यूपी के लाखों आउटसोर्स कर्मचारियों को बड़ी राहत, सैलरी के साथ नौकरी की सुरक्षा भी मजबूत; जानें क्या बदला

Published on 2 सित॰ 2026

उत्तर प्रदेश में आउटसोर्स के आधार पर काम कर रहे लाखों कर्मचारियों के लिए सरकार ने बड़ा कदम उठाया है. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने उत्तर प्रदेश आउटसोर्स सेवा निगम (UPCOS) की शुरुआत की है. सरकार का दावा है कि नई व्यवस्था का उद्देश्य आउटसोर्स कर्मचारियों को समय पर वेतन, सामाजिक सुरक्षा और शिकायतों के समाधान की बेहतर व्यवस्था उपलब्ध कराना है. इस पहल से करीब 3.5 लाख से अधिक कर्मचारियों के हित जुड़े बताए गए हैं.

अब नौकरी से सीधे हटाना आसान नहीं होगा

नई व्यवस्था में आउटसोर्स कर्मचारियों की नौकरी को लेकर भी सुरक्षा बढ़ाने की बात कही गई है. किसी कर्मचारी पर शिकायत या आरोप लगने मात्र से उसे सीधे नौकरी से नहीं हटाया जा सकेगा. पहले मामले की जांच होगी और आरोप साबित होने के बाद ही नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी.

डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य ने भी कहा कि आउटसोर्स कर्मचारियों के लिए कार्रवाई की एक निर्धारित प्रक्रिया होगी. इससे कर्मचारियों को अचानक नौकरी जाने की चिंता से कुछ राहत मिलने की उम्मीद है.

हर महीने समय पर वेतन दिलाने पर जोर

सरकार ने कर्मचारियों को वेतन समय पर मिलने की व्यवस्था को भी प्राथमिकता दी है. नई व्यवस्था के तहत आउटसोर्स कर्मचारियों के वेतन भुगतान और उनसे जुड़ी सुविधाओं की डिजिटल निगरानी की जाएगी. रिपोर्ट के मुताबिक, कर्मचारियों के खाते में वेतन महीने की 5 तारीख से पहले पहुंचाने की व्यवस्था पर जोर दिया गया है.

इसका सीधा फायदा उन कर्मचारियों को मिल सकता है जिन्हें वेतन मिलने में देरी के कारण हर महीने आर्थिक परेशानियों का सामना करना पड़ता है.

एक ही पोर्टल पर मिलेगी कई जानकारी

UPCOS की व्यवस्था में कर्मचारियों के लिए डिजिटल सिस्टम विकसित किया गया है. कर्मचारी अपनी सर्विस डिटेल, बैंक खाते की जानकारी, अटेंडेंस और वेतन से जुड़ी कटौती जैसी जानकारियां एक ही जगह देख सकेंगे.

शिकायत दर्ज कराने के लिए भी ऑनलाइन व्यवस्था उपलब्ध कराई जाएगी. कर्मचारी अपनी शिकायत की स्थिति को पोर्टल पर ही ट्रैक कर पाएंगे. इससे विभागों और आउटसोर्स एजेंसियों के बीच कर्मचारियों को बार-बार चक्कर लगाने की जरूरत कम हो सकती है.

EPF और ESIC की होगी डिजिटल निगरानी

आउटसोर्स कर्मचारियों के लिए भविष्य निधि यानी EPF और कर्मचारी राज्य बीमा यानी ESIC जैसी सुविधाओं की भी रियल टाइम मॉनिटरिंग की व्यवस्था बताई गई है. इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि कर्मचारियों से जुड़ी सामाजिक सुरक्षा सुविधाओं में किसी तरह की अनदेखी न हो.

सरकार ने यह भी कहा है कि कर्मचारी को उसकी मेहनत और कार्य के अनुरूप भुगतान सुनिश्चित करने की दिशा में व्यवस्था को मजबूत किया जाएगा.

हर कर्मचारी को 50 लाख रुपये का दुर्घटना बीमा

नई व्यवस्था में आउटसोर्स कर्मचारियों के लिए दुर्घटना बीमा भी महत्वपूर्ण सुविधा है. सरकार के मुताबिक सभी कर्मचारियों के लिए 50 लाख रुपये का दुर्घटना बीमा उपलब्ध कराया जाएगा. यह सुविधा किसी दुर्घटना की स्थिति में कर्मचारी और उसके परिवार को आर्थिक सुरक्षा देने में अहम भूमिका निभा सकती है.

भर्ती में आरक्षण का भी प्रावधान

UPCOS से जुड़े कर्मचारियों के लिए भर्ती प्रक्रिया में भी नियमों के अनुसार आरक्षण दिए जाने की बात सामने आई है. रिपोर्ट के मुताबिक करीब तीन लाख कर्मचारियों को भर्ती में निर्धारित नियमों के अनुरूप आरक्षण का लाभ दिया जाएगा.

कुछ श्रेणियों के मानदेय में पहले ही बढ़ोतरी

सरकार ने आउटसोर्स कर्मचारियों के मानदेय में बढ़ोतरी के कदम भी उठाए हैं. उत्तर प्रदेश परिवहन निगम में काम करने वाले कंप्यूटर ऑपरेटर, अकाउंटेंट-कम-टैली ऑपरेटर और प्रोग्रामर के मानदेय में जुलाई से 5 प्रतिशत की वृद्धि की गई है.

कंप्यूटर ऑपरेटरों का मानदेय करीब 20,655 रुपये से बढ़कर 21,420 रुपये हुआ है, जबकि अकाउंटेंट-कम-टैली ऑपरेटर के लिए यह करीब 20 हजार से बढ़कर 26 हजार रुपये किया गया है. प्रोग्रामर का मानदेय करीब 42 हजार से बढ़कर 43,313 रुपये हुआ है.

सरकार का फोकस सिर्फ वेतन पर नहीं

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि सरकार और कर्मचारी के बीच संबंध केवल वेतन और काम तक सीमित नहीं होना चाहिए, बल्कि इसमें विश्वास और जिम्मेदारी भी होनी चाहिए. इसी सोच के तहत कर्मचारी की सेवा, अधिकार, शिकायत और सामाजिक सुरक्षा से जुड़ी व्यवस्थाओं को डिजिटल और अधिक पारदर्शी बनाने की कोशिश की जा रही है.

कुल मिलाकर UPCOS के जरिए उत्तर प्रदेश सरकार आउटसोर्स कर्मचारियों के लिए वेतन भुगतान, नौकरी संबंधी प्रक्रिया, शिकायत निवारण और सामाजिक सुरक्षा को एक व्यवस्थित ढांचे में लाने की कोशिश कर रही है. आने वाले समय में इस व्यवस्था का वास्तविक असर इस बात से तय होगा कि इन सुविधाओं को जमीन पर कितनी प्रभावी और पारदर्शी तरीके से लागू किया जाता है.

यह भी पढ़ें - भाजपा सासंदों ने की सवर्ण आयोग के गठन की मांग, सरकार से कहा- वर्षों से इस समुदाय का हो रहा है शोषण