Jharkhand News: खेती में बंपर मुनाफा! मडुआ उगाएं, सरकार से पाएं प्रति एकड़ 3000 रुपये और 97% छूट पर सोलर पंप सेट

Published on 23 जुल॰ 2026

Jharkhand News: खरीफ सीजन शुरू होते ही किसान खेतों की तैयारी में जुट गए हैं. ऐसे समय में किसानों को नई कृषि तकनीकों और सरकारी योजनाओं की जानकारी देने के लिए मसलिया प्रखंड की हाड़ोरायडीह पंचायत के पास आत्मा समिति की ओर से किसान गोष्ठी आयोजित की गई. इस कार्यक्रम का उद्देश्य किसानों को आधुनिक खेती के तरीके सिखाना, खेती की लागत कम करना और उत्पादन बढ़ाने के उपाय बताना था. गोष्ठी में बड़ी संख्या में किसानों ने हिस्सा लिया और कृषि विशेषज्ञों से सीधे बातचीत कर अपनी समस्याओं का समाधान भी जाना.

आधुनिक खेती अपनाने की सलाह

कार्यक्रम में बीटीएम श्यामसुंदर सिंह ने किसानों को संबोधित करते हुए कहा कि बदलते समय के साथ खेती के तरीके भी बदलने की जरूरत है. केवल पारंपरिक खेती पर निर्भर रहने के बजाय किसानों को आधुनिक और वैज्ञानिक तकनीकों को अपनाना चाहिए. उन्होंने कहा कि उन्नत किस्म के बीजों का इस्तेमाल करने से अच्छी पैदावार मिलती है और फसल की गुणवत्ता भी बेहतर होती है.

उन्होंने किसानों को दलहन, तिलहन और मिलेट जैसी फसलों की खेती बढ़ाने की सलाह दी. साथ ही बताया कि समेकित पोषक तत्व प्रबंधन और समेकित कीट प्रबंधन जैसी तकनीकों को अपनाने से फसल को सही पोषण मिलता है, कीटों का नियंत्रण बेहतर तरीके से होता है और उत्पादन में बढ़ोतरी होती है. इससे खेत की मिट्टी भी लंबे समय तक उपजाऊ बनी रहती है.

प्राकृतिक और जैविक खेती पर दिया जोर

गोष्ठी में प्राकृतिक और जैविक खेती के महत्व पर भी विस्तार से चर्चा की गई. विशेषज्ञों ने कहा कि रासायनिक खाद और कीटनाशकों का अधिक उपयोग मिट्टी की उर्वरता को धीरे-धीरे कम कर देता है. इसलिए किसानों को जैविक खाद, गोबर की खाद और जैव उर्वरकों का अधिक से अधिक उपयोग करना चाहिए.

उन्होंने बताया कि यदि किसान रासायनिक और जैविक उर्वरकों का संतुलित उपयोग करेंगे तो मिट्टी की सेहत बेहतर बनी रहेगी. इससे फसल की गुणवत्ता में सुधार होगा और बाजार में अच्छे दाम मिलने की संभावना भी बढ़ेगी.

मिलेट मिशन के तहत मडुआ की खेती को बढ़ावा

विशेषज्ञों ने किसानों को मिलेट मिशन योजना की जानकारी देते हुए मडुआ (रागी) की खेती करने की सलाह दी. उन्होंने बताया कि जलवायु परिवर्तन और कम होती बारिश को देखते हुए ऐसी फसलों की जरूरत है, जिनमें कम पानी की आवश्यकता हो. मडुआ ऐसी ही एक फसल है, जिसकी खेती कम लागत और कम पानी में आसानी से की जा सकती है.

उन्होंने बताया कि मडुआ पोषण से भरपूर अनाज है. इसमें कैल्शियम, आयरन, फाइबर और प्रोटीन अच्छी मात्रा में पाए जाते हैं, इसलिए यह स्वास्थ्य के लिए भी काफी लाभदायक माना जाता है. किसानों को इस फसल की खेती के लिए प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से सरकार मिलेट मिशन के तहत प्रति एकड़ 3,000 रुपये की प्रोत्साहन राशि भी देती है. इससे किसानों की आय बढ़ाने में मदद मिलेगी.

पीएम कुसुम योजना से सस्ती सिंचाई की सुविधा

गोष्ठी में किसानों को प्रधानमंत्री कुसुम योजना के बारे में भी जानकारी दी गई. विशेषज्ञों ने बताया कि इस योजना के तहत किसानों को सोलर पंप लगाने के लिए लगभग 97 प्रतिशत तक अनुदान दिया जाता है. किसानों को केवल करीब 5,000 रुपये का अंशदान देना होता है, जिसके बाद उन्हें सोलर पंप उपलब्ध कराया जाता है.

उन्होंने कहा कि सोलर पंप लगने से किसानों की सिंचाई पर होने वाला खर्च काफी कम हो जाएगा. डीजल और बिजली पर निर्भरता घटेगी और किसान कम लागत में अपनी फसलों की सिंचाई कर सकेंगे. इससे खेती अधिक लाभदायक बनेगी और किसानों की आमदनी में भी बढ़ोतरी होगी.

रसायनों का संतुलित उपयोग करने की अपील

कार्यक्रम के अंत में कृषि विशेषज्ञों ने किसानों से अपील की कि वे रासायनिक उर्वरकों और कीटनाशकों का जरूरत के अनुसार ही इस्तेमाल करें. उन्होंने कहा कि लगातार और अधिक मात्रा में रसायनों का उपयोग करने से मिट्टी की उर्वरता घटती है और भविष्य में उत्पादन भी प्रभावित होता है.

विशेषज्ञों ने सलाह दी कि किसान जैविक खाद, जैव उर्वरकों और रासायनिक उर्वरकों का संतुलित उपयोग करें. इससे मिट्टी की गुणवत्ता बनी रहेगी, फसल अधिक पौष्टिक होगी और उत्पादन भी बेहतर मिलेगा. साथ ही किसानों की खेती लंबे समय तक टिकाऊ और लाभदायक बन सकेगी.

किसानों ने योजनाओं में दिखाई रुचि

गोष्ठी में शामिल किसानों ने आधुनिक खेती, मिलेट मिशन और पीएम कुसुम योजना जैसी सरकारी योजनाओं में काफी रुचि दिखाई. किसानों ने विशेषज्ञों से खेती से जुड़े कई सवाल पूछे और नई तकनीकों की जानकारी ली. विशेषज्ञों ने भरोसा दिलाया कि यदि किसान वैज्ञानिक तरीकों और सरकारी योजनाओं का सही लाभ उठाएंगे तो कम लागत में बेहतर उत्पादन हासिल कर सकेंगे और उनकी आय में भी लगातार वृद्धि होगी.

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