लखनऊ- निजी स्कूलों ने सेवा नियमावली पर उठाए सवाल: बिना चर्चा बनाई गई नियमावली स्वीकार नहीं, ड्राफ्ट सार्वजनिक करने की मांग - Lucknow News

Published on 2 अग॰ 2026
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लखनऊ- निजी स्कूलों ने सेवा नियमावली पर उठाए सवाल:बिना चर्चा बनाई गई नियमावली स्वीकार नहीं, ड्राफ्ट सार्वजनिक करने की मांग

लखनऊ16 घंटे पहले

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अनिल अग्रवाल ने कहा कि शासन को सुझाव भी सौपेंगे। - Dainik Bhaskar

अनिल अग्रवाल ने कहा कि शासन को सुझाव भी सौपेंगे।

उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से निजी विद्यालयों के शिक्षकों और कर्मचारियों के लिए प्रस्तावित सेवा नियमावली को लेकर अनएडेड प्राइवेट स्कूल्स एसोसिएशन (UPSA) ने आपत्ति जताई है। एसोसिएशन ने ऑनलाइन कार्यकारिणी बैठक में कहा कि निजी विद्यालयों से बिना विचार-विमर्श तैयार की गई सेवा नियमावली प्रबंधन को स्वीकार नहीं होगी।

UPSA अध्यक्ष अनिल अग्रवाल ने कहा कि सेवा नियमावली सीधे निजी विद्यालयों, शिक्षकों और प्रबंधन से जुड़ा विषय है। इसलिए नियमावली तैयार करने वाली समिति में मान्यता प्राप्त निजी विद्यालय संगठनों के प्रतिनिधियों को भी शामिल किया जाना चाहिए।

ड्राफ्ट सार्वजनिक कर मांगे सुझाव

एसोसिएशन ने मांग की कि सेवा नियमावली का प्रारूप (ड्राफ्ट) सार्वजनिक किया जाए और निजी विद्यालय संगठनों व स्कूल प्रबंधन से सुझाव लेने के बाद ही इसे अंतिम रूप दिया जाए। उनका कहना है कि शिक्षा जैसे महत्वपूर्ण विषय पर व्यापक संवाद जरूरी है।

बैठक में कहा गया कि नई सेवा नियमावली राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP-2020) की भावना के अनुरूप हो। शिक्षकों के हित सुरक्षित रहने के साथ निजी विद्यालयों की प्रशासनिक स्वायत्तता, नवाचार और प्रबंधन के अधिकार भी प्रभावित नहीं होने चाहिए।

ग्रामीण और छोटे स्कूलों की स्थिति का भी रखें ध्यान

एसोसिएशन ने कहा कि नियम बनाते समय ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों के छोटे-बड़े सभी विद्यालयों की आर्थिक स्थिति, फीस संरचना और वित्तीय क्षमता को ध्यान में रखा जाए। बिना सरकारी सहायता के ऐसे अतिरिक्त दायित्व न लगाए जाएं, जिनसे किफायती और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्रभावित हो।

UPSA ने कहा कि सेवा नियमावली में शिक्षकों के अधिकारों के साथ उनके कार्य निष्पादन, अनुशासन और उत्तरदायित्व का भी स्पष्ट प्रावधान होना चाहिए, ताकि शिक्षा की गुणवत्ता और संस्थागत जवाबदेही दोनों बनी रहें।

बिना परामर्श नियमावली बनी तो करेंगे विरोध

एसोसिएशन ने स्पष्ट किया कि वह शिक्षकों के हितों और सेवा सुरक्षा का समर्थन करती है, लेकिन बिना व्यापक परामर्श और निजी विद्यालयों के प्रतिनिधित्व के तैयार की गई सेवा नियमावली पर पुनर्विचार होना चाहिए। UPSA ने कहा कि वह निजी विद्यालयों के हितों की रक्षा के लिए सभी वैधानिक और लोकतांत्रिक माध्यमों से अपना पक्ष सरकार के सामने रखेगी।

बैठक में यह भी तय किया गया कि प्रदेशभर के विद्यालय प्रबंधकों और विभिन्न निजी विद्यालय संगठनों से सुझाव लेकर एक समग्र प्रस्ताव तैयार किया जाएगा और उसे शासन को भेजा जाएगा। आवश्यकता पड़ने पर आगे की रणनीति भी सामूहिक रूप से तय की जाएगी।

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