बिहार में शराबबंदी से राजस्व का नुकसान, पर विकास जारी; सम्राट चौधरी बोले- पीने वाले जाने लगे हैं बंगाल और देवघर - Haribhoomi

Published on 2 अग॰ 2026

बिहार में शराबबंदी से राजस्व का नुकसान, पर विकास जारी; सम्राट चौधरी बोले- पीने वाले जाने लगे हैं बंगाल और देवघर

बिहार में शराबबंदी पर डिप्टी सीएम सम्राट चौधरी का बड़ा बयान सामने आया है। उन्होंने राजस्व नुकसान और पड़ोसी राज्यों में पीने वालों के जाने को लेकर क्या कुछ कहा, जानिए...

Samrat Choudhary statement Bihar liquor ban

बिहार में शराबबंदी पर डिप्टी सीएम सम्राट चौधरी का बड़ा बयान सामने आया है।

  • Published: 02 Aug 2026, 02:22 PM IST
  • Last Updated: 02 Aug 2026, 02:22 PM IST

Samrat Choudhary on liquor ban: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार (2 अगस्त) 'नशामुक्त युवा फॉर विकसित भारत संकल्प अभियान' का शुभारंभ किया गया। इस कार्यक्रम में लोक भवन के माध्यम से जुड़े मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने बिहार में शराबबंदी को लेकर कई अहम बातें कहीं। उन्होंने कहा कि बिहार में शराबबंदी कानून लागू होने के बाद से राज्य की जनता को इसके भारी फायदे मिले हैं, विशेष तौर पर महिलाओं को अत्याचार से बड़ी मुक्ति मिली है।

राजस्व का नुकसान, फिर भी आर्थिक विकास
सम्राट चौधरी ने स्वीकार किया कि बिहार में पूर्ण शराबबंदी लागू होने की वजह से राज्य के राजस्व को भले ही नुकसान उठाना पड़ा हो, लेकिन इसके बावजूद राज्य का आर्थिक विकास काफी तेजी से हुआ है। उन्होंने अन्य राज्यों के राजस्व का हवाला देते हुए बताया कि उत्तर प्रदेश में शराब से 70,000 करोड़, दिल्ली में 40,000 करोड़, पश्चिम बंगाल में 50,000 करोड़ और झारखंड में 25,000 करोड़ रुपये का राजस्व प्राप्त होता है।

उन्होंने यह भी कहा कि भले ही कुछ लोग चोरी-छिपे या छुपकर बिहार के भीतर शराब पी लेते हों, लेकिन आज स्थिति यह है कि सार्वजनिक स्थलों पर पूर्ण रूप से शराबबंदी का कड़ाई से असर दिखाई दे रहा है। उन्होंने तंज कसते हुए यह भी कहा कि शराब के शौकीन लोग अब देवघर और पश्चिम बंगाल की तरफ ज्यादा जाने लगे हैं। इसके अलावा उन्होंने देवघर, बनारस और कुशीनगर जाने का जिक्र करते हुए कहा कि बिहार के लोग आजकल इन जगहों पर अधिक जाने लगे हैं।

2016 में नीतीश कुमार ने उठाया था ऐतिहासिक कदम
डिप्टी सीएम ने याद दिलाया कि साल 2016 में जब बिहार की आर्थिक स्थिति बहुत अच्छी नहीं थी, तब भी तत्कालीन मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने राज्य में पूर्ण रूप से शराबबंदी करने का साहसिक कदम उठाया था। आज इस फैसले को लगभग 10 साल पूरे होने जा रहे हैं और यह धीरे-धीरे बिहार की समृद्धि का एक बड़ा प्रतीक बनता जा रहा है।

उन्होंने कहा कि अगर हमें एक 'विकसित भारत' और 'समृद्ध बिहार' का सपना सच करना है, तो यह तभी संभव हो पाएगा जब हम पूरी तरह नशा मुक्त समाज का निर्माण करेंगे। नशा मुक्ति के इस महाअभियान में हम सभी को मिलकर अपनी सक्रिय भागीदारी निभानी होगी।

युवाओं से जन जागरण में जुटने की अपील
युवाओं को देश का भविष्य बताते हुए सम्राट चौधरी ने कहा कि वे जैसा सोचेंगे, आने वाले भारत का भविष्य भी वैसा ही गढ़ा जाएगा। बिहार ने कभी देश को एक स्वर्णिम काल दिया था और उस गौरवशाली दौर को हम तभी वापस लौटा सकते हैं जब युवा शक्ति हमारे साथ पूरी मजबूती से खड़ी हो।

उन्होंने कहा कि जब नीतीश कुमार ने शराबबंदी की शुरुआत की थी, तब समय के साथ इसमें कई जरूरी बदलाव भी आए, लेकिन आज यह नियम पूरी तरह जमीन पर स्थापित हो चुका है। उन्होंने युवाओं से विशेष आग्रह किया कि वे आगे आएं और नशे के खिलाफ चलने वाले इस जन जागरण अभियान का अहम हिस्सा बनें।

नेपाल के पानी और जीएसटी से मिले फायदे
अपने संबोधन में सम्राट चौधरी ने दो बड़ी समस्याओं का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि उन्हें इस बात का गर्व है कि जिन दो वजहों से बिहार को पहले बहुत परेशानी झेलनी पड़ती थी, उनमें से एक नेपाल से आने वाले पानी की समस्या थी, जिसे अब नीतीश कुमार और नरेंद्र मोदी की डबल इंजन सरकार ने मिलकर काफी हद तक व्यवस्थित कर दिया है।

दूसरा मुद्दा बिहार की भारी-भरकम आबादी का था, जिस पर अक्सर लोग चिंता जाहिर करते थे। लेकिन उस आबादी का सबसे बड़ा लाभ बिहार को तब मिला जब देश में जीएसटी लागू हुआ। लोगों ने जो कुछ भी कंज्यूम (उपभोग) किया, उसका सीधा आर्थिक फायदा बिहार को मिला।

महिलाओं के जीवन में आया सकारात्मक बदलाव
अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए उन्होंने दोहराया कि यूं तो देश के किसी भी अन्य राज्य में शराबबंदी से बड़ी भारी राजस्व राशि मिलती है और झारखंड में आज भी लगभग 70 हजार करोड़ रुपये का रेवेन्यू शराब से आता है, जबकि बिहार को इसके कारण आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा। यूपी, दिल्ली और बंगाल जैसे राज्यों में इसकी वजह से बंपर कमाई हुई है।

हालांकि, उन्होंने यह भी जोड़ा कि आज बिहार के किसी भी कोने में चले जाइए, सार्वजनिक स्थानों पर शराबबंदी का असर साफ तौर पर दिखता है और इससे आम जनता को भारी लाभ मिल रहा है। खास तौर पर महिलाओं के पुरजोर आग्रह पर ही बिहार में शराबबंदी लागू की गई थी, जिसके परिणामस्वरूप आज महिलाओं के जीवन स्तर में एक बड़ा और सकारात्मक बदलाव आया है।