
मंगला गौरी व्रत 2026Image Credit source: unsplash
Mangla Gauri Vrat 2026 Dates: सावन का महीना भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा के लिए बेहद खास माना जाता है. इस पवित्र महीने में जहां सोमवार का दिन भोलेनाथ को समर्पित होता है, वहीं मंगलवार का दिन माता पार्वती की आराधना के लिए विशेष माना जाता है. सावन के मंगलवार को सुहागिन महिलाएं और विवाह योग्य लड़कियां मंगला गौरी व्रत रखती हैं. मान्यता है कि इस दिन माता पार्वती के मंगला गौरी स्वरूप की पूजा करने से वैवाहिक जीवन में सुख-शांति बनी रहती है और अखंड सौभाग्य का आशीर्वाद मिलता है. सावन शुरू होने के अगले सप्ताह से ही मंगला गौरी व्रत की शुरुआत हो जाएगी. ऐसे में इस साल सावन में कुल चार मंगला गौरी व्रत रखे जाएंगे. आइए जानते हैं पहला मंगला गौरी व्रत किस दिन रखा जाएगा और सावन के चारों मंगलवार की तारीख क्या है.
सावन 2026 में पहला मंगला गौरी व्रत कब रखा जाएगा?
साल 2026 में सावन महीने की शुरुआत 30 जुलाई, गुरुवार से हो रही है. सावन का पहला सोमवार 3 अगस्त को पड़ेगा, जबकि इसके अगले दिन यानी 4 अगस्त, मंगलवार को पहला मंगला गौरी व्रत रखा जाएगा.इस दिन महिलाएं सुबह स्नान करने के बाद व्रत का संकल्प लेती हैं और पूरे दिन उपवास रखकर माता पार्वती की पूजा करती हैं. शाम के समय भी विधि-विधान से पूजा-अर्चना की जाती है. मान्यता है कि मंगला गौरी व्रत रखने से माता पार्वती प्रसन्न होती हैं और सुहागिन महिलाओं को अखंड सौभाग्य का आशीर्वाद देती हैं.
सावन 2026 में मंगला गौरी व्रत की तिथि
- पहला मंगला गौरी व्रत: 4 अगस्त 2026, मंगलवार
- दूसरा मंगला गौरी व्रत: 11 अगस्त 2026, मंगलवार
- तीसरा मंगला गौरी व्रत: 18 अगस्त 2026, मंगलवार
- चौथा मंगला गौरी व्रत: 25 अगस्त 2026, मंगलवार
मंगला गौरी व्रत क्यों रखा जाता है?
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, माता पार्वती ने भगवान शिव को पति रूप में पाने के लिए कठोर तपस्या की थी. इसलिए माता पार्वती को सुहाग और अखंड सौभाग्य की देवी के रूप में भी पूजा जाता है. सावन के मंगलवार को उनके मंगला गौरी स्वरूप की पूजा करने की परंपरा है. मान्यता है कि सुहागिन महिलाएं अगर श्रद्धा के साथ मंगला गौरी व्रत रखती हैं तो उन्हें सुखी वैवाहिक जीवन और पति की लंबी उम्र का आशीर्वाद मिलता है. वहीं, विवाह योग्य लड़कियां भी अच्छे जीवनसाथी और सुखी वैवाहिक जीवन की कामना से यह व्रत रखती हैं.
मंगला गौरी व्रत में कैसे करें माता पार्वती की पूजा?
मंगला गौरी व्रत के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और साफ कपड़े पहनें. इसके बाद पूजा स्थल की सफाई करके माता पार्वती की प्रतिमा या तस्वीर स्थापित करें. इसके साथ भगवान शिव की पूजा भी जरूर करें, क्योंकि माता पार्वती और भगवान शिव की पूजा साथ करने का विशेष महत्व माना जाता है. पूजा के दौरान माता पार्वती को लाल रंग के वस्त्र, लाल फूल, सिंदूर, कुमकुम, अक्षत और सुहाग की सामग्री अर्पित की जाती है. इसके बाद माता को फल और मिठाई का भोग लगाएं. श्रद्धा के साथ माता पार्वती की आरती करें और उनसे अपने परिवार की सुख-समृद्धि और वैवाहिक जीवन में खुशहाली की प्रार्थना करें.
सुहागिन महिलाओं के लिए खास माना जाता है यह व्रत
मंगला गौरी व्रत को खासतौर पर सुहागिन महिलाओं के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है. इस दिन महिलाएं सोलह श्रृंगार करती हैं और माता पार्वती को सुहाग की सामग्री अर्पित करती हैं. इसमें सिंदूर, चूड़ियां, बिंदी, मेहंदी और अन्य सुहाग सामग्री शामिल हो सकती है. मान्यता है कि माता पार्वती को सुहाग की सामग्री चढ़ाने और उनकी पूजा करने से वैवाहिक जीवन में सुख-शांति बनी रहती है. महिलाएं अपने पति की लंबी उम्र और परिवार की खुशहाली के लिए भी इस दिन विशेष प्रार्थना करती हैं.
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Disclaimer: इस खबर में दी गई जानकारी धार्मिक मान्यताओं और सामान्य जानकारियों पर आधारित है. टीवी9 भारतवर्ष इसकी पुष्टि नहीं करता है.

वरुण चौहान
इलेक्ट्रानिक और डिजिटल मीडिया में करीब एक दशक से ज्यादा का अनुभव. 2008 में एशियन एकेडमी ऑफ फिल्म एंड टेलीविजन (AAFT) नोएडा से पत्रकारिता का कोर्स करने के बाद कुछ अलग और नया करने की सोच के साथ मीडिया में अपने सफर की शुरुआत की. शुरुआत से ही मेरी रुचि उन विषयों को आम लोगों तक पहुंचाने में रही है, जो भारतीय संस्कृति, धार्मिक परंपराओं से जुड़े हैं. अपने करियर के दौरान Channel One News, Sahara Samay, A2Z News, News Express, National Voice और पंजाब केसरी डिजिटल जैसे प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में काम करने का अवसर मिला. इन संस्थानों में काम करते हुए समाचार लेखन, फील्ड रिपोर्टिंग,और डिजिटल कंटेंट को सीखने का अनुभव मिला. फिलहाल देश के सबसे बड़े न्यूज नेटवर्क TV9 भारतवर्ष में धर्म और आस्था से जुड़ी खबरों, धार्मिक आयोजनों, ज्योतिष, वास्तु, पौराणिक कथाओं, मंदिरों की परंपराओं और व्रत-त्योहारों से जुड़े विषयों को सरल, सहज और तथ्यपूर्ण भाषा में पाठकों तक पहुंचाने की जिम्मेदारी निभा रहा हूं. महाकुंभ 2025 की कवरेज मेरे करियर के महत्वपूर्ण अनुभवों में शामिल है, जहां करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था, अखाड़ों की परंपराओं, संत समाज की गतिविधियों और कुंभ से जुड़े धार्मिक और सांस्कृतिक पहलुओं पर विस्तार से लिखने का अवसर मिला. इसके अलावा चारधाम यात्रा, सावन, नवरात्रि, दीपावली, होली, छठ पूजा, अमरनाथ यात्रा, रमज़ान और अन्य प्रमुख धार्मिक आयोजनों पर भी लगातार लेखन किया है. भारतीय संस्कृति, धर्म-दर्शन, ज्योतिष, अंक ज्योतिष, वास्तु शास्त्र, पुराणों और लोक आस्थाओं के अध्ययन में विशेष रुचि रखता हूं. मेरा प्रयास हमेशा यही रहता है कि धार्मिक और आध्यात्मिक विषयों को सरल भाषा के माध्यम से पाठकों तक पहुंचाया जाए, ताकि वे अपनी परंपराओं और सांस्कृतिक विरासत को बेहतर ढंग से समझ सकें.
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