MBBS NRI Quota Admission 2026: नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) ने बीते दिनों नेशनल एलिजिबिलिटी कम एंट्रेंस टेस्ट (NEET) UG 2026 का जारी कर दिया है. इसमें सफल हुए कैंडिडेट्स अब MBBS में एडमिशन का इंतजार कर रहे हैं. माना जा रहा है कि जल्द ही MBBS व BDS में एडमिशन के लिए ऑल इंडिया व स्टेट कोटा काउंसलिंग शुरू हो जाएंगी, जिसमें नीट यूजी 2026 स्काेर के आधार पर सफल कैंडिडेट्स को सरकारी व प्राइवेट मेडिकल कॉलेजों में MBBS की सीटें आवंटित होंगी. कुल जमा MBBS सीट पाने के लिए प्रतिस्पर्द्धा बहुत है, जिसमें नीट यूजी 2026 में बेहतर स्कोर पाने वाले कैंडिडेट्स ही सफल हो पाते हैं, लेकिन अगर किसी कैंडिडेट ने नीट यूजी 2026 में कम स्कोर किया है तो भी वह MBBS में एडमिशन ले सकता है, इसके लिए नॉन रेजिडेंट इंडियन (NRI) कोटे से आवेदन किया जा सकता है. इसके लिए कैंडिडेडेट्स के चाचा समेत दूसरे रिश्तेदार विदेश में होने चाहिए.
आइए, इस कड़ी में MBBS एडमिशन के NRI कोटे के बारे में विस्तार से बात करते हैं. जानते हैं कि NRI कोटे से कैसे MBBS में एडमिशन लिया जा सकता है. इसमें सुप्रीम कोर्ट की तरफ से किए गए बदलाव के बारे में जानते हैं.
NRI कोटे से एडमिशन को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने तय किए मानक
शैक्षणिक वर्ष 2026-2027 में MBBS की सीटों में एडमिशन के लिए NRI कोटे के तहत आवेदन करने वाले कैंडिडेट्स के लिए सुप्रीम कोर्ट मानको में बदलाव किया है, जिसके तहत NRI कोटे के तहत MBBS की आरक्षित सीटों के लिए नए पात्रता मानदंड तय किए हैं. आइए जानते हैं कि कौन कैंडिडेट्स NRI कोटे के तहत MBBS की आरक्षित सीटों में एडमिशन के लिए आवेदन कर सकते हैं. साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने NRI कोटे से एडमिशन के लिए परिभाषा में भी बदली है, जिसके तहत क्लॉज 3 की व्याख्या सीमित न करके व्यापक की गई है.
- अगर कैंडिडेट्स के माता या पिता NRI हैं और आम तौर पर विदेश में रहते हैं.
- अगर कैंडिडेट्स का कोई करीबी रिश्तेदार (first-degree relation) NRI है और आम तौर पर विदेश में रहता है.
- कैंडिडेट्स का सबसे करीबी रिश्तेदार विदेश में रहता हो. करीबी रिश्तेदार मेंखून के रिश्ते वाले इन रिश्तेदारों को शामिल किया है.
- कैंडिडेट्स के चाचा/ताऊ और बुआ विदेश में रहते हों.
- कैंडिडेट्स के मामा या माैसी विदेश में रहते हों.
- कैंडिडेट्स के दादाऔर दादी विदेश में रहते हों.
- कैंडिडेट्स के नाना और नानी विदेश में रहते हों.
- कैंडिडेट्स के पिता और मां की तरफ के चचेरे/ममेरे/फुफेरे/मौसेरे भाई-बहन विदेश में रहते हों.
- कैंडिडेट्स खुदNRI है.
- कैंडिडेट्स की परवरिश किसी ऐसे व्यक्ति ने की हो, जो विदेश में रहता हो.
NRI सीटों में प्राथमिकता का सिस्टम
MCC के मुताबिक अब NRI कोटें की सीटों का अलॉटमेंट एक तय प्राथमिकता सिस्टम के आधार पर होता है. इसमें पहली प्राथमिकता NRI कैंडिडेट्स और उनके बच्चे रहते हैं तो वहीं दूसरी प्राथमिकता NRI कैंडिडेट्स के करीबी रिश्तेदार होते हैं. इसमें एनआरआई के भाई-बहन, भतीजा-भतीजी या पोता-पोती शामिल हैं. सीटों का बंटवारा इसी क्रम में किया जाता है. यानी अगर पहली प्राथमिकता वाले उम्मीदवारों की सीटें भर जाती हैं तो दूसरी प्राथमिकता वालों को मौका मिलेगा.
साथ लाने होंगे ये डॉक्यूमेंट्स
कैंडिडेट्स को यह भी ध्यान रखना होगा कि कॉलेज में रिपोर्टिंग के समय सभी ओरिजिनल डॉक्यूमेंट्स, जैसे NRI सर्टिफिकेट, रिश्तेदारी का सबूत, NEET स्कोर कार्ड और अम्बेसी से मिला एफिडेविट, सही फॉर्म में जमा करना जरूरी है. अगर किसी भी डॉक्यूमेंट में कमी या फर्जीवाड़ा पाया गया, तो सीट कैंसिल की जा सकती है और कैंडिडेट्स पर कार्रवाई हो सकती है. नोटिस में बताया गया है कि कैंडिडेट्स को अंबेसी या मिशन से जारी NRI सर्टिफिकेट ही मान्य होगा. इसके अलावा, एक एफिडेविट भी जरूरी है जिसमें यह लिखा हो कि गार्जियन पूरे कोर्स की फीस भरने के लिए जिम्मेदार होगा.
प्रोविजनल लिस्ट और पारदर्शिता
एमसीसी ने यह भी साफ किया है कि लिस्ट में शामिल नाम फिलहाल प्रोविजनल हैं. यानी डॉक्यूमेंट्स की जांच के बाद ही फाइनल अलॉटमेंट होगा. ऐसे में MCC की वेबसाइट [email protected] और नोटिस पर नजर रखना होगा, ताकि किसी भी डेडलाइन या जरूरी जानकारी से चूक न हो.

मनोज भट्ट
पत्रकारिता में एक दशक से अधिक समय से सक्रिय. नवोदय टाइम्स, दैनिक जागरण, हिंदुस्तान में लंबे समय तक फील्ड रिपोर्टिंग. कई मुद्दों व खबरों को लीड किया, जो चर्चा में रही. अभी तक पंचायत, कृषि, प्राथमिक से लेकर उच्च शिक्षा, राजनीति, पर्यावरण, स्वास्थ्य, चुनाव, बिजनेस से जुड़े विषयों पर काम किया है और इनमें लेखन की दिलचस्पी है.
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