Explainer: मध्य पूर्व में बढ़ते सैन्य तनाव का असर अब केवल युद्ध क्षेत्र तक सीमित नहीं रह गया है. इसका सीधा असर कई देशों की अर्थव्यवस्था पर पड़ रहा है. दुनिया के दो सबसे महत्वपूर्ण समुद्री व्यापार मार्ग होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) और बाब-अल-मंदेब (Bab al-Mandeb) गंभीर जोखिम के दायरे में आ गए हैं. जंग के दूसरे दौर ने इन दोनों मार्गों से गुजरने वाले जहाजों पर हमलों और सुरक्षा खतरों के चलते एक बड़ी समस्या खड़ी कर दी है.
जहाजों के नुकसान के साथ-साथ अब समुद्री बीमा (Shipping Insurance) की लागत तेजी से बढ़ रही है. इस लागत ने भी देशों की अर्थव्यवस्था की कमर तोड़ने का खतरा बढ़ा दिया है.
इसका असर केवल शिपिंग कंपनियों तक सीमित नहीं रहेगा. कच्चे तेल, गैस, खाद्य पदार्थों और अन्य जरूरी सामानों की कीमतों पर भी इसका प्रभाव पड़ सकता है. विशेषज्ञों के अनुसार, यदि स्थिति लंबे समय तक बनी रही तो वैश्विक सप्लाई चेन और ऊर्जा बाजार पर इसका व्यापक असर देखने को मिल सकता है. आइए जानते हैं कि आखिर ये दोनों जहाजी मार्ग दुनिया के लिए क्यों अहम हैं और इन पर मंडरा रहे खतरे का दुनिया समेत भारत पर क्या असर देखने को मिल सकता है.
क्या हैं होर्मुज और बाब-अल-मंदेब?
इन दोनों की महत्व और जरूरत को समझने से पहले ये जान लेना जरूरी है कि आखिर होर्मुज और बाब-अल-मंदेब हैं क्या? दरअसल दुनिया का बड़ा हिस्सा समुद्री व्यापार पर निर्भर है और इन दोनों जलमार्गों की रणनीतिक भूमिका बेहद अहम है. होर्मुज जलडमरूमध्य फारस की खाड़ी को ओमान की खाड़ी से जोड़ता है. दुनिया के तेल और एलएनजी (LNG) का बड़ा हिस्सा इसी रास्ते से अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक पहुंचता है.
वहीं बाब-अल-मंदेब लाल सागर (Red Sea) को अदन की खाड़ी से जोड़ता है. यह मार्ग स्वेज नहर तक पहुंचने का मुख्य रास्ता है और यूरोप-एशिया समुद्री व्यापार के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है.
शिपिंग इंश्योरेंस अचानक क्यों महंगा हो गया?
जब किसी समुद्री क्षेत्र में युद्ध, मिसाइल हमले, ड्रोन हमले या जहाजों पर कब्जे जैसी घटनाओं का खतरा बढ़ जाता है, तो बीमा कंपनियां उस क्षेत्र को 'War Risk Zone' घोषित कर देती हैं. इसके बाद जहाज मालिकों को सामान्य बीमा के अलावा अतिरिक्त War Risk Premium देना पड़ता है.
हाल के घटनाक्रमों के बाद कई मामलों में यह प्रीमियम कई गुना बढ़ गया है. कुछ रिपोर्टों में युद्ध जोखिम प्रीमियम में लगभग 1000 फीसदी तक बढ़ोतरी का उल्लेख किया गया है.
बीमा महंगा होने का असर कैसे पड़ता है?
जब किसी जहाज का बीमा महंगा होता है, तो शिपिंग कंपनी की कुल लागत बढ़ जाती है.
इसके बाद...
- माल ढुलाई (Freight) महंगी हो जाती है.
- आयात-निर्यात की लागत बढ़ती है.
- तेल और गैस की कीमतों पर दबाव आता है.
- उपभोक्ताओं तक सामान महंगे दामों पर पहुंचता है.
यानी आखिरकार अतिरिक्त लागत का बड़ा हिस्सा आम उपभोक्ता तक पहुंच सकता है. ऐसे में ये कहा जा सकता है कि अगर इन दोनों जहाजी मार्गों पर खतरा बढ़ता है तो इसका सीधा असर आम आदमी की जेब पर पड़ सकता है. भारत में तो पहले ही तेल और गैस की कीमतों में बढ़ोतरी हो चुकी है.
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क्यों बदल रहे हैं जहाजों के रास्ते?
सुरक्षा जोखिम बढ़ने के कारण कई शिपिंग कंपनियां जोखिम वाले समुद्री मार्गों से बचने की कोशिश कर रही हैं.
यदि जहाज होर्मुज या बाब-अल-मंदेब से नहीं गुजरते, तो उन्हें अफ्रीका के दक्षिणी सिरे केप ऑफ गुड होप के रास्ते लंबा चक्कर लगाना पड़ता है. इससे..
- यात्रा कई दिन या सप्ताह लंबी हो सकती है.
- ईंधन खर्च बढ़ता है.
- जहाजों की उपलब्धता कम होती है.
- वैश्विक सप्लाई चेन धीमी पड़ सकती है.
भारत पर क्या असर पड़ सकता है?
भारत दुनिया के सबसे बड़े कच्चे तेल आयातकों में शामिल है. पश्चिम एशिया से आने वाले तेल का बड़ा हिस्सा समुद्री मार्गों से आता है. यदि समुद्री बीमा और माल ढुलाई की लागत लगातार बढ़ती है, तो भारत पर कई तरह का असर पड़ सकता है...
- कच्चे तेल का आयात महंगा हो सकता है.
- पेट्रोल और डीजल की लागत पर दबाव बढ़ सकता है.
- रसोई गैस, उर्वरक और अन्य आयातित वस्तुओं की कीमतें प्रभावित हो सकती हैं.
- उद्योगों की उत्पादन लागत बढ़ सकती है.
हालांकि अंतिम असर इस बात पर निर्भर करेगा कि संकट कितने समय तक जारी रहता है और वैश्विक बाजार किस तरह प्रतिक्रिया देता है.
क्या केवल तेल ही प्रभावित होगा?
नहीं. इन समुद्री मार्गों से केवल तेल ही नहीं, बल्कि कंटेनर कार्गो, खाद्यान्न, रसायन, मशीनरी, ऑटोमोबाइल पार्ट्स और कई अन्य उत्पाद भी भेजे जाते हैं. यदि जहाजों की आवाजाही बाधित होती है, तो विभिन्न उद्योगों की आपूर्ति श्रृंखला भी प्रभावित हो सकती है.
विशेष रूप से Just-in-Time Manufacturing मॉडल पर काम करने वाली कंपनियों को सबसे अधिक चुनौती का सामना करना पड़ सकता है.
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बीमा कंपनियां जोखिम का आकलन कैसे करती हैं?
समुद्री बीमा कंपनियां कई पहलुओं का मूल्यांकन करती हैं...
- क्षेत्र में सैन्य गतिविधियां
- मिसाइल या ड्रोन हमलों की संभावना
- समुद्री डकैती या जहाज कब्जाने का खतरा
- अंतरराष्ट्रीय नौसैनिक सुरक्षा
- राजनीतिक स्थिरता
यदि खतरा बढ़ता है, तो बीमा प्रीमियम तुरंत बढ़ा दिया जाता है. कई मामलों में जहाजों को अतिरिक्त सुरक्षा शर्तों का पालन भी करना पड़ता है.
वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए क्यों है चिंता का विषय?
यदि होर्मुज और बाब-अल-मंदेब दोनों मार्ग लंबे समय तक बाधित रहते हैं, तो वैश्विक व्यापार पर दोहरा दबाव पड़ सकता है.
इसका असर हो सकता है...
- तेल की कीमतों में तेज उतार-चढ़ाव
- वैश्विक महंगाई में वृद्धि
- आपूर्ति श्रृंखला में देरी
- समुद्री परिवहन लागत में लगातार बढ़ोतरी
- आर्थिक विकास की रफ्तार पर दबाव
हाल के दिनों में मध्य पूर्व के तनाव के बीच अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतें भी मजबूत हुई हैं, जिससे ऊर्जा बाजार की चिंताएं और बढ़ गई हैं.
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