बिल्डर को वादा तोड़ना पड़ा भारी, MahaRERA ने लगाया जुर्माना और खरीदार के हक में सुनाया फैसला

Published on 24 सित॰ 2026

बिल्डर को वादा तोड़ना पड़ा भारी, MahaRERA ने लगाया जुर्माना और खरीदार के हक में सुनाया फैसला

MahaRERA ने लगाया जुर्माना

घर या प्लॉट खरीदते समय बिल्डर की ओर से किए गए वादों को लिखित दस्तावेजों में देखना बेहद जरूरी है. महाराष्ट्र में सामने आए एक मामले में बिल्डर ने अलॉटमेंट लेटर में स्टांप ड्यूटी और रजिस्ट्रेशन चार्ज खुद देने की बात कही, लेकिन बाद में इससे पीछे हट गया. मामला MahaRERA तक पहुंचा, जहां प्राधिकरण ने खरीदार के पक्ष में फैसला सुनाते हुए बिल्डर को ये खर्च उठाने का आदेश दिया. साथ ही देरी से कब्जे के लिए करीब 5.4 लाख रुपये ब्याज देने को भी कहा गया.

खरीदार ने चुकाए थे करीब 1.6 करोड़ रुपये

रिपोर्ट के मुताबिक, सेतुरामन ने 11 मार्च 2025 को बिल्डर के साथ अलॉटमेंट लेटर साइन किया था और करीब 1.6 करोड़ रुपये का भुगतान किया. अलॉटमेंट लेटर में स्टांप ड्यूटी और रजिस्ट्रेशन चार्ज बिल्डर की ओर से देने की बात कही गई थी.

लेकिन जब सेल एग्रीमेंट करने का समय आया तो बिल्डर ने इन खर्चों को उठाने से इनकार कर दिया. बिल्डर ने इसे दस्तावेज में हुई टाइपिंग की गलती बताया और कहा कि वह इन चार्ज का भुगतान नहीं करेगा. इसके बाद खरीदार ने MahaRERA में शिकायत की.

MahaRERA ने क्यों खरीदार के पक्ष में फैसला दिया?

MahaRERA ने मामले की सुनवाई में पाया कि बिल्डर की ओर से पहले किए गए प्रोजेक्ट डिस्क्लोजर और अलॉटमेंट लेटर में स्टांप ड्यूटी और रजिस्ट्रेशन चार्ज बिल्डर द्वारा वहन करने की बात दर्ज थी.

इसके अलावा, MahaRERA की वेबसाइट पर अपलोड किए गए डेविएशन रिपोर्ट में भी यही शर्त मौजूद थी. हालांकि बाद में तैयार किए गए संशोधित सेल एग्रीमेंट के प्रारूप से यह शर्त हटा दी गई थी.

MahaRERA ने कहा कि बिल्डर अपने ही प्रोजेक्ट डिस्क्लोजर और पहले किए गए वादे से बाद में पीछे नहीं हट सकता. इसलिए स्टांप ड्यूटी और रजिस्ट्रेशन चार्ज की जिम्मेदारी बिल्डर की ही रहेगी.

एग्रीमेंट रजिस्टर्ड नहीं कराने पर भी सवाल

प्राधिकरण ने यह भी पाया कि खरीदार ने करीब 1.6 करोड़ रुपये का भुगतान कर दिया था, लेकिन सेल एग्रीमेंट रजिस्टर्ड नहीं हुआ था. दस्तावेज नोटरीकृत था. MahaRERA ने इसे RERA Act की धारा 13(1) के उल्लंघन से जोड़ा.

देरी से कब्जे के लिए मिला ब्याज

मामले में कब्जे में देरी का मुद्दा भी सामने आया. MahaRERA ने आदेश दिया कि बिल्डर को 1 जनवरी 2026 से 27 अप्रैल 2026 तक की अवधि के लिए ब्याज देना होगा. ब्याज की दर SBI की MCLR से 2 प्रतिशत अधिक रखी गई. ET की गणना के अनुसार यह रकम करीब 5.43 लाख रुपये बैठती है.

घर खरीदते समय इन दस्तावेजों को जरूर देखें

यह मामला होमबायर्स के लिए यह बात महत्वपूर्ण बनाता है कि बिल्डर के मौखिक वादों पर निर्भर रहने के बजाय अलॉटमेंट लेटर, सेल एग्रीमेंट और RERA में अपलोड किए गए प्रोजेक्ट दस्तावेजों को ध्यान से पढ़ें. खासकर स्टांप ड्यूटी, रजिस्ट्रेशन चार्ज, कब्जे की तारीख और दूसरे खर्चों से जुड़ी शर्तों को लिखित रूप में जरूर जांचें.

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कन्हैया पचौरी

कन्हैया पचौरी

कन्हैया पचौरी एक अनुभवी पत्रकार हैं जिन्हें प्रिंट, टीवी और ऑनलाइन मीडिया में 10 वर्षों का अनुभव है. उन्होंने प्रिंट पत्रकार के रूप में अपना करियर शुरू किया और पिछले कुछ वर्षों से उन्होंने टेक और ऑटो सेक्शन को कवर कर रहे हैं. वह टेक्नोलॉजी पर बारीकी से रिसर्च करते है और लेटेस्ट ट्रेंड्स और डेवलपमेंट्स पर नजर रखते हैं. वर्तमान में, कन्हैया टीवी9 के साथ जुड़े हुए हैं, यहां ये टेक और ऑटो सेक्शन कवर कर रहे हैं. उन्होंने इंडस्ट्री में लेटेस्ट डेवलपमेंट के गहन कवरेज करने को लेकर अपना नाम बनाया है. यूजर्स को किसी भी न्यूज की पूरी और सही जानकारी देने में तत्पर हैं. जब वह टेक्नोलॉजी पर काम नहीं कर रहे होते हैं तो अपने शौक पूरे करने में उन्हें अच्छा लगता है. उन्हें म्यूजिक सुनना और किताबें पढ़ना पसंद है. उनका मानना है कि काम में व्यस्त दिन के बाद म्यूजिक और किताबें आराम करने का एक शानदार तरीका है.

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