जबलपुर हाईकोर्ट ने खारिज की IPS कैडर रिव्यू की याचिका: केंद्र सरकार की दलील नहीं मानी, कहा- कैडर रिव्यू की प्रक्रिया समय पर और नियमानुसार होती रही - Jabalpur News

Published on 8 अक्टू॰ 2026

मध्यप्रदेश में IPS कैडर रिव्यू में कथित देरी को लेकर राज्य पुलिस सेवा के अधिकारियों के पक्ष में केंद्रीय प्रशासनिक अधिकरण (CAT), जबलपुर के आदेश को चुनौती देने वाली केंद्र सरकार की याचिका मध्यप्रदेश हाईकोर्ट की जबलपुर पीठ ने गुरुवार को प्रवेश स्तर पर

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हाईकोर्ट ने CAT का आदेश बरकरार रखा। केंद्र सरकार की उस दलील को स्वीकार नहीं किया गया, जिसमें कहा गया था कि कैडर रिव्यू की प्रक्रिया समय-समय पर और नियमानुसार होती रही है तथा इसमें कोई देरी नहीं हुई।

CAT ने 120 दिन में प्रक्रिया पूरी करने कहा था

मामला मध्यप्रदेश पुलिस एसोसिएशन की ओर से दायर मूल आवेदन से जुड़ा है। CAT, जबलपुर ने 9 जनवरी 2026 को आदेश जारी कर केंद्र और राज्य सरकार को अतिरिक्त IPS कैडर रिव्यू की प्रक्रिया पूरी करने के निर्देश दिए थे। इसके लिए 120 दिन की समय-सीमा तय की गई थी।

CAT के इस आदेश को केंद्र सरकार ने हाईकोर्ट में चुनौती दी थी। केंद्र की ओर से तर्क दिया गया कि कैडर रिव्यू की प्रक्रिया समयबद्ध तरीके से की जाती रही है और इसमें किसी तरह की अनावश्यक देरी नहीं हुई है। हालांकि, हाईकोर्ट ने यह दलील स्वीकार नहीं की और याचिका प्रवेश स्तर पर ही खारिज कर दी। इससे 9 जनवरी 2026 का CAT का आदेश प्रभावी बना हुआ है।

समय पर रिव्यू की जरूरत का मुद्दा उठाया

मामले में राज्य पुलिस सेवा के अधिकारियों की ओर से कहा गया था कि IPS (Cadre) Rules, 1954 के तहत कैडर रिव्यू की प्रक्रिया समयबद्ध तरीके से किया जाना जरूरी है। लंबे समय तक कैडर रिव्यू में देरी का सीधा असर राज्य पुलिस सेवा के पात्र अधिकारियों के IPS में इंडक्शन के अवसर पर पड़ता है।

हाईकोर्ट के समक्ष यह भी पक्ष रखा गया कि केवल यह कहना पर्याप्त नहीं है कि कैडर रिव्यू किसी समय किया गया था। नियमों के अनुसार आवश्यक अवधि पर उसका पुनरीक्षण और पात्र अधिकारियों को समय पर अवसर मिलना जरूरी है।

डिवीजन बेंच ने आदेश बरकरार रखा

जस्टिस विवेक रूसिया और जस्टिस प्रदीप मित्तल की डिवीजन बेंच ने गुरुवार को आदेश जारी किया। CAT के आदेश के बरकरार रहने से केंद्र और राज्य सरकार के लिए अतिरिक्त कैडर रिव्यू की प्रक्रिया आगे बढ़ाने का रास्ता साफ हो गया है।

मध्यप्रदेश पुलिस एसोसिएशन की ओर से अधिवक्ता पंकज दुबे और अक्षय खंडेलवाल ने पैरवी की। उन्होंने केंद्र सरकार की ओर से CAT के आदेश को चुनौती देने के आधारों का विरोध किया।

यह निर्णय राज्य पुलिस सेवा के अधिकारियों के लिए महत्वपूर्ण है, क्योंकि कैडर रिव्यू में देरी का असर अधिकारियों की वरिष्ठता, पात्रता और IPS में इंडक्शन के अवसर पर पड़ सकता है।