Radhakrishnan Committee: देश में बार-बार सामने आए पेपर लीक मामलों के बीच केंद्र सरकार ने परीक्षा प्रणाली में बड़े बदलाव की दिशा में नया कदम उठाया है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इंफोसिस के सह-संस्थापक नंदन नीलेकणि की अध्यक्षता में एक हाई पावर टास्क फोर्स बनाई है, जो परीक्षा व्यवस्था को अधिक पारदर्शी, सुरक्षित और तकनीक आधारित बनाने के सुझाव देगी.
लेकिन इससे पहले भी सरकार ने 2024 में पूर्व इसरो प्रमुख डॉ. के. राधाकृष्णन की अध्यक्षता में एक समिति बनाई थी. इस समिति ने कई ऐसी सिफारिशें दी थीं, जिनका मकसद पेपर लीक और परीक्षा में गड़बड़ियों पर लगाम लगाना था. अब सवाल उठ रहा है कि अगर उन सुझावों को समय रहते पूरी तरह लागू कर दिया जाता तो क्या हाल के विवादों से बचा जा सकता था?
Delhi: Congress MP Karti Chidambaram says, "A leak in the NEET examination papers happened in 2004, and the government constituted a committee under Dr Radhakrishnan. Nobody knows what happened to that report. Now, the government has formed another committee. I hope this is not a… pic.twitter.com/eczqmbH4OX
— IANS (@ians_india) July 27, 2026
राधाकृष्णन कमेटी क्या थी?
NEET समेत कई परीक्षाओं में गड़बड़ियों और NTA की कार्यप्रणाली पर उठे सवालों के बाद केंद्र सरकार ने 2024 में पूर्व ISRO प्रमुख डॉ. के. राधाकृष्णन की अध्यक्षता में एक उच्चस्तरीय समिति गठित की थी. बता दें समिति का काम NTA की परीक्षा प्रणाली की समीक्षा करना और उसे अधिक भरोसेमंद, पारदर्शी तथा सुरक्षित बनाने के लिए सुझाव देना था. समिति ने इस मसले पर रिसर्च कर व्यवस्था सुधार और पेपर लीक रोकने के लिए कई सिफारिशें दी थीं.
राधाकृष्णन कमेटी ने क्या-क्या सिफारिशें की थीं?
समिति ने कई अहम सुधार सुझाए थे, जिनमें प्रमुख हैं....
* प्रश्नपत्र की सुरक्षा के लिए एंड-टू-एंड डिजिटल एन्क्रिप्शन.
* परीक्षा केंद्र पर ही सुरक्षित तरीके से प्रश्नपत्र प्रिंट करने की व्यवस्था.
* संवेदनशील परीक्षाओं को चरणबद्ध तरीके से कंप्यूटर आधारित (CBT) बनाने पर जोर.
* NTA के भीतर तकनीकी और साइबर सुरक्षा तंत्र को मजबूत करना.
* परीक्षा केंद्रों की निगरानी और ऑडिट व्यवस्था को सख्त करना.
* प्रश्नपत्र की आवाजाही में मानवीय हस्तक्षेप कम करना.
* जवाबदेही तय करने के लिए स्पष्ट प्रशासनिक ढांचा तैयार करना.
क्या इन सिफारिशों से पेपर लीक पूरी तरह रुक जाता?
क्या राधाकृष्णन कमेटी की सिफारिशों से पेपर लीक पूरी तरह रुक जाता? एक्सपर्ट मानते हैं कि इसका सीधा जवाब तो नहीं है. हालांकि विशेषज्ञों का ये भी मानना है कि अगर डिजिटल एन्क्रिप्शन, सेंटर पर प्रिंटिंग और मजबूत तकनीकी सुरक्षा जैसे सुझाव लागू हो जाते, तो पेपर लीक का जोखिम काफी कम किया जा सकता था. लेकिन यह कहना कि इससे हर तरह का पेपर लीक पूरी तरह खत्म हो जाता, तथ्यात्मक रूप से सही नहीं होगा. किसी भी परीक्षा प्रणाली में सुरक्षा लगातार अपडेट करने की जरूरत होती है.
Delhi: The Supreme Court assured a hearing on a petition seeking the removal of the National Testing Agency (NTA) from conducting the NEET examination and the implementation of reforms, including conducting the exam in computer-based mode. The petition, filed by RJD Member of… pic.twitter.com/IJJs1RnWNB
— IANS (@ians_india) July 27, 2026
अब नंदन नीलेकणि की टास्क फोर्स क्यों बनाई गई है?
बता दें लगातार सामने आए पेपर लीक विवादों और परीक्षा प्रणाली पर उठे सवालों के बाद सरकार ने अब एक नई हाई पावर टास्क फोर्स बनाई है. इसकी कमान तकनीकी विशेषज्ञ नंदन नीलेकणि को दी गई है. इस टास्क फोर्स का उद्देश्य सिर्फ NTA में सुधार करना नहीं, बल्कि पूरी परीक्षा व्यवस्था को भविष्य के हिसाब से अधिक सुरक्षित, पारदर्शी और टेक्नोलॉजी आधारित बनाना है.
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नई टास्क फोर्स किन मुद्दों पर काम करेगी?
सरकार के मुताबिक ये नई टीम....
* परीक्षा प्रणाली में आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल बढ़ाएगी.
* पेपर लीक रोकने के उपाय सुझाएगी.
* NTA की कार्यप्रणाली में संरचनात्मक सुधारों की सिफारिश करेगी.
* परीक्षा केंद्रों और लॉजिस्टिक्स को अधिक सुरक्षित बनाने का रोडमैप तैयार करेगी.
* छात्रों का भरोसा लौटाने के लिए नई व्यवस्था का खाका पेश करेगी.
दोनों समितियों में सबसे बड़ा अंतर क्या है?
राधाकृष्णन कमेटी मुख्य रूप से NTA की तत्काल समीक्षा और सुधार के लिए बनाई गई थी. वहीं, नंदन नीलेकणि की टास्क फोर्स का दायरा व्यापक माना जा रहा है. इसमें तकनीकी समाधान, साइबर सुरक्षा, परीक्षा प्रबंधन और भविष्य की परीक्षा प्रणाली को नए सिरे से तैयार करने पर फोकस रहेगा.
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क्या पुरानी सिफारिशें अब भी प्रासंगिक हैं?
शिक्षा क्षेत्र से जुड़े जानकारों का मानना है कि राधाकृष्णन कमेटी के कई सुझाव आज भी प्रासंगिक हैं. नई टास्क फोर्स यदि उन सिफारिशों को आधुनिक तकनीक के साथ जोड़कर आगे बढ़ाती है तो परीक्षा प्रणाली पहले की तुलना में अधिक सुरक्षित और भरोसेमंद बन सकती है.
— amrita madhukalya (@visually_kei) July 26, 2026
आगे क्या होगा?
अब नजर नंदन नीलेकणि की टास्क फोर्स की रिपोर्ट पर रहेगी. यदि इसकी सिफारिशों को समयबद्ध तरीके से लागू किया जाता है, तो आने वाले वर्षों में NEET, JEE और अन्य बड़ी परीक्षाओं की प्रक्रिया में बड़े बदलाव देखने को मिल सकते हैं. सरकार का लक्ष्य ऐसी व्यवस्था तैयार करना है, जिसमें पारदर्शिता बढ़े और पेपर लीक जैसी घटनाओं की संभावना न्यूनतम हो.
राधाकृष्णन कमेटी कब बनी, क्यों बनी? और इसने अपनी अंतिम रिपोर्ट कब सौंपी थी?
केंद्र सरकार के शिक्षा मंत्रालय ने 22 जून 2024 को पूर्व इसरो प्रमुख डॉ. के. राधाकृष्णन की अध्यक्षता में हाई-लेवल कमेटी ऑफ एक्सपर्ट्स (HLCE) का गठन किया था. बता दें इसे बनाने का फैसला NEET-UG 2024 विवाद, पेपर लीक के आरोप और NTA की कार्यप्रणाली पर उठे गंभीर सवालों के बाद लिया गया था. कमेटी ने जांच के बाद 21 अक्टूबर 2024 को अपनी अंतिम रिर्पोट शिक्षा मंत्रालय को सौंप दी थी. रिपोर्ट में NTA को मजबूत करने, राष्ट्रीय प्रवेश परीक्षाओं में सुधार, राज्यों के साथ बेहतर समन्वय, सुरक्षित परीक्षा केंद्र, SOP, डेटा सुरक्षा और एक हाई-पावर्ड स्टीयरिंग कमेटी बनाने जैसी कई सिफारिशें की गईं. बाद में 14 नवंबर 2024 को इन सिफारिशों के क्रियान्वयन की निगरानी के लिए हाई-पावर्ड स्टीयरिंग कमेटी भी गठित की गई थी.अब सुप्रीम कोर्ट में राधाकृष्णन कमेटी की सिफारिशों को लागू किए जाने के सवाल पर सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा है कि सरकार राधाकृष्णन कमेटी की सिफारिशों से आगे बढ़कर काम कर रही है.
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