NSE प्री-ओपन ऑक्शन में बड़ा बदलाव: 7 सितंबर से बदलेंगे नियम, जानें निवेशकों पर क्या होगा असर?
Published: Saturday, September 5, 2026, 19:46 [IST]
नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) सोमवार, 7 सितंबर से प्री-ओपन ऑक्शन के नियमों में बदलाव करने जा रहा है। हालांकि, सुबह 9:00 से 9:15 बजे का टाइम स्लॉट पहले जैसा ही रहेगा, लेकिन इसके अंदर की प्रक्रिया बदल जाएगी। सुबह 9:00 से 9:05 बजे के बीच मार्केट और लिमिट दोनों तरह के ऑर्डर दिए जा सकेंगे। वहीं, 9:05 से 9:10 बजे तक सिर्फ लिमिट ऑर्डर ही स्वीकार होंगे और यह विंडो रैंडमली बंद होगी। इसके बाद 9:10 से 9:12 बजे तक ऑर्डर्स की मैचिंग होगी और फिर 9:15 बजे तक नॉर्मल ट्रेडिंग के लिए ट्रांजिशन पीरियड रहेगा। इस नए सिस्टम को समझने के लिए आज यानी शनिवार को एक मॉक सेशन आयोजित किया जा रहा है।
ऑर्डर एग्जीक्यूशन की प्राथमिकता (Priority) अब क्लोजिंग ऑक्शन सेशन की तरह ही होगी। इसमें सबसे पहले मार्केट ऑर्डर्स की आपस में मैचिंग की जाएगी। इसके बाद बचे हुए मार्केट ऑर्डर्स को लिमिट ऑर्डर्स से मैच किया जाएगा और फिर इक्विलिब्रियम प्राइस (Equilibrium Price) पर लिमिट ऑर्डर्स की मैचिंग होगी। आईपीओ (IPO) और री-लिस्टेड सिक्योरिटीज के लिए स्पेशल प्री-ओपन सेशन पहले की तरह सुबह 9:00 से 9:45 बजे तक ही चलेगा। ब्रोक्स ने 7 सितंबर से ETF प्राइस-बैंड में होने वाले बदलावों को लेकर भी सतर्क किया है। 9:05 बजे की कट-ऑफ से बचने के लिए अपने लिमिट ऑर्डर्स समय पर प्लेस करें।

T+0 बनाम T+1 बनाम BTST: टाइमिंग, प्राइस बैंड और कैश फ्लो को समझें
T+0 सेटलमेंट पूरी तरह से ऐच्छिक (Optional) है, जिसके लिए सुबह 9:15 से दोपहर 1:30 बजे तक का एक सेशन होगा। इसमें शेयर की कीमतें T+1 प्राइस के ±100 बेसिस पॉइंट्स के दायरे में ट्रेड करेंगी, जिसे हर 50 बेसिस पॉइंट्स के मूवमेंट के बाद रीकैलिब्रेट किया जाएगा। T+0 और T+1 के बीच कोई नेटिंग (Netting) नहीं होगी। T+0 के लिए एक अलग ब्लॉक-डील विंडो सुबह 8:45 से 9:00 बजे तक चलेगी। इसमें फंड्स और सिक्योरिटीज का सेटलमेंट उसी दिन पूरा हो जाता है।
| सिनेरियो (स्थिति) | मिली रकम | अनुमानित FD दर | एक दिन का ब्याज |
|---|---|---|---|
| T+0 पेआउट, उसी दिन निवेश | ₹2,00,000 | 7% | ₹384 |
| T+1 पेआउट, अगले दिन निवेश | ₹2,00,000 | 7% | ₹0 |
| T+0 पेआउट, उसी दिन निवेश | ₹10,00,000 | 7% | ₹1,918 |
| T+1 पेआउट, अगले दिन निवेश | ₹10,00,000 | 7% | ₹0 |
कैश में खरीदारी के लिए आपके पास पर्याप्त फंड होना जरूरी है; प्लेज की गई कोलैटरल (Pledge collateral) सिर्फ मार्जिन के काम आती है, सेटलमेंट पेमेंट के लिए नहीं। T+1 सिस्टम के तहत, क्लियरिंग कॉर्पोरेशन अब सेटलमेंट वाले दिन शाम 3:30 बजे तक सीधे क्लाइंट के डिमैट अकाउंट में शेयर क्रेडिट कर देता है। हालांकि, BTST (Buy Today, Sell Tomorrow) अब भी समय पर शेयर मिलने पर निर्भर करता है; डिलीवरी में किसी भी तरह की कमी नुकसान पहुंचा सकती है। इसके अलावा, प्लेज किए गए शेयरों को बेचने के लिए डिलीवरी से पहले उन्हें अनप्लेज करना होता है।
शनिवार का मॉक सेशन और ऐप रेडीनेस
आज होने वाले मॉक सेशन के दौरान लॉगिन करें और 9:05 बजे वाले स्विच को समझने के लिए पहले 9:04 बजे और फिर 9:06 बजे मार्केट ऑर्डर देकर देखें। साथ ही अपने डिफ़ॉल्ट लिमिट ऑर्डर्स, बास्केट ऑर्डर्स और अलर्ट रूल्स को जरूर वेरिफाई करें। ब्रोकर के मॉक सर्कुलर, वर्जन नोट्स और प्लेज स्टेटमेंट्स में जाकर चेक करें कि T+0 एलिजिबिलिटी शो हो रही है या नहीं। अगर एक्सचेंज ने कोई टेस्ट फैसिलिटी लिंक दिया है, तो उसका भी इस्तेमाल करें।
रिस्क और जरूरी तारीखें: डिलीवरी में कमी (Shortage) होने पर एक्सचेंज क्लोज-आउट की कीमत हाइएस्ट ट्रेड-टू-क्लोजआउट प्राइस पर तय कर सकता है या फिर यह क्लोजिंग प्राइस से कम से कम 20% ज्यादा हो सकती है। सभी सेशंस में पीक-मार्जिन स्नैपशॉट पहले की तरह लागू रहेंगे। 12 से 14 सितंबर के दौरान बाजार की छुट्टियों को ध्यान में रखकर ट्रेडिंग का प्लान बनाएं, क्योंकि सोमवार, 14 सितंबर को गणेश चतुर्थी है। इस वजह से T+1 सेटलमेंट और BTST एग्जिट एक दिन आगे खिसक जाएंगे। इसलिए अपने पास पर्याप्त कैश बफर जरूर रखें।
Story first published: Saturday, September 5, 2026, 19:46 [IST]
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