शिवपुरी जिले की नरवर तहसील के ग्राम कालीपहाड़ी मेड़ा में शासकीय पहाड़ पर प्रस्तावित क्रेशर को लेकर ग्रामीणों का विरोध बढ़ गया है। गुरुवार को कई ग्रामीण और युवा जिला कलेक्टर कार्यालय पहुंचे। उन्होंने कलेक्टर अर्पित वर्मा को ज्ञापन सौंपकर सर्वे नंबर 92
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20.87 हेक्टेयर में फैला है शासकीय पहाड़ी क्षेत्र
ग्रामीणों के मुताबिक, सर्वे नंबर 929 में करीब 20.87 हेक्टेयर शासकीय पहाड़ी क्षेत्र है। उनका कहना है कि यह पहाड़ गांव के लिए एक जरूरी प्राकृतिक संसाधन है। पहाड़ पर प्राचीन सिद्धबाबा मंदिर और धाती बाबा का स्थान भी है, जहां ग्रामीण लंबे समय से पूजा-पाठ और साफ-सफाई करते आ रहे हैं। ग्रामीणों ने आशंका जताई है कि खनन और क्रेशर शुरू होने से धार्मिक स्थलों के साथ पर्यावरण को भी नुकसान होगा।
धूल और प्रदूषण से स्वास्थ्य पर असर की आशंका
ग्रामीणों ने बताया कि पहाड़ के आसपास गांव की आधी से ज्यादा आबादी रहती है। ऐसे में क्रेशर चलने से धूल और प्रदूषण बढ़ने की आशंका है। ग्रामीणों ने स्वास्थ्य पर असर पड़ने और दमा, टीबी व सिलिकोसिस जैसी बीमारियों का खतरा बताया। साथ ही ब्लास्टिंग के कारण मकानों में दरारें आने और कच्चे मकानों को नुकसान पहुंचने की आशंका भी जताई गई है।
2023 में दर्ज कराई गई थी आपत्ति
ग्रामीणों का कहना है कि क्रेशर लीज की प्रक्रिया को लेकर ग्राम पंचायत की उस समय की सरपंच ने साल 2023 में आपत्ति दर्ज की थी। ग्रामीणों का आरोप है कि आपत्ति के समाधान की जानकारी उन्हें नहीं दी गई। उनका यह भी कहना है कि ग्रामसभा की सहमति भी नहीं ली गई थी।
30 अगस्त को वाहन और नाप-तौल के उपकरण लेकर पहुंचे लोग
ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि 30 अगस्त को हाकिम रावत और राजेश रावत अपने साथियों के साथ वाहन और नाप-तौल के उपकरण लेकर पहाड़ पहुंचे थे। पूछताछ करने पर उन्हें क्रेशर के लिए प्रक्रिया चलने की बात बताई गई। ग्रामीणों का आरोप है कि विरोध करने पर उन्हें धमकाया गया। उन्होंने पटवारी और तहसीलदार पर भी धमकाने का आरोप लगाया है।
जांच पूरी होने तक लीज प्रक्रिया रोकने की मांग
ग्रामीणों ने कलेक्टर से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने और अधिकारियों को मौके पर भेजकर स्थिति की जांच कराने की मांग की है। उन्होंने कहा कि जांच पूरी होने तक सर्वे नंबर 929 में क्रेशर लीज की प्रक्रिया पर रोक लगाई जाए। ग्रामीणों का कहना है कि पहाड़, धार्मिक स्थलों, पर्यावरण और आसपास रहने वाली आबादी को ध्यान में रखते हुए मामले में उचित कार्रवाई की जानी चाहिए।