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लेबर पार्टी के अनुभवी राजनेता और ग्रेटर मैनचेस्टर के लोकप्रिय पूर्व मेयर एंडी बर्नहैम सोमवार को ब्रिटेन के अगले प्रधानमंत्री बनने जा रहे हैं। वह औपचारिक रूप से कीर स्टार्मर का स्थान लेंगे, जिन्होंने पिछले महीने अपने इस्तीफे की घोषणा की थी। ऐसे में सवाल यह है कि जब जनता ने दोबारा वोट नहीं डाला, तब नया प्रधानमंत्री कैसे चुना गया? क्या ब्रिटेन में प्रधानमंत्री सीधे जनता चुनती है या राजनीतिक पार्टी? राजा चार्ल्स की भूमिका क्या होती है? और क्या भारत में भी ऐसा हो सकता है?
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ब्रिटेन में बिना चुनाव कैसे बदल जाते हैं पीएम? (फोटो- AI)
ब्रिटेन में एक बार फिर सत्ता परिवर्तन होने जा रहा है, लेकिन इस बार देश में आम चुनाव नहीं हो रहे हैं। लेबर पार्टी के नेता के तौर पर एंडी बर्नहैम (Andy Burnham) चुने जाने के बाद वह प्रधानमंत्री की जिम्मेदारी संभालने वाले हैं। यह सवाल स्वाभाविक है कि जब जनता ने दोबारा वोट नहीं डाला, तब नया प्रधानमंत्री कैसे चुना गया? क्या ब्रिटेन में प्रधानमंत्री सीधे जनता चुनती है या राजनीतिक पार्टी? राजा चार्ल्स की भूमिका क्या होती है? और क्या भारत में भी ऐसा हो सकता है? इन सब सवालों के जवाब जानने के लिए पहले जानना होगा कि ताजा सत्ता परिवर्तन क्यों हो रहा है, साथ ही यह भी कि ब्रिटेन की संसदीय लोकतांत्रिक व्यवस्था कैसी है।आइए विस्तार से समझते हैं....
ब्रिटेन में क्यों हो रहा सत्ता परिवर्तन
बता दें कि ब्रिटेन में 2024 में आम चुनाव हुए थे, इनमें लेबर पार्टी ने भारी बहुमत हासिल किया था और कीर स्टार्मर प्रधानमंत्री बने थे। लेकिन करीब दो साल बाद 22 जून को उन्होंने पार्टी नेतृत्व और प्रधानमंत्री पद से इस्तीफा देने का फैसला किया। उनके इस्तीफे की बड़ी वजह उनकी कई राजनीतिक गलतियों को माना जा रहा है। इनमें सबसे सबसे प्रमुख उनका यौन अपराधी जेफरी एपस्टीन के करीबी व्यक्ति को संयुक्त राज्य अमेरिका में ब्रिटेन के राजदूत के रूप में नियुक्त करने का निर्णय था।

Keir Starmer uk
कीर स्टार्मर के इस्तीफे के बाद लेबर पार्टी ने अपने नए नेता के चयन की प्रक्रिया शुरू की, जिसमें एंडी बर्नहैम सबसे आगे थे। बर्नहैम को लेबर पार्टी के 401 सांसदों में से 349 का समर्थन मिला और शुक्रवार को एक विशेष पार्टी सम्मेलन में उन्हें लेबर पार्टी का नेता घोषित किया गया।
क्यों आम चुनाव की नहीं पड़ी जरूरत
लेबर पार्टी के भारी समर्थन के बावजूद बर्नहैम तुरंत आधिकारिक तौर पर प्रधानमंत्री नहीं बने। वे सोमवार को, जब वे औपचारिक स्वीकृति के लिए बकिंघम पैलेस में राजा चार्ल्स तृतीय से मिलेंगे। तब औपचारिक पीएम बनेंगे। चूंकि वर्तमान में संसद में बहुमत अब भी लेबर पार्टी के पास है, ऐसे में पार्टी का नया नेता ही देश का नया प्रधानमंत्री बनेगा। इसके लिए पूरे देश में दोबारा आम चुनाव कराने की जरूरत नहीं पड़ती।

एंडी बर्नहैम
ब्रिटेन में प्रधानमंत्री कैसे चुना जाता है?
अब बात ब्रिटेन की संसदीय व्यवस्था की करते हैं। भारत की तरह ही ब्रिटेन में प्रधानमंत्री का चुनाव सीधे जनता नहीं करती। यहां लोग अपने-अपने निर्वाचन क्षेत्रों से सांसद (Member of Parliament) चुनते हैं। ब्रिटेन में 650 सीटों वाली हाउस ऑफ कॉमन्स (House of Commons) में जिस पार्टी या गठबंधन के पास बहुमत होता है, उसका नेता प्रधानमंत्री बनता है। इसे सरल शब्दों में समझें को कह सकत हैं कि जनता वोट सांसदों के लिए डालती है, लेकिन प्रधानमंत्री उस पार्टी का नेता बनता है जिसे संसद में बहुमत हासिल होता है।यही कारण है कि अगर बहुमत वाली पार्टी अपना नेता बदल देती है और उसके सांसद नए नेता का समर्थन करते हैं, तो वही व्यक्ति प्रधानमंत्री बन जाता है।
बिना चुनाव नया प्रधानमंत्री कैसे बन जाता है?
ब्रिटेन की संसदीय व्यवस्था का मूल सिद्धांत यह है कि सरकार जनता के बजाय संसद के विश्वास पर टिकी होती है।
यदि सरकार के पास संसद में बहुमत बना रहता है, तो प्रधानमंत्री बदलने के लिए आम चुनाव जरूरी नहीं होता। ऐसी स्थिति कई कारणों से पैदा हो सकती है-
- प्रधानमंत्री इस्तीफा दे दें।
- स्वास्थ्य कारणों से पद छोड़ दें।
- पार्टी के भीतर नेतृत्व बदल जाए।
- पार्टी के सांसद मौजूदा नेता पर भरोसा खो दें।
- राजनीतिक दबाव के चलते नेता पद छोड़ने का फैसला करे।
इन सभी स्थितियों में यदि बहुमत वाली पार्टी नया नेता चुन लेती है, तो वही प्रधानमंत्री बन जाता है।
लेबर पार्टी में नेता चुनने की प्रक्रिया क्या होती है?
हर राजनीतिक दल के अपने आंतरिक नियम होते हैं। लेबर पार्टी में नेतृत्व चुनौती देने के लिए पार्टी सांसदों का निश्चित समर्थन जरूरी होता है। यदि मौजूदा नेता इस्तीफा दे देता है तो नए नेता के चयन की प्रक्रिया शुरू होती है। लेबर पार्टी की राष्ट्रीय कार्यकारिणी समिति (एनईसी) के मुताबिक, इसके लिए उम्मीदवारों का कम से कम 81 सांसदों का समर्थन जुटाना होता है। एक बार इस समर्थन के बाद उम्मीदवारों की एक बैठक होती है, जिसमें उन्हें सांसदों के सवालों के जवाब देने होते हैं। इस बार चुंकि एंडी बर्नहैम इकलौते उम्मीदवार थे, तो ये सारी प्रक्रियायें महज औपचारिकता मात्र थीं। एंडी बर्नहैम को पार्टी सांसदों का व्यापक समर्थन मिला और वे नए नेता चुने गए। पार्टी का नेता बनने के बाद अगला कदम प्रधानमंत्री बनने का होता है।
नए पीएम के चुने जाने में किंग की क्या भूमिका होती है?
दल का नेता चुने जाने के बाद भी उम्मीदवार सीधे पीएम नहीं बन जाता। लेबर पार्टी द्वारा नेता चुने जाने के बाद किंग बहुमत हासिल करने वाले दल के नेता को सरकार गठन के लिए बकिंघम पैलेस आमंत्रित करते हैं। सनद रहे कि ब्रिटेन संवैधानिक राजतंत्र (Constitutional Monarchy) है। यहां राजा देश के राष्ट्राध्यक्ष हैं, लेकिन सरकार का संचालन प्रधानमंत्री और मंत्रिमंडल करते हैं। प्रधानमंत्री बनने की अंतिम संवैधानिक प्रक्रिया में राजा चार्ल्स की भूमिका होती है।
इस्तीफे के बाद नए पीएम के शपथ ग्रहण तक...ये है प्रक्रिया
- निवर्तमान प्रधानमंत्री राजा से मिलकर औपचारिक इस्तीफा देते हैं।
- इसके बाद बहुमत वाली पार्टी के नए नेता को बकिंघम पैलेस बुलाया जाता है।
- राजा उन्हें सरकार बनाने का औपचारिक निमंत्रण देते हैं।
- इस परंपरा को "Kissing of Hands" कहा जाता है, हालांकि आज के समय में वास्तव में हाथ नहीं चूमे जाते।
- इसके बाद नया प्रधानमंत्री आधिकारिक रूप से पद संभाल लेता है।
ध्यान देने वाली बात यह है कि राजा अपनी पसंद से प्रधानमंत्री नहीं चुनते। वे उसी व्यक्ति को आमंत्रित करते हैं जिसके पास हाउस ऑफ कॉमन्स का बहुमत हो।
पिछले 10 वर्षों में कितनी बार बदला प्रधानमंत्री?
ब्रिटेन की राजनीति पिछले एक दशक में काफी अस्थिर रही है। इन 10 सालों में ब्रिटेन में छह बार प्रधानमंत्री बदल चुके हैं। एंडी बर्नहैम इस क्रम में सातवें होंगे।

ब्रिटेन में 10 सालों में बदल गए सात पीएम।
ब्रिटेन में है ये संवैधानिक
ब्रिटेन में यह संवैधानिक और लोकतांत्रिक प्रक्रिया का सामान्य हिस्सा है। इस व्यवस्था का उद्देश्य राजनीतिक स्थिरता बनाए रखना है, ताकि हर नेतृत्व परिवर्तन पर पूरे देश में चुनाव न कराने पड़ें।
भारत और ब्रिटेन की संसदीय व्यवस्था में क्या समानताएं हैं?
भारत और ब्रिटेन दोनों संसदीय लोकतंत्र (Parliamentary Democracy) हैं। दोनों ही जगह जनता सांसद चुनती है। बहुमत वाली पार्टी सरकार बनाती है और प्रधानमंत्री बहुमत दल का नेता होता है।
क्या भारत में भी बिना चुनाव प्रधानमंत्री बदल सकता है?
हां, यदि किसी कारण से भारत का प्रधानमंत्री इस्तीफा दे देता है और सत्तारूढ़ दल लोकसभा में बहुमत बनाए रखता है, तो वही दल नया नेता चुन सकता है। उसके बाद राष्ट्रपति उस नेता को प्रधानमंत्री नियुक्त कर सकते हैं। भारत के इतिहास में भी ऐसा हो चुका है। यानी भारत की संसदीय व्यवस्था भी इस सिद्धांत पर आधारित है कि सरकार लोकसभा के बहुमत के भरोसे चलती है।
ब्रिटेन में अगला आम चुनाव कब होगा?
ब्रिटेन में अगला आम चुनाव 2029 तक किसी भी समय निर्धारित संवैधानिक समयसीमा के भीतर कराया जा सकता है, क्योंकि पिछला आम चुनाव 2024 में हुआ था। हालांकि यदि सरकार बहुमत खो देती है, संसद भंग हो जाती है या समय से पहले चुनाव कराने का फैसला होता है, तो चुनाव इससे पहले भी हो सकते हैं।