Monalisa on Bhojpuri Cinema: अश्लीलता और डबल मीनिंग गानों पर मोनालिसा का बड़ा बयान

Published on 5 सित॰ 2026

मुंबई: भोजपुरी सिनेमा को ग्लैमर, डबल मीनिंग गानों और अश्लील कंटेंट से जोड़कर देखने की पुरानी धारणा पर अभिनेत्री मोनालिसा ने खुलकर अपनी बात रखी है। भोजपुरी फिल्मों से पहचान बनाने के बाद हिंदी टेलीविजन और दूसरे मनोरंजन माध्यमों में जगह बनाने वाली मोनालिसा का कहना है कि कुछ वायरल म्यूजिक वीडियो के आधार पर पूरी भोजपुरी फिल्म इंडस्ट्री की छवि तय करना सही नहीं है। उनके मुताबिक, भोजपुरी फिल्मों और स्वतंत्र रूप से बनाए जाने वाले एल्बम या म्यूजिक वीडियो के बीच फर्क समझना जरूरी है।

30 अगस्त 2026 को सामने आए उनके बयान में मोनालिसा ने कहा कि वह कई वर्षों से भोजपुरी मनोरंजन जगत पर अश्लीलता के आरोप सुनती आ रही हैं, लेकिन इस तरह की राय रखने वाले बहुत से लोगों ने शायद भोजपुरी फिल्में देखी ही नहीं हैं। उनका कहना है कि YouTube पर लाखों व्यूज हासिल करने वाले कुछ गानों को देखकर दर्शक पूरी इंडस्ट्री को उसी नजर से देखने लगते हैं।

मोनालिसा की यह टिप्पणी केवल भोजपुरी सिनेमा की आलोचना का जवाब नहीं है। पिछले कुछ महीनों में उन्होंने डबल मीनिंग गानों, उनके फिल्मांकन, दर्शकों की पसंद, महिला कलाकारों की फीस और भोजपुरी फिल्मों में अपनी वापसी जैसे कई मुद्दों पर भी बात की है। इन बयानों को एक साथ देखने पर भोजपुरी इंडस्ट्री को लेकर उनका रुख कहीं अधिक स्पष्ट दिखाई देता है।

Monalisa on Bhojpuri Cinema

मुद्दामोनालिसा का पक्ष
भोजपुरी सिनेमा पर अश्लीलता का आरोपकुछ म्यूजिक वीडियो के आधार पर पूरी फिल्म इंडस्ट्री को जज करना गलत
भोजपुरी फिल्म और म्यूजिक वीडियोदोनों को अलग-अलग देखने की जरूरत
डबल मीनिंग गानेऐसे गाने बनने ही नहीं चाहिए
गानों की शूटिंगप्रस्तुति सुंदर और सौंदर्यपूर्ण होनी चाहिए
दर्शकों की भूमिकाकंटेंट की मांग और पसंद बदलने की जरूरत
महिला कलाकारों की फीसउनके अनुभव में अभिनेत्रियों को अभिनेताओं की तुलना में कम भुगतान मिलता था
एक समय में फिल्मों की संख्याउन्होंने बताया कि उन्हें साल में करीब 10-12 फिल्में मिल जाती थीं
आखिरी भोजपुरी फिल्ममोनालिसा के मुताबिक उनकी पिछली भोजपुरी फिल्म 2017 में आई
टीवी की ओर बदलाव‘बिग बॉस’ के बाद ज्यादा टीवी ऑफर मिलने लगे
‘नजर’करीब दो साल तक इस शो में व्यस्त रहीं
भोजपुरी फिल्मों में वापसीचुनौतीपूर्ण और अच्छा किरदार मिलने पर वापसी के लिए तैयार
वर्तमान रुचिवेब शो और वर्टिकल कंटेंट में बेहतर भूमिकाओं पर काम

‘कुछ वीडियो देखकर पूरी इंडस्ट्री की तस्वीर नहीं बनाई जा सकती’

भोजपुरी मनोरंजन जगत को लेकर सबसे बड़ी आलोचनाओं में से एक इसकी कथित अश्लीलता रही है। कई बार वायरल गानों, डबल मीनिंग बोल और उत्तेजक फिल्मांकन को पूरी भोजपुरी फिल्म इंडस्ट्री के प्रतिनिधि के रूप में देखा जाता है। मोनालिसा इसी सोच पर सवाल उठा रही हैं।

उन्होंने कहा कि भोजपुरी की सभी फिल्में एक जैसी नहीं हैं। एल्बम और स्वतंत्र म्यूजिक वीडियो में ऐसा कंटेंट अधिक दिखाई दे सकता है, लेकिन फिल्मों का स्वरूप अलग होता है। भोजपुरी फिल्मों में अच्छे कलाकार काम करते हैं और अभिनय के स्तर पर भी गंभीर मेहनत की जाती है।

उनकी बात का मुख्य बिंदु यही है कि ‘भोजपुरी मनोरंजन’ को एक ही श्रेणी मान लेना समस्या पैदा करता है। फिल्म, एल्बम, स्वतंत्र गाना और डिजिटल म्यूजिक वीडियो अलग-अलग तरह के उत्पाद हैं। किसी एक श्रेणी की सबसे ज्यादा वायरल सामग्री दूसरी श्रेणी की पूरी पहचान नहीं हो सकती।

यह तर्क इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि डिजिटल प्लेटफॉर्म पर वही सामग्री सबसे तेजी से सामने आती है जो ज्यादा क्लिक और व्यूज हासिल करती है। ऐसे में किसी खास शैली का गाना यदि करोड़ों या लाखों बार देखा जाता है, तो बाहर के दर्शकों के लिए वही भोजपुरी मनोरंजन का सबसे दिखाई देने वाला चेहरा बन सकता है। मोनालिसा का कहना है कि इसी वजह से पूरी इंडस्ट्री के प्रति एक तय धारणा बन जाती है।

डबल मीनिंग गानों का बचाव नहीं करतीं मोनालिसा

दिलचस्प बात यह है कि मोनालिसा भोजपुरी इंडस्ट्री का बचाव करते हुए डबल मीनिंग गानों की समस्या को खारिज नहीं करतीं। अप्रैल 2026 में Zoom/Telly Talk India के साथ बातचीत में उन्होंने साफ कहा था कि एक दौर में कुछ भोजपुरी एल्बमों में डबल मीनिंग गाने बढ़े और इसी कारण बाहर के लोगों ने इंडस्ट्री को नकारात्मक नजर से देखना शुरू किया।

उनका कहना था कि इस तरह के गाने नहीं बनने चाहिए। यानी अगस्त में भोजपुरी फिल्मों के पक्ष में दिया गया उनका बयान अप्रैल की टिप्पणी के उलट नहीं है। दोनों बयानों में उनका तर्क लगभग एक ही है—समस्या वाले कंटेंट की आलोचना होनी चाहिए, लेकिन उसी के आधार पर पूरी भोजपुरी फिल्म इंडस्ट्री को अश्लील कहना उचित नहीं है।

इस अंतर को समझना जरूरी है। मोनालिसा एक तरफ कहती हैं कि भोजपुरी सिनेमा की आलोचना कई बार अधूरी जानकारी पर आधारित होती है, तो दूसरी तरफ वे मानती हैं कि कुछ गाने और उनका प्रस्तुतीकरण वास्तव में इंडस्ट्री की छवि को नुकसान पहुंचाते हैं।

‘गाना सिर्फ अच्छा हो नहीं, उसे अच्छे तरीके से शूट भी किया जाए’

मोनालिसा ने केवल गानों के बोल पर सवाल नहीं उठाया, बल्कि उनके फिल्मांकन के तरीके को भी महत्वपूर्ण बताया। अप्रैल की बातचीत में उनका कहना था कि गानों को सौंदर्यपूर्ण तरीके से शूट किया जाना चाहिए। उनके अनुसार, कई बार कंटेंट और उसका फिल्मांकन मिलकर ऐसा प्रभाव पैदा कर देते हैं जिससे गाना खराब या भद्दा लगने लगता है।

यह टिप्पणी भोजपुरी मनोरंजन में लंबे समय से चल रही उस बहस को सामने लाती है जिसमें कंटेंट की गुणवत्ता के साथ उसकी दृश्य प्रस्तुति भी महत्वपूर्ण मानी जाती है। कोई गाना केवल उसके शब्दों से नहीं बल्कि कैमरा एंगल, कोरियोग्राफी, कॉस्ट्यूम, एडिटिंग और कलाकारों की प्रस्तुति से भी अपनी पहचान बनाता है।

मोनालिसा का रुख यहां स्पष्ट दिखाई देता है—लोकप्रिय मनोरंजन बनाया जाए, लेकिन केवल सनसनी या वायरल होने के लिए ऐसी प्रस्तुति न चुनी जाए जो पूरी इंडस्ट्री की साख को प्रभावित करे।

दर्शकों की पसंद पर भी उठाया सवाल

मोनालिसा ने जिम्मेदारी केवल कंटेंट बनाने वालों पर नहीं डाली। उन्होंने दर्शकों की पसंद को भी इस चक्र का हिस्सा बताया है। उनका मानना है कि जिस तरह का कंटेंट लगातार देखा जाता है, उसी तरह का कंटेंट बार-बार बनाया भी जाता है।

हालांकि उनका तर्क यह भी है कि यदि डबल मीनिंग या आपत्तिजनक गाने बनना कम हों, तो दर्शकों के सामने अच्छे संगीत के विकल्प बढ़ेंगे और वे उन्हें भी सुनेंगे। यानी उनके अनुसार बदलाव केवल दर्शकों से मांगने के बजाय निर्माताओं और संगीत से जुड़े लोगों को भी अपनी तरफ से पहल करनी होगी।

यहां उनकी बात बाजार की मांग और कंटेंट सप्लाई के संबंध को छूती है। किसी खास तरह के गाने की लोकप्रियता निर्माताओं को वैसा ही नया कंटेंट बनाने के लिए प्रेरित करती है और अधिक उत्पादन फिर उसी शैली को बाजार में मजबूत करता है। मोनालिसा इस चक्र को बदलने की जरूरत पर जोर देती दिखाई देती हैं।

अभिनेत्रियों की फीस पर भी बोल चुकी हैं मोनालिसा

भोजपुरी इंडस्ट्री पर उनकी टिप्पणियां केवल कंटेंट तक सीमित नहीं रही हैं। अप्रैल 2026 की बातचीत में उन्होंने अभिनेताओं और अभिनेत्रियों के भुगतान के अंतर पर भी बात की।

मोनालिसा ने कहा कि उनके अनुभव में भोजपुरी इंडस्ट्री में पुरुष कलाकारों के मुकाबले अभिनेत्रियों को कम पैसे मिलते थे। उन्होंने अपने शुरुआती दौर को याद करते हुए बताया कि उन्हें काम की कमी नहीं थी और कई बार एक साल में 10 से 12 फिल्में तक मिल जाती थीं, लेकिन आर्थिक रूप से वह कमाई वैसी नहीं थी जैसी बाद में टीवी में मिली।

उनके मुताबिक, उस समय उनका ध्यान लगातार काम मिलने पर ज्यादा था और फीस उनकी पहली प्राथमिकता नहीं थी। उन्होंने यह भी कहा कि उन्हें बेहतर और व्यवस्थित कमाई हिंदी टेलीविजन में आने के बाद महसूस हुई, खासकर ‘बिग बॉस’ के बाद।

करियर से जुड़ा आंकड़ाजानकारी
एक समय में भोजपुरी फिल्मों की संख्याकरीब 10-12 फिल्में प्रति वर्ष, मोनालिसा के अपने बयान के मुताबिक
‘बिग बॉस’ के बाद बदलावटीवी से अधिक ऑफर मिले
पिछली भोजपुरी फिल्म2017
‘नजर’ में व्यस्तताकरीब दो साल
मौजूदा काम की दिशावेब शो और वर्टिकल कंटेंट

क्या मोनालिसा ने भोजपुरी फिल्में छोड़ दी हैं?

मोनालिसा का लंबे समय से भोजपुरी फिल्मों में न दिखना अक्सर यह सवाल खड़ा करता है कि क्या उन्होंने इंडस्ट्री छोड़ दी है। अभिनेत्री ने 28 अगस्त 2026 को प्रकाशित बातचीत में इसका सीधा जवाब दिया।

उन्होंने कहा कि उन्होंने भोजपुरी फिल्में करना बंद नहीं किया है। उनकी आखिरी भोजपुरी फिल्म 2017 में थी। ‘बिग बॉस’ के बाद उन्हें हिंदी टेलीविजन से लगातार ऑफर मिलने लगे और वह ‘नजर’ में करीब दो वर्षों तक व्यस्त रहीं। इसके बाद भी टीवी में उन्हें काम मिलता रहा और दर्शकों ने उन्हें उस माध्यम में स्वीकार किया।

मोनालिसा के मुताबिक, इसका अर्थ यह नहीं है कि वह भोजपुरी फिल्मों में काम नहीं करना चाहतीं। उनका कहना है कि अगर उन्हें कोई अच्छा प्रोजेक्ट और चुनौतीपूर्ण किरदार मिलता है, तो वह भोजपुरी फिल्म में दोबारा काम करने के लिए तैयार हैं।

उनका यह बयान भोजपुरी सिनेमा पर उनकी हालिया टिप्पणी को एक अलग संदर्भ देता है। वह फिलहाल उस इंडस्ट्री में नियमित रूप से सक्रिय नहीं हैं, लेकिन उससे अपने पेशेवर संबंध को खत्म भी नहीं मानतीं।

भोजपुरी से टीवी तक कैसे बदला मोनालिसा का करियर

मोनालिसा उन कलाकारों में शामिल हैं जिन्होंने क्षेत्रीय मनोरंजन से अपनी पहचान बनाकर राष्ट्रीय टेलीविजन तक पहुंच बनाई। भोजपुरी सिनेमा में लंबे समय तक सक्रिय रहने के बाद उनकी मौजूदगी ‘बिग बॉस’ जैसे रियलिटी शो से व्यापक दर्शक वर्ग तक पहुंची। इसके बाद हिंदी टेलीविजन में उन्हें नए अवसर मिले।

‘नजर’ ने उनकी टीवी पहचान को और मजबूत किया। मोनालिसा ने खुद बताया है कि इस शो में वह लगभग दो वर्षों तक व्यस्त रहीं। हालांकि उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि ‘नजर’ के बाद हमेशा वैसे किरदार या उतनी प्रमुखता नहीं मिली जिसकी उन्हें उम्मीद थी।

अब वह वेब और वर्टिकल कंटेंट जैसे नए फॉर्मेट में काम कर रही हैं। उन्होंने हालिया बातचीत में कहा कि इन माध्यमों में उन्हें बेहतर भूमिकाएं मिल रही हैं और वह अपने करियर के इस दौर का आनंद ले रही हैं।

इस तरह भोजपुरी सिनेमा से उनकी दूरी किसी एक फैसले का परिणाम नहीं बल्कि काम के बदलते अवसरों से जुड़ी दिखाई देती है।

रीजनल सिनेमा की बढ़ती ताकत पर भी बोलीं मोनालिसा

भोजपुरी इंडस्ट्री की छवि पर बात करते हुए मोनालिसा ने भारतीय क्षेत्रीय सिनेमा के तेजी से बढ़ते प्रभाव का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि देश में लगभग हर क्षेत्रीय फिल्म उद्योग आगे बढ़ रहा है और रीजनल सिनेमा की पहुंच तेजी से बढ़ी है।

हालांकि उनका मानना है कि इस मामले में भोजपुरी सिनेमा कुछ हद तक देर से आगे बढ़ा। उन्होंने दक्षिण भारतीय और बंगाली सिनेमा का उदाहरण देते हुए कहा कि ये फिल्म उद्योग कई क्षेत्रों में लंबे समय से आगे रहे हैं।

पिछले कुछ वर्षों में क्षेत्रीय भाषाओं की फिल्मों ने राष्ट्रीय दर्शकों तक पहुंचने की अपनी क्षमता लगातार दिखाई है। मोनालिसा इसी बदलते माहौल को भोजपुरी कलाकारों के लिए भी सकारात्मक अवसर के रूप में देखती हैं।

उनका अपना करियर भी इस बदलाव का उदाहरण है। भोजपुरी पृष्ठभूमि से आने के बावजूद उन्होंने हिंदी टीवी, रियलिटी शो और दक्षिण भारतीय फिल्मों में काम किया। उन्होंने कहा कि क्षेत्रीय क्षेत्र से आने वाले कलाकार पहले से ही राष्ट्रीय पहचान हासिल करने की कोशिश करते रहे हैं और अब परिस्थितियां तेजी से बदल रही हैं।

‘बिग बॉस’ और ‘नच बलिए’ से राष्ट्रीय पहचान तक

मोनालिसा ने अपनी बात रखते हुए अपने उस दौर को भी याद किया जब क्षेत्रीय कलाकारों के लिए राष्ट्रीय स्तर पर पहचान बनाना आज की तुलना में अधिक चुनौतीपूर्ण माना जाता था।

उन्होंने बताया कि लगभग एक दशक पहले वह राष्ट्रीय टेलीविजन पर काम करने लगी थीं। ‘बिग बॉस’ और ‘नच बलिए’ जैसे रियलिटी शो के अलावा उन्होंने अलग-अलग टीवी सीरियल और दक्षिण भारतीय फिल्मों में भी काम किया। उनका कहना है कि क्षेत्रीय पृष्ठभूमि से आने के बावजूद कलाकार लंबे समय से बड़े दर्शक वर्ग तक पहुंचने की कोशिश करते रहे हैं।

यही अनुभव शायद भोजपुरी सिनेमा को लेकर उनके मौजूदा रुख को भी प्रभावित करता है। एक ऐसे कलाकार के रूप में जिसने क्षेत्रीय और राष्ट्रीय दोनों मनोरंजन बाजारों में काम किया है, वह भोजपुरी इंडस्ट्री पर लगने वाले एकतरफा लेबल का विरोध करती हैं, लेकिन साथ ही उसके भीतर मौजूद समस्याओं को पूरी तरह नकारती भी नहीं हैं।

अप्रैल से अगस्त 2026 तक मोनालिसा के बयानों का समयक्रम

समयप्रमुख टिप्पणी
अप्रैल 2026कुछ भोजपुरी एल्बमों में डबल मीनिंग गानों से इंडस्ट्री की छवि खराब होने की बात कही
अप्रैल 2026ऐसे गाने न बनाने और उन्हें बेहतर तरीके से फिल्माने की जरूरत बताई
अप्रैल 2026अपने अनुभव के आधार पर अभिनेत्रियों की कम फीस का मुद्दा उठाया
28 अगस्त 2026कहा कि उन्होंने भोजपुरी फिल्में छोड़ी नहीं हैं; अच्छा किरदार मिलने पर वापसी करेंगी
28 अगस्त 2026बताया कि उनकी पिछली भोजपुरी फिल्म 2017 में थी और अब वेब/वर्टिकल कंटेंट में काम कर रही हैं
30 अगस्त 2026कहा कि वायरल म्यूजिक वीडियो देखकर पूरी भोजपुरी फिल्म इंडस्ट्री को अश्लील कहना गलत है
30 अगस्त 2026क्षेत्रीय सिनेमा की तेज ग्रोथ और भोजपुरी के राष्ट्रीय स्तर पर आगे बढ़ने पर बात की

मोनालिसा के बयान में बचाव भी, आत्मालोचना भी

मोनालिसा की टिप्पणियों को केवल ‘भोजपुरी सिनेमा के बचाव’ के रूप में पढ़ना अधूरा होगा। वह दो अलग बातें एक साथ रखती हैं।

पहली, कुछ विवादित या डबल मीनिंग म्यूजिक वीडियो के आधार पर भोजपुरी फिल्मों के हर कलाकार, निर्माता और कहानी को एक ही नजर से नहीं देखा जाना चाहिए।

दूसरी, यदि किसी खास तरह के गाने, बोल या फिल्मांकन से इंडस्ट्री की छवि खराब हो रही है, तो कंटेंट बनाने वालों को उसे बदलने की जिम्मेदारी भी लेनी चाहिए।

यही वजह है कि अप्रैल में वह डबल मीनिंग गानों को बंद करने की जरूरत बताती हैं और अगस्त में कहती हैं कि उन्हीं गानों के कारण पूरी भोजपुरी फिल्म इंडस्ट्री को अश्लील बताना सही नहीं है। दोनों बातें विरोधाभासी होने के बजाय एक ही तर्क के दो हिस्से हैं।

भोजपुरी सिनेमा की छवि पर फिर तेज हुई चर्चा

मोनालिसा के बयान ने एक बार फिर भोजपुरी सिनेमा की सार्वजनिक छवि और वास्तविक फिल्म निर्माण के बीच अंतर पर चर्चा शुरू कर दी है। इंटरनेट के दौर में किसी इंडस्ट्री की पहचान उसकी फिल्मों के साथ-साथ सबसे ज्यादा वायरल होने वाले वीडियो से भी बनती है। भोजपुरी मनोरंजन के मामले में यही स्थिति लंबे समय से बहस का विषय रही है।

मोनालिसा का संदेश इस बहस को एक सीधी दिशा देता है—खराब कंटेंट की आलोचना कीजिए, लेकिन पूरी इंडस्ट्री को बिना देखे खारिज मत कीजिए।

वह भोजपुरी सिनेमा के भीतर बदलाव की जरूरत को स्वीकार करती हैं, डबल मीनिंग गानों से दूरी की वकालत करती हैं और बेहतर फिल्मांकन तथा अच्छे संगीत की बात करती हैं। दूसरी तरफ, वह उन कलाकारों और फिल्मों का बचाव भी करती हैं जिनकी मेहनत कुछ वायरल वीडियो की छवि के पीछे दब जाती है।

अपने करियर में भोजपुरी फिल्मों, रियलिटी टीवी, हिंदी धारावाहिकों, दक्षिण भारतीय फिल्मों और अब वेब तथा वर्टिकल कंटेंट तक पहुंच चुकी मोनालिसा के लिए यह बहस केवल किसी एक इंडस्ट्री की प्रतिष्ठा का सवाल नहीं है। उनके बयानों से यह संदेश निकलता है कि क्षेत्रीय कलाकारों और क्षेत्रीय सिनेमा को उनके पूरे काम के आधार पर देखा जाना चाहिए, न कि सबसे ज्यादा वायरल होने वाले कुछ उदाहरणों के आधार पर।

फिलहाल मोनालिसा हिंदी टीवी और नए डिजिटल फॉर्मेट में सक्रिय हैं, लेकिन भोजपुरी फिल्मों में वापसी का रास्ता उन्होंने बंद नहीं किया है। उनका कहना है कि अच्छा और चुनौतीपूर्ण किरदार मिलने पर वह फिर भोजपुरी सिनेमा में काम करना चाहेंगी। ऐसे में भोजपुरी इंडस्ट्री पर उनकी हालिया टिप्पणियां आलोचना, बचाव और बदलाव—तीनों को साथ लेकर चलती दिखाई देती हैं।

  • समाचार संपादन, ब्रेकिंग अलर्ट और फैक्ट-चेक पर फ़ोकस। ज़मीनी रिपोर्टों को डेटा के साथ जोड़ना पसंद। कॉफ़ी, डेडलाइन और सत्य , तीनों से समझौता नहीं।

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