टूटने के लिए. हाल के सालों में न्यूजीलैंड के इस 26 रनों के स्कोर तक कुछ टीमें पहुंची भी हैं. 

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हाल की सालों में जब बिखर गई टीमें

टेस्ट क्रिकेट के पिछले कुछ सालों के आंकड़ों पर नजर डालें, तो साफ दिखाई देता है कि टीमें इस 26 रन के अनचाहे रिकॉर्ड के बेहद करीब पहुंचती रही हैं. कुछ दशक पहले तक जो असंभव लगता था, वह अब हकीकत के करीब दिखने लगा है. T20 के इस आक्रामक युग में सुरक्षात्मक तकनीक के अभाव के कारण बल्लेबाज स्विंग और सीम के सामने लगातार घुटने टेक रहे हैं, जिससे यह शर्मनाक रिकॉर्ड टूटने का खतरा हर पल बना रहता है.

किंग्स्टन में वेस्टइंडीज का बाल-बाल बचना - इतिहास के पन्नों को पलटें तो एक समय ऐसा आया था जब पिछले साल 2025 में किंग्स्टन में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ वेस्टइंडीज की टीम ने सिर्फ 26 रन पर 9 विकेट गंवा दिया था. वे न्यूजीलैंड के इस शर्मनाक रिकॉर्ड की बराबरी करने की कगार पर खड़े थे, लेकिन आखिरी जोड़ी ने किसी तरह टीम को इस अनचाहे कलंक से बचा लिया था.

एडिलेड 2020 में जब 36 रनों पर सिमटा भारत - आधुनिक दौर की सबसे मजबूत बल्लेबाजी लाइनों में से एक मानी जाने वाली भारतीय टीम दिसंबर 2020 में एडिलेड ओवल के मैदान पर ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ दूसरी पारी में सिर्फ 36 रनों पर सिमट गई थी. विराट कोहली, चेतेश्वर पुजारा और अजिंक्य रहाणे जैसे दिग्गजों से सजी यह टीम न्यूजीलैंड के रिकॉर्ड से महज 10 रन दूर रह गई थी. इस पारी में भारत का कोई भी बल्लेबाज दहाई का आंकड़ा भी नहीं छू सका था.

19 Dec 2020: India all out for 36
19 Jan 2021: India breach The Gabba fortress#AUSvINDpic.twitter.com/P0sh5zsmtJ

— ICC (@ICC) January 19, 2021

आयरलैंड का 38 रन पर ऑल आउट होना - भारत की इस शर्मनाक प्रदर्शन से पहले साल 2019 में लॉर्ड्स के ऐतिहासिक मैदान पर इंग्लैंड के खिलाफ आयरलैंड की टीम सिर्फ 38 रनों पर ऑल आउट हो गई थी. 

नई सदी के अनचाहे आंकड़े: 21वीं सदी की शुरुआत के बाद से टेस्ट क्रिकेट में 40 और 50 के बीच के स्कोर बनना कोई दुर्लभ बात नहीं रह गई है. इस दौरान कम से कम 7 ऐसे मौके आए हैं, जब टीमें 50 रन का आंकड़ा भी नहीं छू सकीं. उदाहरण के लिए, दक्षिण अफ्रीका ने 2024 में डरबन में श्रीलंका को महज 42 रन पर ढेर कर दिया था. वहीं इससे पहले जिम्बाब्वे की टीम भी साउथ अफ्रीका के खिलाफ महज 54 रनों पर सिमट गई थी. ये आंकड़े साबित करते हैं कि आधुनिक क्रिकेट में भी किसी एक खराब दिन पूरी की पूरी बल्लेबाजी ताश के पत्तों की तरह बिखर सकती है. 

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