अब एफडी पर साइबर सेंध: न ओटीपी आया, न पासवर्ड-पिन साझा किया; एफडी से रकम कैसे निकली - Bhopal News

Published on 8 सित॰ 2026

अब एफडी पर साइबर सेंध:न ओटीपी आया, न पासवर्ड-पिन साझा किया; एफडी से रकम कैसे निकली

भोपाल30 मिनट पहले

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पुलिस कर रही जांच, जालसाजों ने 5.99 लाख रुपए उड़ाए, 1930 पर शिकायत के बाद दर्ज हुई ई-जीरो एफआईआर

साइबर ठगी में अब तक बैंक खातों से रकम उड़ाने के मामले सामने आते रहे हैं, लेकिन अब ठगों ने फिक्स्ड डिपॉजिट (एफडी) को भी निशाना बनाना शुरू कर दिया है। भोपाल में 61 वर्षीय बुजुर्ग की एफडी से नेट बैंकिंग के जरिए तीन ट्रांजेक्शन में 5,99,009.62 रुपए निकाल लिए गए।

चौंकाने वाली बात यह है कि उनके मोबाइल पर कोई ओटीपी नहीं आया और उन्होंने पासवर्ड, पिन, सीवीसी या अन्य बैंकिंग जानकारी भी किसी से साझा नहीं की थी। ऐशबाग पुलिस ने केस दर्ज किया है। पुलिस अब यह जांच रही है कि बिना ओटीपी और बैंकिंग जानकारी साझा किए एफडी से रकम कैसे निकाली गई।

पुलिस के मुताबिक अफकार कॉलोनी निवासी 61 वर्षीय शरीफ अहमद कुरैशी का आईसीआईसीआई बैंक की अशोका गार्डन शाखा में बचत खाता और एफडी है। 4 सितंबर को दोपहर 12 से 12:30 बजे के बीच उनकी एफडी से नेट बैंकिंग के जरिए तीन ऑनलाइन ट्रांजेक्शन कर रुपए ट्रांसफर किए गए। रकम निकलने की जानकारी मिलने पर शरीफ अहमद ने राष्ट्रीय साइबर अपराध हेल्पलाइन 1930 पर शिकायत दर्ज कराई। इसके बाद साइबर सेल से मिली ई-जीरो एफआईआर के आधार पर ऐशबाग पुलिस ने अज्ञात आरोपी के खिलाफ धोखाधड़ी का मामला दर्ज किया है।

एप से एफडी बनाई तो सतर्क रहें, ठग ले सकते हैं एक्सेस एफडी खाते में तो नेट बैंकिंग नहीं होती, फिर ठग कैसे शिकार बना रहे? एफडी की अलग नेट बैंकिंग नहीं होती, लेकिन वह आपके बैंक खाते से जुड़ी होती है। आज बैंक के मोबाइल एप से एफडी बनाई और बिना बैंक जाए तोड़ी भी जा सकती है। ठग इसी रास्ते का इस्तेमाल करते हैं। वे ग्राहक से मोबाइल एप में जाकर एफडी तोड़ते हैं। एफडी टूटने के बाद पैसा लिंक बैंक खाते में आ जाता है, जहां से उसे ट्रांसफर किया जा सकता है।

मोबाइल एप से एफडी बनाई तो ठगों को इसका एक्सेस कैसे मिलता है? ठग सीधे एफडी का एक्सेस नहीं लेते। वे रिफंड या पैसा वापस दिलाने जैसे बहाने से ग्राहक के मोबाइल में स्क्रीन शेयरिंग या रिमोट एक्सेस एप डाउनलोड करवाते हैं। इसके बाद ग्राहक से बैंक का मोबाइल एप खुलवाकर अपने बताए तरीके से प्रक्रिया करवाते हैं। ग्राहक को लगता है कि वह रिफंड ले रहा है, जबकि वह ठग के बताए स्टेप पूरे कर रहा होता है।

ठग कैसे पता करते हैं कि आपके बैंक खाते में कितने रुपए हैं? स्क्रीन शेयरिंग या रिमोट एक्सेस के दौरान ग्राहक जब बैंक एप खोलता है तो स्क्रीन पर दिखाई देने वाली जानकारी ठग भी देख सकता है। इसी दौरान उसे खाते में उपलब्ध रकम और एफडी की जानकारी मिल सकती है। इसके बाद वह उसी हिसाब से ग्राहक को निशाना बनाता है।

ठगी से बचने के लिए लोगों को क्या करना चाहिए कि उनका पैसा सुरक्षित रहे? किसी अनजान व्यक्ति या अनजान कॉल करने वाले के कहने पर किसी भी तरह का एप डाउनलोड नहीं करें, भले ही वह पैसा देने की बात कहे। रिफंड के लिए इंटरनेट पर मिले नंबर पर संपर्क करने के बजाय बैंक या कंपनी के अधिकृत एप या वेबसाइट का इस्तेमाल करें। किसी के निर्देश पर बैंक एप खोलकर पिन न डालें। याद रखें, पैसा वापस लेने के लिए किसी अनजान व्यक्ति को आपके मोबाइल की स्क्रीन देखने की जरूरत नहीं होती। ठगी होने पर तुरंत साइबर हेल्पलाइन नंबर 1930 पर शिकायत दर्ज कराएं। -वैभव गुप्ता, बैंकिंग एक्सपर्ट

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