Vishwakarma Puja 2026: 17 सितंबर को विश्वकर्मा पूजा के दिन दुकान और कार्यस्थल पर मशीनों-औजारों की पूजा करें। जानें पूजा की पूरी विधि और जरूरी काम।
विश्वकर्मा पूजा 2026
- Published: 17 Sep 2026, 09:35 AM IST
- Last Updated: 17 Sep 2026, 09:35 AM IST
Vishwakarma Puja 2026: भगवान विश्वकर्मा को शिल्प, निर्माण और यंत्रों का देवता माना जाता है। हर साल कन्या संक्रांति के अवसर पर विश्वकर्मा पूजा की परंपरा है। साल 2026 में 17 सितंबर, गुरुवार को विश्वकर्मा पूजा मनाई जा रही है। इस दिन दुकानों, कारखानों, वर्कशॉप और अन्य कार्यस्थलों पर भगवान विश्वकर्मा की पूजा-अर्चना की जाती है।
धार्मिक मान्यता के अनुसार, विश्वकर्मा पूजा के दिन कार्यस्थल की साफ-सफाई और यंत्रों का विधि-विधान से पूजन करना शुभ माना जाता है। कई कारोबारी इस दिन अपने व्यापार और कामकाज में सुख-समृद्धि की कामना के साथ पूजा करते हैं।
सबसे पहले दुकान और कार्यस्थल की करें सफाई
विश्वकर्मा पूजा के दिन सबसे पहले दुकान, कारखाने या कार्यस्थल की अच्छी तरह सफाई करने की परंपरा है। इसके बाद पूजा के लिए एक लकड़ी की चौकी रखें और उस पर लाल कपड़ा बिछाएं।
चौकी पर भगवान विश्वकर्मा के साथ भगवान गणेश की प्रतिमा स्थापित की जा सकती है। इसके बाद दोनों देवताओं को अक्षत, रोली, चंदन, फूल और माला अर्पित करें। धार्मिक मान्यता में भगवान गणेश को शुभ कार्यों का आरंभ करने वाला माना जाता है, जबकि भगवान विश्वकर्मा की पूजा यंत्रों और शिल्प से जुड़े कार्यों के लिए की जाती है।
मशीनों और औजारों का करें पूजन
विश्वकर्मा पूजा में मशीनों, औजारों, उपकरणों और वाहनों की पूजा का विशेष महत्व माना जाता है। दुकान या कार्यस्थल पर इस्तेमाल होने वाले सभी प्रमुख यंत्रों को साफ करके उन पर रोली और चंदन से तिलक लगाया जाता है।
इसके बाद मशीनों और औजारों पर कलावा या रक्षा सूत्र बांधने की भी परंपरा है। इस दिन कई जगहों पर मशीनों और उपकरणों का इस्तेमाल नहीं किया जाता और उन्हें आराम दिया जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, यंत्रों का पूजन उनके प्रति सम्मान और कृतज्ञता व्यक्त करने का एक तरीका है।
धूप-दीप जलाकर करें कथा और आरती
पूजा की तैयारियां पूरी होने के बाद भगवान विश्वकर्मा के सामने धूप और दीप जलाएं। इसके बाद श्रद्धा के साथ विश्वकर्मा भगवान की कथा का पाठ किया जाता है।
कथा के बाद भगवान की आरती करें और फल-मिठाई का भोग लगाएं। प्रसाद में बूंदी या बूंदी के लड्डू चढ़ाने की भी परंपरा कई स्थानों पर देखने को मिलती है। पूजा पूरी होने के बाद प्रसाद को दुकान या कार्यस्थल पर मौजूद लोगों में बांटा जाता है।
कारोबार की तरक्की के लिए क्या करें?
विश्वकर्मा पूजा का मुख्य उद्देश्य भगवान विश्वकर्मा की पूजा के साथ अपने काम, औजारों और कार्यस्थल के प्रति सम्मान व्यक्त करना माना जाता है। धार्मिक मान्यता है कि श्रद्धा और विधि-विधान से पूजा करने से कार्यस्थल पर सकारात्मक माहौल बना रहता है और भगवान विश्वकर्मा का आशीर्वाद प्राप्त होता है।
हालांकि, कारोबार में सफलता केवल धार्मिक अनुष्ठानों पर निर्भर नहीं होती। बेहतर प्रबंधन, मेहनत, गुणवत्ता और ग्राहकों के साथ अच्छा व्यवहार भी व्यापार की प्रगति में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
विश्वकर्मा पूजा पर इन बातों का रखें ध्यान
विश्वकर्मा पूजा के दिन कार्यस्थल को साफ रखना, मशीनों और औजारों की सफाई करना, पूजा के दौरान सावधानी बरतना और इस्तेमाल किए जाने वाले उपकरणों को व्यवस्थित रखना उपयोगी माना जाता है।