PM Modi: 17 सितंबर 1950 को जन्मे भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इस साल अपना 76वां जन्मदिन मना रहे हैं. हम उनके व्यक्तिगत जुड़ाव को देखें, तो खेल और खिलाड़ियों के प्रति उनका स्नेह सबसे अलग और अनोखा नजर आता है. पीएम मोदी के लिए खेल महज एक प्रशासनिक जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि देश के युवाओं और एथलीटों के साथ उनका एक गहरा रिश्ता है. मैदान पर जब कोई भारतीय खिलाड़ी इतिहास रचकर तिरंगा लहराता है, तो सरहद पार सबसे पहला बधाई का फोन कॉल अक्सर प्रधानमंत्री कार्यालय से ही जाता है. इतना ही नहीं, खेल में उतार-चढ़ाव के दौरान जब कोई खिलाड़ी हार से निराश होता है, तब भी एक अभिभावक की तरह उसका हाथ थामकर ढाढस बंधाने में पीएम मोदी कभी पीछे नहीं रहते.
जब सीधे मैदान से जुड़ता है पीएम का फोन कॉल
दुनिया के किसी भी कोने में जब कोई भारतीय खिलाड़ी पोडियम पर खड़ा होता है या तिरंगा लहराता है, तो उसके पास आने वाले शुरुआती बधाई संदेशों में एक फोन कॉल सीधे प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) से होता है. चाहे वह ओलंपिक हो, पैरालंपिक हो, क्रिकेट वर्ल्ड कप हो या थॉमस कप जैसी ऐतिहासिक जीत, पीएम मोदी खिलाड़ियों से सीधे फोन पर बात करते हैं.
इस बातचीत में सिर्फ औपचारिक बधाई नहीं होती, बल्कि खेल की बारीकियों और खिलाड़ी के निजी सफर पर भी चर्चा होती है. उदाहरण के लिए, जब शूटर अवनि लेखरा या भाला फेंक एथलीट सुमित अंतिल ने मेडल जीते, तो पीएम ने फोन पर उनके खेल और उनकी तकनीक की सराहना की. इस तरह के सीधे संवाद से खिलाड़ियों को यह महसूस होता है कि देश का शीर्ष नेतृत्व उनके प्रदर्शन पर लगातार नजर रख रहा है और उनकी मेहनत का सम्मान कर रहा है.
प्रदर्शन की समझ और हौसला बढ़ाना
यह फोन कॉल सिर्फ एक औपचारिकता या रस्म नहीं होती. बातचीत के दौरान पीएम मोदी अक्सर हर खिलाड़ी का नाम लेते हैं और उनके खेल की तकनीक, उनकी तैयारी और उनके संघर्ष के बारे में बात करते हैं. खेल की इस तरह की बारीक समझ और सीधी बातचीत से खिलाड़ियों का आत्मविश्वास बढ़ता है, क्योंकि उन्हें लगता है कि उनके खेल और मेहनत को करीब से देखा और समझा गया है.
हार के समय ढाढस बंधाना
एक अच्छे खेल समर्थक की पहचान सिर्फ जीत में नहीं, बल्कि हार में भी साथ खड़े रहने से होती है. टोक्यो ओलंपिक का एक वाक्या इसका बड़ा उदाहरण है, जब भारतीय महिला हॉकी टीम बेहद करीब आकर मेडल से चूक गई थी और खिलाड़ी भावुक हो गईं. तब पीएम मोदी ने फोन पर उनसे बात करके कहा था, "आप रोना बंद कीजिए, आपका पसीना बेकार नहीं गया है. आपने पूरे देश को प्रेरित किया है." यह बात दिखाती है कि वह सिर्फ मेडल जीतने पर ही नहीं, बल्कि खिलाड़ियों के मैदान पर किए गए कड़े प्रयास और उनकी मेहनत का भी उतना ही सम्मान करते हैं.
पीएम आवास पर खिलाड़ियों का स्वागत
विदेशी मैदानों पर देश का प्रतिनिधित्व करके लौटने वाले खिलाड़ियों के लिए प्रधानमंत्री आवास पर विशेष मुलाकातों का आयोजन किया जाता है. पीएम मोदी मेडल जीतने वाले एथलीटों और पूरी टीम को अपने निवास पर आमंत्रित करते हैं, जिससे खिलाड़ियों को एक बड़ा मंच और सम्मान मिलता है.
अनौपचारिक माहौल और बातचीत
इन मुलाकातों की सबसे खास बात यह होती है कि माहौल को काफी हद तक अनौपचारिक रखा जाता है, जिससे खिलाड़ी बिना किसी झिझक के अपनी बात कह पाते हैं. बातचीत के दौरान कई हल्के-फुल्के पल भी देखने को मिलते हैं, जैसे नीरज चोपड़ा के लिए चूरमा का प्रबंध करना, पीवी सिंधु के साथ आइसक्रीम खाने की बात साझा करना, या बैडमिंटन टीम को बालूशाही खिलाना. ये छोटी-छोटी बातें खिलाड़ियों को एक सहज और तनावमुक्त माहौल देती हैं.
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