मरम्मत के बाद कुछ घंटों में ही उखड़ गई सड़क, नासिक में पैचवर्क की पोल खुली, गड्ढे भरने का दावा हुआ फेल| Navbharat Live

Published on 2 अग॰ 2026

मरम्मत के बाद कुछ घंटों में ही उखड़ गई सड़क, नासिक में पैचवर्क की पोल खुली, गड्ढे भरने का दावा हुआ फेल

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    आलोक उमाकृष्ण

Updated On: Aug 02, 2026 | 03:16 PM IST

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सार

Potholes Reappeared After Repair: नासिक में चार मौतों के बाद शुरू हुआ गड्ढामुक्त अभियान सवालों में घिर गया। मरम्मत के कुछ घंटों बाद ही सड़कें फिर उखड़ गईं, जिससे गुणवत्ता पर सवाल उठे।

Nashik Road Repair Quality Question On Potholes Reappeared After Repair

सड़क की मरम्मत (फोटो नवभारत)

विस्तार

Question On Potholes Reappeared After Repair: नासिक जिले में सिंहस्थ कुंभ मेले के विकास कार्यों के नाम पर शहर की सड़कों को बड़े पैमाने पर खोद दिया गया। लेकिन समय पर मरम्मत नहीं होने और गड्ढों को खुला छोड़ देने के कारण पिछले कुछ दिनों में चार निर्दोष नागरिकों की जान चली गई।

लगातार हुए हादसों के बाद शहरवासियों का गुस्सा फूट पड़ा और उसके बाद ही मनपा तथा प्रशासन हरकत में आया। कुंभ मेले के मंत्री गिरीश महाजन ने आपात बैठक लेकर आठ दिनों के भीतर शहर को गड्ढामुक्त करने के निर्देश दिए। इसके बाद से वे स्वयं लगातार तीन दिनों से नासिक में डेरा डालकर कार्यों की समीक्षा कर रहे हैं।

मंत्री गिरीश महाजन ने दिए निर्देश

मंत्री गिरीश महाजन के निर्देश के बाद महापौर, उपमहापौर, स्थायी समिति के सभापति, आयुक्त, नगरसेवक और वरिष्ठ अधिकारी सड़कों पर उतर आए। पूरे शहर में युद्धस्तर पर गड्ढे भरने का अभियान शुरू किया गया। सिंहस्थ विकास कार्यों से जुड़े ठेकेदारों को भी तत्काल मरम्मत के आदेश दिए गए।

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प्रशासन ने दावा किया कि बरसात में भी टिकाऊ माने जाने वाले कोल्ड मिक्स डामर, मिनरल मटेरियल, वेट मिक्स, मुरूम और जीएसबी का उपयोग किया गया है, जिससे सड़कें लंबे समय तक टिकेंगी। लेकिन प्रशासन के सभी दावे कुछ ही घंटों में खोखले साबित हो गए। पिछले दो-तीन दिनों में बड़े जोर-शोर से भरे गए गड्ढे शहर के कई हिस्सों में फिर से उखड़ गए।

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चार नागरिकों की मौत

नई बिछाई गई डामर की परत बह गई, पैचवर्क निकल गया और सड़कें फिर पहले की तरह गड्ढों से भर गईं। इससे मरम्मत कार्यों की गुणवत्ता पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। चार नागरिकों की मौत के बाद शुरू किया गया यह युद्धस्तरीय अभियान वास्तव में लोगों की सुरक्षा के लिए था या केवल दिखावा, इसको लेकर अब शहर में चर्चा शुरू हो गई है।

यदि जनहानि के बाद दिखाई गई तत्परता दो दिन भी नहीं टिक पाती, तो नागरिकों की सुरक्षा की जिम्मेदारी आखिर किसकी है, यह सवाल उठाया जा रहा है। इस बीच घटिया गुणवत्ता के कार्यों के कारण नासिक मनपा की मुश्किलें फिर बढ़ गई हैं। शहरवासियों का कहना है कि यदि विकास कार्यों में गुणवत्ता पर ध्यान नहीं दिया गया, तो यह गड्ढों का खेल आगे और कितनी जानें लेगा, इसका जवाब प्रशासन को देना होगा।

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