
गुरु उदय 2026Image Credit source: magnific
Jupiter Transit 2026: 12 अगस्त 2026 का दिन ज्योतिष और खगोलीय घटनाओं, दोनों लिहाज से खास रहने वाला है. इस दिन एक ओर साल का दूसरा और आखिरी सूर्य ग्रहण लगेगा, वहीं दूसरी ओर देवगुरु बृहस्पति अपनी उदय अवस्था में आएंगे. पंचांग के अनुसार करीब 28 दिनों तक अस्त रहने के बाद बृहस्पति 12 अगस्त की सुबह 5 बजकर 3 मिनट पर उदित होंगे. खास बात यह है कि इस समय गुरु अपनी उच्च राशि कर्क में स्थित हैं. ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार गुरु का उदय होना कई क्षेत्रों में शुभ प्रभावों को फिर से सक्रिय करने वाला माना जाता है.
12 अगस्त को उदय होंगे देवगुरु बृहस्पति
ज्योतिष शास्त्र में बृहस्पति को देवगुरु यानी देवताओं का गुरु कहा गया है. इन्हें ज्ञान, शिक्षा, धर्म, विवाह, संतान, धन, भाग्य और विस्तार का कारक माना जाता है. जब बृहस्पति अस्त अवस्था में होते हैं तो ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार उनकी शुभता और प्रभाव कुछ हद तक कमजोर माने जाते हैं. अब करीब 28 दिनों की अस्त अवस्था के बाद गुरु फिर से उदित होने जा रहे हैं. पंचांग के अनुसार 12 अगस्त 2026 को सुबह 5:03 बजे गुरु का उदय होगा. गुरु का यह उदय इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि इस समय वे कर्क राशि में मौजूद हैं.
कर्क राशि में गुरु को क्यों मिलती है सबसे ज्यादा शक्ति?
वैदिक ज्योतिष में बृहस्पति की उच्च राशि कर्क मानी जाती है. इसका मतलब यह है कि कर्क राशि में बृहस्पति को उनकी मजबूत और प्रभावशाली स्थिति माना जाता है. गुरु जब कर्क राशि में उच्च अवस्था में होते हैं और फिर अस्त होने के बाद उदित होते हैं तो ज्योतिषीय दृष्टि से उनकी शुभ शक्ति को मजबूत माना जाता है. यही वजह है कि 12 अगस्त का गुरु उदय कई लोगों के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है.
ज्योतिष में गुरु को इतना महत्वपूर्ण क्यों माना जाता है?
ज्योतिष में बृहस्पति को सबसे शुभ ग्रहों में शामिल किया जाता है. उन्हें ज्ञान, विवेक, धर्म, अध्यात्म, शिक्षा और समृद्धि का कारक माना जाता है. कुंडली में मजबूत गुरु को अच्छी शिक्षा, सही निर्णय लेने की क्षमता, भाग्य का साथ, सम्मान और आर्थिक स्थिरता से जोड़कर देखा जाता है. विवाह और संतान से जुड़े मामलों में भी बृहस्पति की भूमिका को महत्वपूर्ण माना जाता है. यही वजह है कि गुरु की चाल, राशि परिवर्तन, अस्त और उदय जैसी खगोलीय स्थितियों पर ज्योतिष में विशेष ध्यान दिया जाता है.
गुरु के उदय से क्या माना जाता है?
ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार गुरु के उदय होने के बाद उनके कारक तत्वों से जुड़े शुभ प्रभाव दोबारा सक्रिय होने लगते हैं. शिक्षा, ज्ञान, धार्मिक गतिविधियों, करियर, धन और सामाजिक प्रतिष्ठा से जुड़े मामलों में सकारात्मक बदलाव की संभावना मानी जाती है. गुरु के उदय के बाद कई शुभ कार्यों के लिए भी परिस्थितियां अनुकूल मानी जाती हैं. हालांकि किसी शुभ कार्य के लिए केवल गुरु की स्थिति देखना पर्याप्त नहीं होता. इसके लिए पूरी कुंडली और शुभ मुहूर्त का विचार किया जाता है.
गुरु उदय का धार्मिक महत्व
देवगुरु बृहस्पति को हिंदू धर्म और वैदिक परंपरा में ज्ञान और धर्म का प्रतीक माना गया है. इसलिए उनके उदय के समय धार्मिक गतिविधियों, पूजा-पाठ और आध्यात्मिक कार्यों की ओर रुचि बढ़ने की मान्यता है.गुरुवार के दिन भगवान विष्णु की पूजा, पीले वस्त्र या पीली वस्तुओं का दान और गुरु मंत्र का जाप करने की परंपरा भी कई लोग अपनाते हैं.
ये भी पढ़ें: देवगुरु का गोचर बिगाड़ेगा प्लानिंग, इन 6 राशि वालों को फूंक-फूंककर रखना है कदम
Disclaimer: इस खबर में दी गई जानकारी धार्मिक मान्यताओं और सामान्य जानकारियों पर आधारित है. टीवी9 भारतवर्ष इसकी पुष्टि नहीं करता है.

वरुण चौहान
इलेक्ट्रानिक और डिजिटल मीडिया में करीब एक दशक से ज्यादा का अनुभव. 2008 में एशियन एकेडमी ऑफ फिल्म एंड टेलीविजन (AAFT) नोएडा से पत्रकारिता का कोर्स करने के बाद कुछ अलग और नया करने की सोच के साथ मीडिया में अपने सफर की शुरुआत की. शुरुआत से ही मेरी रुचि उन विषयों को आम लोगों तक पहुंचाने में रही है, जो भारतीय संस्कृति, धार्मिक परंपराओं से जुड़े हैं. अपने करियर के दौरान Channel One News, Sahara Samay, A2Z News, News Express, National Voice और पंजाब केसरी डिजिटल जैसे प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में काम करने का अवसर मिला. इन संस्थानों में काम करते हुए समाचार लेखन, फील्ड रिपोर्टिंग,और डिजिटल कंटेंट को सीखने का अनुभव मिला. फिलहाल देश के सबसे बड़े न्यूज नेटवर्क TV9 भारतवर्ष में धर्म और आस्था से जुड़ी खबरों, धार्मिक आयोजनों, ज्योतिष, वास्तु, पौराणिक कथाओं, मंदिरों की परंपराओं और व्रत-त्योहारों से जुड़े विषयों को सरल, सहज और तथ्यपूर्ण भाषा में पाठकों तक पहुंचाने की जिम्मेदारी निभा रहा हूं. महाकुंभ 2025 की कवरेज मेरे करियर के महत्वपूर्ण अनुभवों में शामिल है, जहां करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था, अखाड़ों की परंपराओं, संत समाज की गतिविधियों और कुंभ से जुड़े धार्मिक और सांस्कृतिक पहलुओं पर विस्तार से लिखने का अवसर मिला. इसके अलावा चारधाम यात्रा, सावन, नवरात्रि, दीपावली, होली, छठ पूजा, अमरनाथ यात्रा, रमज़ान और अन्य प्रमुख धार्मिक आयोजनों पर भी लगातार लेखन किया है. भारतीय संस्कृति, धर्म-दर्शन, ज्योतिष, अंक ज्योतिष, वास्तु शास्त्र, पुराणों और लोक आस्थाओं के अध्ययन में विशेष रुचि रखता हूं. मेरा प्रयास हमेशा यही रहता है कि धार्मिक और आध्यात्मिक विषयों को सरल भाषा के माध्यम से पाठकों तक पहुंचाया जाए, ताकि वे अपनी परंपराओं और सांस्कृतिक विरासत को बेहतर ढंग से समझ सकें.
Read More