Ranchi : झारखंड पुलिस के डीजीपी तदाशा मिश्र की नियुक्ति के मामले में आज (17 सितंबर, गुरुवार) सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई होगी. मामले को आज के लिए लिस्ट किया गया है. हालांकि इससे पहले 15 सितंबर व 22 सितंबर को सुनवाई संभावित थी.
उल्लेखनीय है कि इससे पहले हुए सुनवाई के दौरान Amicus Curiae ने डीजीपी तदाशा मिश्र की नियुक्ति पर अपनी राय अदालत को सौंप दी थी. झारखंड सरकार को भी कोर्ट के निर्देश पर उसकी प्रति दे दी गई थी.
Amicus Curiae ने झारखंड में डीजीपी नियुक्ति नियमावली की दो धाराओं को सुप्रीम कोर्ट के दिशा निर्देश के ख़िलाफ़ बताया है. इसमें नियमावली की धारा-5 और धारा-10(1)(d) शामिल है. शेष धाराओं पर उन्होंने किसी तरह की आपत्ति नहीं जतायी है.
ज्ञात हो कि झारखंड DGPनियुक्ति नियमावली में कुल 10 धाराएं हैं. नियमावली की धारा 1-3तक में नियमावली का नाम, परिभाषा सहित अन्य मुद्दों को शामिल किया गया है. नियमावली की धारा-4-10 तक में नियुक्ति के लिए योग्यता, सहित अन्य प्रक्रियाओं और DGP को पद से हटाने का प्रावधान किया गया है.
सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के आलोक में Amicus Curiae ने नियुक्ति नियमावली पर सुप्रीम कोर्ट के दिशा निर्देश के आलोक में विचार करने के बाद सिर्फ धारा-5 और धारा-10 को सुप्रीम कोर्ट के दिशा निर्देश का उल्लंघन क़रार दिया है.
DGP नियुक्ति नियमानली की धारा-4 पर Amicus Curiae ने अपनी राय देते हुए कहा है कि यह प्रकाश सिंह बनाम केंद्र सरकार के मामले में सुप्रीम कोर्ट द्वारा दिये गये निर्देश का उल्लंघन नहीं करता है. क्योंकि Empanelment Committee और Nomination Committee दोनों में ही UPSC का प्रतिनिधित्व करने वाले एक-एक व्यक्ति को शामिल किया गया है. इसलिए अगर राज्य सराकार UPSC को प्रस्ताव भेजने के बदले अपनी Nomination Committee में नामों पर विचार कर ले तो कोई फर्क नहीं पड़ता. क्योंकि योग्यता और शर्ते दोनों ही एक जैसी है.
नियमावली की धारा-5
Amicus Curiae ने अपनी राय में कहा है कि नियमावली की धारा-5(c) में किये गये संशोधन के तहत छह महीने के कार्यकाल को कम किया गया है. यह सुप्रीम कोर्ट द्वारा दिये गये दिशा निर्देश के ख़िलाफ़ है. क्योंकि सुप्रीम कोर्ट ने नियुक्ति के लिए कम से कम छह महीने की सेवा बची हुई होने की शर्त लगा रखी है.
नियमावली की धारा-8
Amicus Curiae ने नियमावली की धारा-8 के प्रावधानों को भी नियम सम्मत माना है. राज्य सरकार द्वारा बनायी गयी इस नियमावली मे DGP का पद रिक्त होने से तीन महीना पहले अधिकारियों का नाम Nomination Committee को भेजना का प्रावधान किया गया है. सुप्रीम कोर्ट के दिशा निर्देश में भी पैनल तीन महीना पहले भेजे जाने का समय है.
नियमावली की धारा-10
Amicus Curiae ने DGP नियुक्ति नियमावली की धारा-10(1)(d) पर आपत्ति जतायी है. इस मामले में उन्होंने सुप्रीम कोर्ट को दी गयी अपनी राय में कहा है कि इस धारा में DGP को पद से हटाने के मामले में राज्य सरकार के पास अपार शक्तियां है. इससे DGP पर राजीनितिक दवाब पड़ सकता है. साथ ही दो साल की सेवा की गारंटी प्रभावित हो सकती है.