Grahan 2026: ग्रहण के दौरान देवी-देवताओं की मूर्ति छूने से क्यों करते हैं परहेज? जानिए वजह

Published on 4 अग॰ 2026

Grahan 2026: ग्रहण के दौरान देवी-देवताओं की मूर्ति छूने से क्यों करते हैं परहेज? जानिए वजह

ग्रहण 2026Image Credit source: PTI

Two Eclipses in Sawan 2026: सावन का पवित्र महीना भगवान शिव की आराधना के लिए बेहद खास माना जाता है. इस दौरान देशभर के शिव मंदिरों में भक्तों की भीड़ देखने को मिलती है. सावन में पूजा-पाठ और धार्मिक अनुष्ठानों के बीच ग्रहण को लेकर भी कई तरह की धार्मिक मान्यताएं और परंपराएं सामने आती हैं. ग्रहण के समय मंदिरों के कपाट बंद रखने और देवी-देवताओं की मूर्तियों को न छूने की परंपरा भी इन्हीं में से एक है. ग्रहण के दौरान अक्सर भक्तों के मन में यह सवाल आता है कि आखिर इस समय भगवान की मूर्ति को छूने से क्यों परहेज किया जाता है? और अगर अनजाने में या गलती से किसी ने ग्रहण के दौरान देवी-देवता की मूर्ति को छू लिया तो ऐसी स्थिति में क्या करना चाहिए.

ग्रहण के दौरान मूर्ति को क्यों नहीं छूते?

हिंदू धर्म की परंपराओं में ग्रहण के समय देवी-देवताओं की मूर्तियों को छूने से परहेज किया जाता है. धार्मिक मान्यता के अनुसार, माना गया है कि ग्रहण के दौरान नकारात्मक ऊर्जा का प्रभाव बढ़ जाता है. इसी वजह से मंदिरों में विशेष सावधानी बरती जाती है और भगवान की मूर्तियों को छूने के बजाय दूर से दर्शन और मानसिक रूप से भगवान को याद करने की परंपरा है.

क्या होता है सूतक काल?

हिंदू धार्मिक परंपरा में सूर्य ग्रहण और चंद्र ग्रहण से पहले एक तय अवधि को सूतक काल कहा जाता है. इसे धार्मिक दृष्टि से विशेष समय माना जाता है. कई परंपराओं में इस दौरान मंदिरों के कपाट बंद कर दिए जाते हैं और देवी-देवताओं की मूर्तियों को छूने से बचा जाता है. आमतौर पर सूर्य ग्रहण से लगभग 12 घंटे और चंद्र ग्रहण से लगभग 9 घंटे पहले सूतक लगने की मान्यता है. हालांकि, यह नियम हर स्थान पर एक समान रूप से लागू नहीं होता. क्योंकि अगर भारत में ग्रहण दिखाई नहीं देगा तो सूतक काल भी वहां नहीं लगेगा, वहां सामान्य रूप से पूजा-पाठ किया जा सकता है.

ग्रहण के दौरान मंदिरों में क्यों बंद रहते हैं कपाट?

ग्रहण के समय मंदिरों के कपाट बंद रखने की परंपरा भारत के कई मंदिरों में देखने को मिलती है. मान्यता है कि सूतक काल के दौरान मंदिरों में नियमित पूजा और धार्मिक गतिविधियां रोक दी जाती हैं. देवी-देवताओं की मूर्तियों को कपड़े से ढक दिया जाता है और मंदिर के गर्भगृह में प्रवेश भी सीमित कर दिया जाता है. कुछ मंदिरों में ग्रहण समाप्त होने के बाद विशेष शुद्धिकरण किया जाता है. इसके बाद भगवान की मूर्ति को स्नान कराया जाता है, मंदिर परिसर की सफाई की जाती है और दोबारा विधि-विधान से पूजा-अर्चना शुरू की जाती है.

अगर गलती से मूर्ति छू लें तो क्या करें?

मान्यता के अनुसार, ग्रहण के दौरान अगर किसी व्यक्ति से गलती से देवी-देवता की मूर्ति छू जाए तो धार्मिक मान्यताओं के अनुसार घबराने की जरूरत नहीं है. ऐसी स्थिति में ग्रहण समाप्त होने के बाद मंदिर की परंपरा के अनुसार शुद्धिकरण किया जा सकता है.

ग्रहण खत्म होने के बाद क्या करना चाहिए?

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, ग्रहण समाप्त होने के बाद स्नान करना शुभ माना जाता है. इसके बाद साफ कपड़े पहनकर पूजा-पाठ करने की परंपरा है. घर के मंदिर में भगवान की मूर्तियों पर गंगाजल या स्वच्छ जल का छिड़काव किया जा सकता है. कुछ लोग भगवान का अभिषेक भी करते हैं. मंदिरों में भी ग्रहण पूरा होने के बाद विशेष साफ-सफाई और शुद्धिकरण के बाद पूजा शुरू की जाती है. कई भक्त ग्रहण के बाद जरूरतमंदों को भोजन, वस्त्र या अनाज का दान भी करते हैं. धार्मिक मान्यता के अनुसार, इस समय किया गया दान-पुण्य बहुत शुभ माना जाता है.

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Disclaimer: इस खबर में दी गई जानकारी धार्मिक मान्यताओं और सामान्य जानकारियों पर आधारित है. टीवी9 भारतवर्ष इसकी पुष्टि नहीं करता है.

वरुण चौहान

वरुण चौहान

इलेक्‍ट्रानिक और डिजिटल मीडिया में करीब एक दशक से ज्यादा का अनुभव. 2008 में एशियन एकेडमी ऑफ फिल्म एंड टेलीविजन (AAFT) नोएडा से पत्रकारिता का कोर्स करने के बाद कुछ अलग और नया करने की सोच के साथ मीडिया में अपने सफर की शुरुआत की. शुरुआत से ही मेरी रुचि उन विषयों को आम लोगों तक पहुंचाने में रही है, जो भारतीय संस्कृति, धार्मिक परंपराओं से जुड़े हैं. अपने करियर के दौरान Channel One News, Sahara Samay, A2Z News, News Express, National Voice और पंजाब केसरी डिजिटल जैसे प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में काम करने का अवसर मिला. इन संस्थानों में काम करते हुए समाचार लेखन, फील्ड रिपोर्टिंग,और डिजिटल कंटेंट को सीखने का अनुभव मिला. फिलहाल देश के सबसे बड़े न्यूज नेटवर्क TV9 भारतवर्ष में धर्म और आस्था से जुड़ी खबरों, धार्मिक आयोजनों, ज्योतिष, वास्तु, पौराणिक कथाओं, मंदिरों की परंपराओं और व्रत-त्योहारों से जुड़े विषयों को सरल, सहज और तथ्यपूर्ण भाषा में पाठकों तक पहुंचाने की जिम्मेदारी निभा रहा हूं. महाकुंभ 2025 की कवरेज मेरे करियर के महत्वपूर्ण अनुभवों में शामिल है, जहां करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था, अखाड़ों की परंपराओं, संत समाज की गतिविधियों और कुंभ से जुड़े धार्मिक और सांस्कृतिक पहलुओं पर विस्तार से लिखने का अवसर मिला. इसके अलावा चारधाम यात्रा, सावन, नवरात्रि, दीपावली, होली, छठ पूजा, अमरनाथ यात्रा, रमज़ान और अन्य प्रमुख धार्मिक आयोजनों पर भी लगातार लेखन किया है. भारतीय संस्कृति, धर्म-दर्शन, ज्योतिष, अंक ज्योतिष, वास्तु शास्त्र, पुराणों और लोक आस्थाओं के अध्ययन में विशेष रुचि रखता हूं. मेरा प्रयास हमेशा यही रहता है कि धार्मिक और आध्यात्मिक विषयों को सरल भाषा के माध्यम से पाठकों तक पहुंचाया जाए, ताकि वे अपनी परंपराओं और सांस्कृतिक विरासत को बेहतर ढंग से समझ सकें.

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