iPhone 18 Pro Max Price: नया आईफोन 18 प्रो लॉन्च हो गया है, लेकिन भारत में इसकी कीमत काफी ज़्यादा है। अमेरिका, जापान और दुबई जैसे कई देशों में टैक्स और इंपोर्ट ड्यूटी की वजह से आईफोन सस्ते मिलते हैं। यह लेख बताता है कि विदेश से आईफोन खरीदने से पहले किन बातों का ध्यान रखना चाहिए।
Cheapest iPhone Countries: टेक की दिग्गज कंपनी ऐपल ने अपने सबसे ज़्यादा इंतज़ार वाले आईफोन 18 प्रो और आईफोन 18 प्रो मैक्स को आधिकारिक तौर पर लॉन्च कर दिया है। पिछले साल के आईफोन 17 प्रो मॉडल के मुकाबले इस बार हार्डवेयर में बड़े अपग्रेड किए गए हैं। ऐपल ने बताया है कि 12 सितंबर से फोन का प्री-ऑर्डर शुरू होगा और 18 सितंबर से यह मार्केट में मिलने लगेगा।
ज़्यादातर स्मार्टफोन यूज़र्स का सपना होता है कि उनके पास एक आईफोन हो। लेकिन अक्सर ग्राहक देखते हैं कि भारत में आईफोन की कीमत दूसरे देशों के मुकाबले काफी ज़्यादा है। इसी वजह से जो लोग विदेश जाते हैं, वे वहीं से आईफोन खरीदकर भारत लाने के बारे में सोचते हैं।
ड्यूश बैंक (Deutsche Bank) की एक रिपोर्ट और ग्लोबल मार्केट की कीमतों के आधार पर, कई ऐसे देश हैं जहां भारत के मुकाबले आईफोन सस्ते मिलते हैं। इसकी कई वजहें हैं, जैसे- टैक्स, इंपोर्ट ड्यूटी, लोकल मार्केट की प्राइसिंग पॉलिसी और करेंसी की वैल्यू।
सबसे सस्ते आईफोन वाले टॉप 10 देश
1. अमेरिका (USA)
आईफोन खरीदने के लिए अमेरिका दुनिया के सबसे सस्ते बाज़ारों में से एक है। यहां आईफोन की बेस प्राइस कई देशों से कम होती है। लेकिन एक बात याद रखनी चाहिए कि अमेरिका के कुछ राज्यों में सेल्स टैक्स अलग से लगता है। इसलिए, स्टोर या ऑनलाइन दिखने वाली कीमत और फाइनल पेमेंट में अंतर हो सकता है।
2. दक्षिण कोरिया
दक्षिण कोरिया भी उन प्रमुख बाज़ारों में से एक है जहां आईफोन कम कीमत पर मिलता है। ऐपल की रीजनल प्राइसिंग पॉलिसी और स्थानीय टैक्स सिस्टम की वजह से यहां कुछ मॉडल्स भारत से कम दाम में खरीदे जा सकते हैं।
3. जापान
जापान में भी आईफोन की कीमतें कई देशों के मुकाबले काफी कॉम्पिटिटिव हैं। इसकी मुख्य वजह वहां का कंजम्पशन टैक्स और ऐपल की रीजनल प्राइसिंग स्ट्रैटेजी है। टूरिस्ट्स के लिए टैक्स रिफंड की सुविधा भी मिलती है, जिससे कई बार कीमत और कम हो जाती है। इसी वजह से जापान में आईफोन भारत से सस्ता मिलता है।
4. हॉन्ग कॉन्ग
हॉन्ग कॉन्ग में सामान्य VAT या सेल्स टैक्स सिस्टम नहीं है। यही एक बड़ी वजह है कि वहां इलेक्ट्रॉनिक्स सस्ते मिलते हैं। इसलिए, आईफोन खरीदने के लिए यह एक पॉपुलर मार्केट है।
5. ताइवान
ताइवान में भी कुछ आईफोन मॉडल्स भारत से कम कीमत पर मिल जाते हैं। टैक्स सिस्टम, लोकल मार्केट प्राइस और करेंसी वैल्यू के असर की वजह से ग्राहकों को कीमत में अंतर दिख सकता है।
6. संयुक्त अरब अमीरात (UAE)
भारतीयों के लिए विदेश से आईफोन खरीदने के लिए दुबई सबसे पॉपुलर जगहों में से एक है। UAE में VAT बहुत कम है और साथ ही, एलिजिबल टूरिस्ट्स के लिए टैक्स रिफंड की सुविधा भी है। इसलिए, अगर आप टैक्स रिफंड ले पाते हैं, तो आईफोन की कुल लागत और भी कम हो सकती है।
7. कनाडा
कनाडा में भी कुछ आईफोन मॉडल्स भारत से कम दाम में मिल सकते हैं। लेकिन यहां प्रांत के आधार पर सेल्स टैक्स बदलता है, इसलिए फाइनल कीमत जगह-जगह अलग हो सकती है।
8. फिलीपींस
दक्षिण-पूर्व एशिया के बाज़ारों में फिलीपींस भी उन देशों में से है जहां आईफोन कुछ हद तक किफायती कीमत पर मिलता है। ऐपल की रीजनल प्राइसिंग पॉलिसी और टैक्स सिस्टम की वजह से कुछ मॉडल्स की कीमत भारत से कम होती है।
9. वियतनाम
वियतनाम में हाल के सालों में आईफोन का बाज़ार तेज़ी से बढ़ा है। लोकल मार्केट में कॉम्पिटिशन और ऐपल की प्राइसिंग पॉलिसी के कारण कुछ आईफोन मॉडल्स ग्लोबल कीमतों के मुकाबले कॉम्पिटिटिव रेट पर उपलब्ध हैं।
10. चीन
ऐपल की सप्लाई चेन में चीन का एक अहम रोल है। कई आईफोन का प्रोडक्शन और असेंबली चीन में ही होता है, इसलिए कुछ मामलों में ट्रांसपोर्ट और सप्लाई चेन की लागत का असर कम हो सकता है।
भारत में आईफोन इतना महंगा क्यों है?
भारत में आईफोन के महंगे होने की सबसे बड़ी वजह टैक्स और इंपोर्ट से जुड़ी लागतें हैं। आईफोन पर 18% GST लगता है। इसके अलावा, बाहर से मंगाए जाने वाले पार्ट्स और प्रोडक्ट्स पर लगने वाली कस्टम ड्यूटी और सप्लाई चेन की लागत भी फाइनल कीमत पर असर डालती है।
हालांकि ऐपल भारत में लोकल प्रोडक्शन बढ़ा रहा है, लेकिन अभी भी सभी मॉडल्स और उनके सारे पार्ट्स यहीं नहीं बनते। इसलिए मॉडल, प्रोडक्शन की जगह, इंपोर्ट किए गए पार्ट्स और टैक्स स्ट्रक्चर के आधार पर कीमत बदल जाती है।
तो क्या विदेश से आईफोन खरीदना बेहतर है?
विदेश में आईफोन भले ही सस्ता दिखे, लेकिन भारत लाने की कुल लागत को ध्यान में रखकर ही कोई फैसला लेना चाहिए। गैर-ज़रूरी परेशानियों से बचने के लिए खरीदने से पहले वारंटी, SIM/eSIM कम्पैटिबिलिटी, 5G बैंड्स और टैक्स के नियमों को ज़रूर जांच लें।