मायावती बोलीं- अखिलेश अहंकारी, जयंत से माफी मांगें: 'चवन्नी से रुपया बना दिया' कहना शर्मनाक; सपा ने ब्राह्मणों का शोषण किया - Uttar Pradesh News

Published on 22 अग॰ 2026

मायावती बोलीं- अखिलेश अहंकारी, जयंत से माफी मांगें:'चवन्नी से रुपया बना दिया' कहना शर्मनाक; सपा ने ब्राह्मणों का शोषण किया

लखनऊ3 घंटे पहले

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अखिलेश यादव के ‘चवन्नी से रुपया बना दिया…’ बयान पर बसपा प्रमुख मायावती भड़क गई हैं। सपा प्रमुख को अहंकारी बताते हुए उन्होंने कहा- यह उनके अमर्यादित आचरण का सबूत है। उन्होंने पूर्व प्रधानमंत्री चौधरी चरण सिंह के परिवार का अपमान किया। अखिलेश को तुरंत न सिर्फ रालोद नेता जयंत चौधरी, बल्कि पूरे जाट समाज से माफी मांगनी चाहिए। इतना ही नहीं, सपा ने ब्राह्मणों का हमेशा से उत्पीड़न किया है।

शनिवार सुबह X पर पोस्ट करके मायावती ने कहा-

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सपा के अहंकारी रवैये के चलते 1993 में मुलायम सिंह यादव के साथ बसपा का गठबंधन जल्दी टूट गया। इसके बाद 2 जून, 1995 को मेरी हत्या करने के षड्यंत्र करवाया। मेरे खिलाफ कुख्यात लखनऊ स्टेट गेस्ट हाउस कांड हुआ।

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मायावती ने कहा- अखिलेश यादव ने भी भरोसा दिलाया कि वे अपने पिता की पुरानी गलतियां नहीं दोहराएंगे। इसी भरोसे के साथ लोकसभा चुनाव में सपा और बसपा का गठबंधन हुआ। लेकिन चुनाव नतीजे उम्मीद के मुताबिक नहीं आए। इसके कुछ समय बाद ही दोनों दलों का गठबंधन टूट गया। सपा के अहंकारी और स्वार्थी रवैये के कारण ऐसा हुआ।

मायावती की 3 बड़ी बातें पढ़िए

1- सपा काम निकालने के लिए गिरगिट की तरह रंग बदलती है

सपा गठबंधन के मामले में केवल अपना काम निकालना जानती है। काम निकलते ही यह पार्टी गिरगिट की तरह रंग बदल लेती है। इसके बाद दूसरी पार्टियों के बारे में अनाप-शनाप भाषा का इस्तेमाल भी करती है। यह सपा का पुराना रवैया रहा है। ऐसे में सर्वसमाज के लोगों को सपा की संकीर्ण और जातिवादी राजनीति से सावधान रहना चाहिए।

2- ‘अखिलेश स्वार्थ के लिए PDA में ‘P’ की अलग-अलग मतलब बताते हैं’

अखिलेश यादव अपने राजनीतिक स्वार्थ के लिए अपने PDA में ‘P’ की अलग-अलग व्याख्या करते हैं। कभी इसे पिछड़ा वर्ग से जोड़ते हैं तो कभी पंडितों के हित से। सपा पिछड़े वर्गों में अपनी जाति के अलावा बाकी पिछड़े वर्गों, अल्पसंख्यकों और खासकर ब्राह्मण समाज की हितैषी नहीं रही है।

3- सपा सरकार में बहन-बेटियों का घर से बाहर निकलना मुश्किल था

सपा की पिछली सभी सरकारों में दलितों, पिछड़ों, अल्पसंख्यकों और खासकर ब्राह्मण समाज का शोषण और उत्पीड़न हुआ। उनके हित में कोई सकारात्मक कदम नहीं उठाए गए। सपा सरकारों में सिर्फ गुंडों, बदमाशों, माफियाओं और अराजक तत्वों का भला हुआ। उनकी सरकार में कानून-व्यवस्था खराब थी। बहन-बेटियों का घर से बाहर निकलना मुश्किल था।

आगामी विधानसभा चुनाव में सर्वसमाज के लोग सपा को सत्ता में न आने दें। उन्होंने इसे जनता के हित में बताया। बसपा बाबा साहेब डॉ. भीमराव आंबेडकर के आत्मसम्मान और स्वाभिमान के विचारों से कभी समझौता नहीं कर सकती। पार्टी ‘सर्वजन हिताय, सर्वजन सुखाय’ की अपनी अंबेडकरवादी नीतियों और सिद्धांतों पर कायम रहेगी।

अखिलेश के बयान पर जयंत ने पलटवार किया था

  • 17 अगस्त को सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने लखनऊ में रालोद प्रमुख जयंत चौधरी का बिना नाम लिए कहा था- ‘कुछ गठबंधन भी ऐसे किए हम लोगों ने, जाने कहां-कहां से आ गए थे गठबंधन वाले। हम लोगों ने चवन्नी का रुपया बना दिया, तब भी हमें छोड़कर चले गए।’
  • 2 दिन बाद रालोद प्रमुख जयंत चौधरी ने अखिलेश यादव पर पलटवार किया था। उन्होंने कहा- वो हमें इतना याद क्यों कर रहे हैं, यह सवाल उन्हीं से पूछा जाना चाहिए। अखिलेश अपनी बात कहें, तो अच्छा है। लेकिन, इस तरह के बयान उन लोगों को भी सोचने पर मजबूर करते हैं, जो आज उनके साथ खड़े हैं। उत्तर प्रदेश में लोकतंत्र है और जनता सबको बनाती है।

अब पढ़िए गेस्ट हाउस कांड, जिसके बसपा सुप्रीमो ने जिक्र किया

2 जून 1995 में लखनऊ में गेस्ट हाउस कांड हुआ था। यहां मायावती बैठक कर रहीं थीं, तभी सपा के विधायक और समर्थक पहुंच गए। वहां मारपीट और हमला किया।- फाइल

2 जून 1995 में लखनऊ में गेस्ट हाउस कांड हुआ था। यहां मायावती बैठक कर रहीं थीं, तभी सपा के विधायक और समर्थक पहुंच गए। वहां मारपीट और हमला किया।- फाइल

  • 6 दिसंबर 1992 को बाबरी मस्जिद गिरी तो केंद्र सरकार ने कल्याण सिंह सरकार को बर्खास्त कर दिया। 1993 में चुनाव हुए। भाजपा की लोकप्रियता से वाकिफ सपा और बसपा के नेताओं ने तय किया कि साथ चुनाव लड़ेंगे। मुलायम सिंह ने 256 सीटों पर प्रत्याशी उतारे। 109 जीत गए। कांशीराम ने 164 प्रत्याशी उतारे, उनमें 67 जीत गए। भाजपा के खाते में 177 सीटें आई थीं, जो 212 के बहुमत के आंकड़े से दूर थी।
  • सपा और बसपा ने मिलकर सरकार बना ली। मुलायम सिंह यूपी के सीएम बने। लेकिन आपसी खींचतान के चलते 2 जून, 1995 को बसपा ने सरकार से समर्थन वापसी का ऐलान कर दिया। इससे मुलायम सरकार अल्पमत में आ गई। 2 जून 1995 को मायावती लखनऊ के मीराबाई स्टेट गेस्ट हाउस में पार्टी के विधायकों और सांसदों के साथ मीटिंग कर रही थीं, तभी सपा के करीब 200 कार्यकर्ता और विधायक गेस्ट हाउस पहुंच गए।
  • बसपा के विधायकों ने मेन गेट बंद करना चाहा, तभी उग्र भीड़ ने उसे तोड़ दिया। पांच बसपा विधायकों को जबरन गाड़ी में बैठा लिया गया। मायावती के साथ बदसलूकी हुई। उन्होंने भागकर खुद को एक कमरे में बंद कर लिया। रात में जब भारी पुलिस फोर्स पहुंची और मायावती को लगा कि अब वह सुरक्षित हैं, तब जाकर कमरे से बाहर आईं।

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