CM मोहन यादव की कैबिनेट ने 47,990 करोड़ के प्रस्ताव मंजूर किए। स्वास्थ्य, सड़क, महिला सशक्तिकरण, किसान और शिक्षा से जुड़े कई बड़े फैसले हुए।
भोपाल। मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में 11 अगस्त को हुई कैबिनेट बैठक में जनकल्याण और प्रदेश के विकास से जुड़े कई महत्वपूर्ण प्रस्तावों को मंजूरी दी गई। सरकार ने स्वास्थ्य, सड़क, कृषि, महिला सशक्तिकरण, वन प्रबंधन और उच्च शिक्षा सहित कई क्षेत्रों के लिए बड़े वित्तीय प्रावधान किए हैं।
कैबिनेट ने प्रदेश के सर्वांगीण विकास, जन-स्वास्थ्य को मजबूत करने, बुनियादी ढांचे का विस्तार करने और महिलाओं को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से कुल 47 हजार 990 करोड़ रुपये के प्रस्तावों को स्वीकृति दी। इसमें राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के लिए 28,083.47 करोड़ रुपये और आयुष्मान भारत योजना के लिए 12 हजार 123 करोड़ 81 लाख रुपये शामिल हैं।
MP Cabinet Decision: भोपाल-विदिशा 4 लेन सड़क के लिए 1,757 करोड़ मंजूर
भोपाल को मेट्रो-पोलिटिन सिटी के तौर पर विकसित करने की दिशा में भी कैबिनेट ने अहम फैसला लिया। केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय के हाईब्रिड एन्यूटी मॉडल (HAM) के लिए तैयार मॉडल कंसेशन एग्रीमेंट के आधार पर भोपाल-विदिशा मार्ग के 44.830 किलोमीटर हिस्से को 4 लेन, मय पेव्हड शोल्डर बनाने के लिए 1,757 करोड़ 55 लाख रुपये की मंजूरी दी गई है। सरकार का मानना है कि इस परियोजना से औद्योगिक निवेश को बढ़ावा मिलेगा और क्षेत्र में अधोसंरचना भी मजबूत होगी।
परियोजना की कुल निर्माण लागत का 40 प्रतिशत हिस्सा हाईब्रिड एन्यूटी मॉडल (एच.ए.एम) के तहत मध्यप्रदेश सड़क विकास निगम द्वारा राज्य राजमार्ग निधि से परियोजना के क्रियान्वयन के दौरान जीएसटी सहित वहन किया जाएगा। बाकी 60 प्रतिशत राशि का भुगतान संचालन अवधि के दौरान 15 वर्षों तक छमाही एन्यूटी के रूप में राज्य बजट से किया जाएगा।
इसके अलावा निर्माण से पहले किए जाने वाले काम, जिनमें भू-अर्जन और अन्य कार्य शामिल हैं, तथा सुपरविजन चार्जेस के लिए 364 करोड़ 41 लाख रुपये का भुगतान भी राज्य बजट से किया जाएगा।
भोपाल-विदिशा (राज्यमार्ग-28) मार्ग अयोध्या बाईपास के भानपुर टी-जंक्शन से शुरू होकर राष्ट्रीय राजमार्ग क्रमांक-146 पर सांची-सलामतपुर जंक्शन तक जाता है। यह सड़क भानपुर, चोपड़ाकला, सूखी सेवनिया, डोब, बालमपुर, दीवानगंज और सलामतपुर से होकर गुजरती है और भोपाल तथा विदिशा जिलों को जोड़ती है।
रायसेन जिले में स्थित सांची स्तूप दुनिया के प्रमुख बौद्ध तीर्थस्थलों में शामिल है और यूनेस्को का विश्व धरोहर स्थल भी है। इसी भोपाल-विदिशा मार्ग के किलोमीटर 24.550 से कर्क रेखा भी गुजरती है। इस लिहाज से यह सड़क भौगोलिक और पर्यटन दोनों दृष्टि से महत्वपूर्ण है।
Bhopal Bypass: 2031 तक टोल वसूली को कैबिनेट की मंजूरी
कैबिनेट ने भोपाल बायपास 4-लेन सड़क को 6-लेन में बदलने की योजना को ध्यान में रखते हुए 51.963 किलोमीटर लंबे मार्ग पर 19 जुलाई 2026 से 31 दिसंबर 2031 तक उपयोगकर्ता शुल्क यानी टोल वसूली की अनुमति दी है। इसके साथ ही इस अवधि को आगे पांच साल तक बढ़ाने के लिए लोक निर्माण विभाग को अधिकृत किया गया है। भोपाल बायपास पर उपयोगकर्ता शुल्क की व्यवस्था पहले जारी अधिसूचना के प्रावधानों के अनुसार ही लागू रहेगी। टोल वसूली का काम मध्यप्रदेश सड़क विकास निगम लिमिटेड या निगम की ओर से चुनी गई संग्रहण एजेंसी के माध्यम से कराया जाएगा।
भोपाल बायपास 4-लेन सड़क भोपाल शहर को इंदौर, रायसेन, विदिशा और नर्मदापुरम् जिलों से जोड़ती है। इससे भोपाल शहर के भीतर यातायात का दबाव कम होता है और यात्रियों को सुगम तथा निर्बाध आवागमन की सुविधा मिलती है। सड़क का नियमित संचालन, अनुरक्षण और रख-रखाव मध्यप्रदेश सड़क विकास निगम करता है।
टोल से मिलने वाली राशि मध्यप्रदेश राजमार्ग निधि अधिनियम 2012 के तहत गठित राज्य राजमार्ग निधि में जमा होती है। इस राशि का इस्तेमाल निगम द्वारा राज्य की सड़कों के विकास, रख-रखाव और दूसरे जरूरी कामों में किया जाता है।
Joint Forest Management: अब श्रमिकों के साथ स्थानीय रहवासियों को भी मिलेगा लाभांश
वन विभाग से जुड़े एक अहम प्रस्ताव को भी कैबिनेट ने मंजूरी दी। संयुक्त वन प्रबंधन समितियों को लाभांश देने वाली योजना को 2026-27 से 2030-31 तक जारी रखने के लिए 918 करोड़ रुपये की स्वीकृति दी गई है। इस योजना का मकसद संयुक्त वन प्रबंधन के तहत जंगलों के संरक्षण और संवर्द्धन में स्थानीय लोगों की भागीदारी बढ़ाना है। प्रदेश में संयुक्त वन प्रबंधन समितियां पहले से ही वन विभाग के साथ मिलकर वनों के संरक्षण और विकास में सहयोग कर रही हैं।
नियमों के अनुसार काष्ठ के अंतिम पातन से मिलने वाली लकड़ी की बिक्री से प्राप्त राजस्व का 20 प्रतिशत हिस्सा संयुक्त वन प्रबंधन समिति को दिया जाता है। वहीं, बांस के विदोहन से प्राप्त शुद्ध लाभ की पूरी राशि कटाई के काम में लगे श्रमिकों को दी जाती है। अब इस व्यवस्था में एक और बदलाव किया गया है। योजना के तहत श्रमिकों के साथ-साथ समिति से जुड़े क्षेत्रों में रहने वाले स्थानीय रहवासियों को भी लाभांश दिया जाएगा।
Women Empowerment: रानी दुर्गावती और रानी अवंती बाई पुरस्कार की राशि बढ़ी
महिला सशक्तिकरण को लेकर भी कैबिनेट ने महत्वपूर्ण फैसला किया है। कठिन परिस्थितियों के बावजूद समाज सेवा के क्षेत्र में काम करने वाली महिला को हर साल दिए जाने वाले राज्य स्तरीय रानी दुर्गावती पुरस्कार की राशि बढ़ाकर 2 लाख रुपये करने को मंजूरी दी गई है। इसके साथ ही वर्ष 2006 से दिए जा रहे रानी अवंती बाई राज्य स्तरीय वीरता पुरस्कार की राशि भी 1 लाख रुपये से बढ़ाकर 2 लाख रुपये कर दी गई है।
इन पुरस्कारों का उद्देश्य उन महिलाओं के काम को पहचान और प्रोत्साहन देना है, जो बेहद कठिन परिस्थितियों में भी समाज सेवा का काम कर रही हैं। इनमें अत्यंत गरीब महिलाएं, 40 प्रतिशत से अधिक दिव्यांग एकल महिलाएं, गंभीर बीमारी से जूझ रही महिलाएं तथा एसिड अटैक, दहेज, घरेलू हिंसा या किसी अन्य विपरीत परिस्थिति का सामना करते हुए समाज सेवा में सक्रिय महिलाएं शामिल हैं।
सरकार को उम्मीद है कि इन महिलाओं के योगदान को सम्मान मिलने से दूसरी महिलाएं भी प्रेरित होंगी और महिलाओं तथा बच्चों से जुड़े सामाजिक कार्यों में आगे आएंगी।
फिलहाल महिला एवं बाल विकास विभाग की ओर से कुल छह पुरस्कार दिए जा रहे हैं। इनमें रानी अवंती बाई राज्य स्तरीय वीरता पुरस्कार, राजमाता विजयाराजे सिंधिया समाज सेवा पुरस्कार, श्री विष्णु कुमार महिला बाल कल्याण समाज सेवा सम्मान पुरस्कार, मुख्यमंत्री नारी सम्मान रक्षा पुरस्कार, अरुणा शानबाग वीरता पुरस्कार और राष्ट्रमाता पद्मावती पुरस्कार शामिल हैं।
Soybean Farmers: सीहोर में नेशनल सोयाबीन रिसर्च इंस्टीट्यूट के लिए 20 हेक्टेयर जमीन
किसान वर्ष के दौरान सोयाबीन किसानों के लिए भी कैबिनेट ने एक बड़ी सौगात दी है। भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद, भारत सरकार के अंतर्गत गठित नेशनल सोयाबीन रिसर्च इंस्टीट्यूट के लिए सीहोर जिले की इछावर तहसील के ग्राम भाऊखेड़ी में 20 हेक्टेयर जमीन स्थायी पट्टे पर देने का फैसला किया गया है।
भारतीय कृषि अनुसंधान के राष्ट्रीय सोयाबीन अनुसंधान संस्थान (ICMR-NSRI) भारत सरकार के कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय के अधीन एक स्वायत्त निकाय है, जिसे केंद्र सरकार पूरी तरह वित्त पोषित करती है। यह संस्थान सोयाबीन के अनुसंधान और विकास से देश के करीब 50 लाख सोयाबीन किसानों को प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से प्रभावित करता है। प्रस्तावित जमीन का इस्तेमाल पूरी तरह कृषि विज्ञान केंद्र स्थापित करने के लिए किया जाएगा।
इस केंद्र के बनने से मध्यप्रदेश में सोयाबीन की खेती, अनुसंधान और उससे जुड़ी गतिविधियों को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।
Health Budget: राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन और आयुष्मान भारत के लिए 44,515 करोड़
कैबिनेट ने लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा विभाग से जुड़ी कई योजनाओं को अगले पांच वर्षों तक जारी रखने के लिए बड़ा बजट मंजूर किया है। राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन, आयुष्मान भारत-प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना, आयुष्मान भारत (नॉन एस.ई.सी.सी. हितग्राही), बहुउद्देशीय रोग नियंत्रण कार्यक्रम, स्वास्थ्य संस्थाओं की सुरक्षा एवं सफाई व्यवस्था और जिला स्तरीय अमले से संबंधित योजनाओं के लिए 1 अप्रैल 2026 से 31 मार्च 2031 तक कुल 44 हजार 515.13 करोड़ रुपये की स्वीकृति दी गई है।
इसमें अकेले राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के लिए 28,083.47 करोड़ रुपये मंजूर किए गए हैं। राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन केंद्र सरकार के साथ 60:40 के अनुपात में संचालित होने वाली केंद्र प्रवर्तित योजना है।
इसके तहत मातृ स्वास्थ्य, शिशु स्वास्थ्य, परिवार कल्याण, टीकाकरण, टीबी उन्मूलन, शिशु स्वास्थ्य पोषण, सिकल सेल, किशोर स्वास्थ्य, आयुष्मान आरोग्य मंदिर, गैर-संचारी रोगों से जुड़े कार्यक्रम, अंधत्व निवारण, कुष्ठ उन्मूलन, प्रधानमंत्री डायलिसिस सेवा, मुफ्त दवा और जांच सहित कई स्वास्थ्य कार्यक्रम चलाए जाते हैं।
Ayushman Bharat: गरीब और कमजोर वर्ग को स्वास्थ्य सुरक्षा
कैबिनेट ने आयुष्मान भारत-प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना और आयुष्मान भारत (नॉन एस.ई.सी.सी. हितग्राही) के संचालन के लिए 12 हजार 123 करोड़ 81 लाख रुपये मंजूर किए हैं। इस योजना का उद्देश्य गरीब और कमजोर वर्ग के लोगों को गंभीर बीमारियों के इलाज के दौरान आर्थिक सुरक्षा देना है। स्वास्थ्य पर होने वाले बड़े खर्च के कारण परिवारों पर पड़ने वाले आर्थिक बोझ को कम करना और सरकारी तथा सूचीबद्ध निजी अस्पतालों में गुणवत्तापूर्ण कैशलेस इलाज उपलब्ध कराना इसका प्रमुख आधार है।
सार्वभौमिक स्वास्थ्य कवरेज के लक्ष्य को हासिल करना, इलाज तक आसान पहुंच बनाना और सामाजिक सुरक्षा को मजबूत करना भी योजना के प्रमुख उद्देश्यों में शामिल है। इसके अलावा स्वास्थ्य संस्थाओं की सुरक्षा और सफाई व्यवस्था के लिए 1,159 करोड़ 58 लाख रुपये तथा जिला स्तरीय अमला योजना के लिए 654 करोड़ 84 लाख रुपये स्वीकृत किए गए हैं। जिला स्तरीय अमला योजना करीब 40 से 50 वर्षों से संचालित है।
Agriculture University: JNKVV के लिए 795 करोड़ रुपये मंजूर
कृषि शिक्षा और अनुसंधान को जारी रखने के लिए कैबिनेट ने जवाहरलाल नेहरू कृषि विश्वविद्यालय (JNKVV) को भी वित्तीय सहायता दी है। विश्वविद्यालय में वेतन, भत्तों और मानदेय आदि के लिए ब्लॉक ग्रांट योजना को वित्तीय वर्ष 2026-27 से 2030-31 तक अगले पांच वर्षों के लिए जारी रखने के लिए 795 करोड़ 59 लाख रुपये की मंजूरी दी गई है।
फिलहाल विश्वविद्यालय के अधीन 11 महाविद्यालय और 8 अनुसंधान केंद्र संचालित हैं। इनके जरिए कृषि शिक्षा, अनुसंधान और कृषि विस्तार से जुड़ी गतिविधियां चलाई जाती हैं।
विश्वविद्यालय में काम कर रहे अधिकारियों, वैज्ञानिकों और कर्मचारियों के अलावा करीब 500 ओल्ड पेंशनरों के वेतन, भत्ते, मानदेय और पेंशन से जुड़े वित्तीय दायित्व भी राज्य सरकार ब्लॉक ग्रांट के जरिए पूरा करती है। इसके अलावा संस्थानों के जरूरी प्रशासनिक और आकस्मिक खर्च भी इसी माध्यम से पूरे किए जाते हैं।
Mineral Department: सरकारी परिसंपत्तियों के रख-रखाव के लिए 2.50 करोड़
खनिज साधन विभाग की विभागीय परिसंपत्तियों के रख-रखाव से जुड़ी योजना को भी कैबिनेट ने जारी रखने की मंजूरी दी है। 2026-27 से 2030-31 तक इस योजना के संचालन के लिए 2 करोड़ 50 लाख रुपये स्वीकृत किए गए हैं। खनिज साधन विभाग के अंतर्गत कुल 54 खनिज भवन हैं। इनमें से कई भवनों को बने हुए 10 साल से ज्यादा समय हो चुका है। इसलिए योजना के तहत इन भवनों की मरम्मत और जरूरी संधारण का काम लगातार कराया जा रहा है।
Dewas Fire Incident: पटाखा फैक्ट्री अग्निकांड की न्यायिक जांच तीन महीने बढ़ी
कैबिनेट ने देवास जिले के टोंककला में 14 मई 2026 को हुई पटाखा फैक्ट्री की दुखद आग दुर्घटना की न्यायिक जांच से जुड़े फैसले का भी अनुसमर्थन किया। इस मामले की जांच के लिए जबलपुर हाईकोर्ट के सेवानिवृत्त न्यायमूर्ति सुभाष काकड़े की अध्यक्षता में एक सदस्यीय न्यायिक जांच आयोग गठित किया गया था। कैबिनेट ने आयोग के कार्यकाल को तीन महीने बढ़ाकर 14 अगस्त 2026 तक किए जाने से संबंधित जारी अधिसूचना का अनुसमर्थन किया।
MPPSC Reports: लोक सेवा आयोग की वार्षिक रिपोर्ट विधानसभा में रखने को मंजूरी
मंत्रि-परिषद ने मध्यप्रदेश लोक सेवा आयोग (MPPSC) के 63वें, 64वें और 68वें वार्षिक प्रतिवेदन को विधानसभा के पटल पर रखने की मंजूरी दी है। इसके साथ ही उन मामलों से जुड़े ज्ञापन को भी विधानसभा में प्रस्तुत करने का अनुमोदन किया गया है, जिनमें आयोग की सलाह को स्वीकार नहीं किया गया है।