NEET में पेपर लीक कैसे रुकेगा? नंदन नीलेकणि ने बताया प्रश्नपत्र तैयार करने का नया तरीका

Published on 13 अक्टू॰ 2026

Nandan Nilekani NEET Paper Leak: नीट पेपर लीक विवाद के बाद नेशनल टेस्टिंग एजेंसी में बड़े बदलाव की तैयारी शुरू हो चुकी है. हाई पावर कमेटी के प्रमुख नंदन नीलेकणि ने कहा कि एक प्रश्न पत्र होने से लीक का खतरा बढ़ता है.

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Nandan Nilekani NEET Paper Leak: नीट पेपर लीक विवाद के बाद नेशनल टेस्टिंग एजेंसी में बड़े बदलाव की तैयारी शुरू हो चुकी है. हाई पावर कमेटी के प्रमुख नंदन नीलेकणि ने कहा कि एक प्रश्न पत्र होने से लीक का खतरा बढ़ता है.

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nandan nilekani Photograph: (ANI)

Nandan Nilekani NEET Paper Leak: देश भर में प्रतियोगी परीक्षाओं की साख पर उठे सवालों के बीच अब परीक्षा प्रणाली को पूरी तरह बदलने की तैयारी शुरू हो गई है. नीट परीक्षा में गड़बड़ी और पेपर लीक के मामलों के बाद केंद्र सरकार ने नेशनल टेस्टिंग एजेंसी के कामकाज में सुधार के लिए एक विशेष हाई पावर कमेटी बनाई थी. इस उच्च स्तरीय समिति के अध्यक्ष और इंफोसिस के सह संस्थापक नंदन नीलेकणि ने अब साफ कर दिया है कि भविष्य में परीक्षाओं को किस तरह सुरक्षित बनाया जाएगा. उन्होंने एक बातचीत के दौरान खुलकर बताया कि पुराने ढर्रे को बदलकर तकनीक के सहारे कैसे पेपर माफिया की कमर तोड़ी जा सकती है. उनके मुताबिक मौजूदा समय में व्यवस्था के अंदर बदलाव करना सबसे बड़ी जरूरत बन चुका है ताकि लाखों होनहार छात्रों का भरोसा दोबारा कायम हो सके.

एक ही पर्चे पर निर्भरता खत्म करने का सुझाव

नंदन नीलेकणि का मानना है कि परीक्षा लीक होने की सबसे बड़ी जड़ एक ही तरह का पारंपरिक प्रश्न पत्र होना है. जब पूरे देश के लिए पहले से एक तय पर्चा छपकर तैयार रहता है, तब उसे चुराने, बेचने और आर्थिक लाभ कमाने की आशंका सबसे ज्यादा बढ़ जाती है. इसी खतरे से निपटने के लिए उन्होंने सुझाव दिया है कि हमारे पास सवालों का एक बहुत बड़ा बैंक होना चाहिए. इसमें हजारों तरह के प्रश्न सुरक्षित रखे जाएं. इसके बाद परीक्षा शुरू होने के ठीक पहले आखिरी मिनट पर कंप्यूटर प्रणाली से रैंडम तरीके से पर्चा तैयार किया जाना चाहिए. अगर पर्चा परीक्षा वाले दिन चंद मिनट पहले ही बनकर सामने आएगा, तो किसी के पास उसे लीक करने या बाजार में बेचने का समय ही नहीं बचेगा. इससे पेपर बेचने का लालच पूरी तरह खत्म हो जाएगा.

कंप्यूटर आधारित परीक्षा के लिए ढांचे का विस्तार

नीट जैसी विशाल स्तर की परीक्षा को कंप्यूटर आधारित यानी सीबीटी मोड में कराने की मांग भी लगातार उठती रही है. इस मुद्दे पर बात करते हुए समिति प्रमुख ने जमीनी हकीकत और आगे की योजना दोनों पर रोशनी डाली. उन्होंने बताया कि पूरे देश में ऑनलाइन परीक्षा सफलतापूर्वक कराने के लिए एक मजबूत और व्यापक सेंटर नेटवर्क का होना अनिवार्य है. वर्तमान में देश भर में करीब एक लाख पचास हजार ऐसे परीक्षा स्थल उपलब्ध हैं, जहां बैठकर छात्र सुरक्षित ढंग से ऑनलाइन टेस्ट दे सकते हैं. हालांकि देश के दूरदराज के इलाकों और लाखों परीक्षार्थियों की तादाद को देखते हुए इस संख्या को और अधिक बढ़ाने की सख्त जरूरत है. केंद्रों का दायरा बढ़ने के बाद ही हर छात्र के लिए बिना किसी रुकावट के कंप्यूटर आधारित परीक्षा देना आसान हो पाएगा.

प्रधानमंत्री के स्तर पर सुधारों को लेकर गंभीरता

परीक्षा सुधारों को केवल कागजों तक सीमित न रखकर जमीन पर उतारने के प्रति सरकार पूरी तरह प्रतिबद्ध दिखाई दे रही है. नंदन नीलेकणि ने भरोसा जताया कि यह पूरी समस्या मौजूदा सिस्टम की कमियों से जुड़ी हुई है, जिसे तकनीक और सख्त नियमों के जरिए पूरी तरह ठीक किया जा सकता है. उन्होंने इस बात पर विशेष जोर दिया कि प्रधानमंत्री स्वयं इन सिफारिशों और कड़े कदमों को लागू करने के लिए बेहद गंभीर हैं. कमेटी अपनी विस्तृत रिपोर्ट में हर उस पहलू को शामिल करेगी, जिससे परीक्षा केंद्रों के प्रबंधन, प्रश्न पत्र वितरण और मूल्यांकन प्रक्रिया को पूरी तरह पारदर्शी बनाया जा सके. सरकार की इस गंभीरता से साफ है कि आने वाले समय में राष्ट्रीय स्तर की परीक्षाओं का पूरा प्रारूप काफी बदल जाएगा.

अनुभवी दिग्गजों की टीम के जिम्मे बड़ा काम

इस हाई पावर कमेटी में केवल प्रशासनिक अधिकारी ही नहीं, बल्कि देश के कई जाने-माने विशेषज्ञ शामिल हैं. नंदन नीलेकणि के नेतृत्व वाली इस टीम में भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन के पूर्व प्रमुख एस सोमनाथ, पूर्व आईबी निदेशक तपन डेका और पूर्व शिक्षा सचिव अनीता करवाल जैसी हस्तियां मौजूद हैं. इसके साथ ही लॉजिस्टिक क्षेत्र के विशेषज्ञ अमृत लाल मीणा और आईआईटी मद्रास के निदेशक वी कामकोटी भी इस महत्वपूर्ण सुधार दल का हिस्सा हैं. तकनीक, सुरक्षा, शिक्षा और परिवहन जैसे अलग-अलग क्षेत्रों के इन बड़े जानकारों को देश की तमाम महत्वपूर्ण प्रतियोगी परीक्षाओं के पैटर्न को आधुनिक, फूलप्रूफ और सुरक्षित बनाने का अहम दायित्व सौंपा गया है.

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