नेपाल की बाढ़ का बिहार में असर: गंडक नदी का जलस्तर तेजी से बढ़ा, कई जिलों में हाई अलर्ट; तटबंधों की बढ़ी निगरानी

Published on 1 सित॰ 2026

Bihar Flood Alert: नेपाल में हुई भारी तबाही और लगातार बारिश के बाद उत्तर बिहार की प्रमुख नदियों के जलस्तर में उतार-चढ़ाव का सिलसिला जारी है। मुजफ्फरपुर जिले से गुजरने वाली गंडक नदी का जलस्तर एक बार फिर तेजी से बढ़ने लगा है, जिससे सीमावर्ती और निचले इलाकों पर बाढ़ का संकट गहराने लगा है। मौसम विभाग और केंद्रीय जल आयोग (CWC) से प्राप्त पूर्वानुमानों के बाद जिला प्रशासन पूरी तरह मुस्तैद और अलर्ट मोड पर आ गया है।

गंडक नदी के उफान पर आने से जिले के साहेबगंज, पारू और सरैया प्रखंड के दर्जनों गांवों पर सीधा असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है। स्थानीय प्रशासन का कहना है कि यदि नदी का पानी रिहायशी इलाकों में प्रवेश करता है, तो सबसे ज्यादा तबाही दियारा क्षेत्र में देखने को मिलेगी। दियारा इलाके के किसानों की सैकड़ों एकड़ में लगी खड़ी फसलें डूबकर बर्बाद होने की कगार पर हैं। इसके साथ ही घरों में पानी घुसने की स्थिति में बड़े पैमाने पर ग्रामीणों के विस्थापन की चुनौती खड़ी हो जाएगी।

जल संसाधन विभाग और समाहरणालय मुजफ्फरपुर (जिला आपातकालीन संचालन केंद्र) द्वारा जारी ताजा आंकड़ों के अनुसार, गंडक नदी का जलस्तर खतरे के लाल निशान के करीब पहुंच रहा है। नदी के विभिन्न स्थलों पर जलस्तर में लगातार बढ़ोतरी दर्ज की जा रही है, जिससे स्थिति बेहद संवेदनशील बनी हुई है।

नदियों का वर्तमान जलस्तर एवं रिपोर्ट:

सिकंदरपुर (बूढ़ी गंडक): खतरे का निशान 52.53 मीटर है, जबकि वर्तमान जलस्तर 47.01 मीटर दर्ज किया गया है (स्थिति: स्थिर)।

कटौंझा (बागमती नदी ): खतरे का निशान 55.00 मीटर है, जबकि वर्तमान जलस्तर 53.65 मीटर पर पहुंच गया है (स्थिति: बढ़ोतरी पर)।

रेवा घाट (गंडक नदी): खतरे का निशान 54.41 मीटर है, जबकि वर्तमान जलस्तर 53.71 मीटर तक पहुंच गया है (स्थिति: तेजी से वृद्धि)।

इस स्थिति और आंकड़ों को देखते हुए मुजफ्फरपुर के जिलाधिकारी कुमार गौरव ने राज्य मुख्यालय से मिले निर्देशों के आलोक में पूरे जिले में हाई अलर्ट घोषित कर दिया है। डीएम ने प्रशासनिक महकमे, जल संसाधन विभाग के अभियंताओं और आपदा प्रबंधन की टीमों को 24 घंटे अलर्ट रहने का निर्देश दिया है। इसके साथ ही गंडक और बूढ़ी गंडक समेत सभी संवेदनशील नदियों के तटबंधों की कड़ी निगरानी और निरंतर पेट्रोलिंग का हुक्म दिया गया है ताकि किसी भी कमजोर तटबंध को समय रहते दुरुस्त किया जा सके।

प्रशासन का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि यदि जलस्तर लाल निशान को पार कर गांवों में प्रवेश करता है, तो बिना समय गंवाए तत्काल राहत और बचाव कार्य शुरू किया जा सके। प्रभावित प्रखंडों के अंचल अधिकारियों (CO) और प्रखंड विकास अधिकारियों (BDO) को निचले इलाकों के लोगों को सुरक्षित ऊंचे स्थानों पर ले जाने, पर्याप्त नावों की व्यवस्था करने और राहत शिविरों के लिए स्थल चिन्हित करने का निर्देश दिया गया है। ग्रामीण इलाकों में लाउडस्पीकर से मुनादी कराकर लोगों को सतर्क रहने और सुरक्षित रहने की सलाह दी जा रही है।