संविधान और कानून से ऊपर कोई भी धार्मिक संस्था नहीं: शरिया कोर्ट अदालत नहीं, तलाक के आदेश की कानूनी अहमियत शून्य: छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट - Bilaspur (Chhattisgarh) News

Published on 8 सित॰ 2026

छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने एक अहम फैसला सुनाया है। जस्टिस अमितेंद्र किशोर प्रसाद की सिंगल बेंच ने कहा है कि शरिया कोर्ट को कोई कानूनी मान्यता नहीं है। इसके द्वारा दिए गए तलाक के आदेश की कोई कानूनी अहमियत नहीं है। संविधान और कानून से ऊपर कोई भी धार्मिक सं

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रायपुर की रहने वाली नीरोश अब्बासी की शादी 18 जुलाई 2020 को मोहम्मद आबिद खान से हुई थी। यह नीरोश की दूसरी शादी थी। उनके पहले पति का 2015 में निधन हो गया था। पहली शादी से नीरोश के बच्चे भी थे। पति आबिद खान ने आरोप लगाया कि बच्चे नए परिवार में घुल-मिल नहीं पा रहे हैं। इसी बात को आधार बनाकर पति ने उन्हें तीन अलग-अलग तारीखों पर तलाक-ए-हसन दे दिया। महिला ने तलाक को नहीं माना और पुलिस में शिकायत कर दी।

सखी सेंटर में पति-पत्नी की काउंसलिंग भी हुई, जो फेल रही। इसके बाद 1 नवंबर 2021 को रायपुर के महिला थाने में पति और ससुराल वालों पर क्रूरता व प्रताड़ना की एफआईआर दर्ज कर ली गई। {शरिया कोर्ट ने पति के पक्ष में दिया आदेश: इसी बीच 18 जनवरी 2022 को इदारा-ए-शरिया इस्लामी कोर्ट ने एक आदेश जारी कर दिया। इस आदेश में कहा गया कि मुस्लिम पर्सनल लॉ के तहत महिला का तलाक हो चुका है। महिला ने हार नहीं मानी और इस आदेश को हाई कोर्ट में चुनौती दी।

मामले में दिए गए फैसले में हाई कोर्ट ने कहा कि इदारा-ए-शरिया इस्लामी कोर्ट कोई वैधानिक अदालत नहीं है। इसे किसी की भी शादी या तलाक पर फैसला सुनाने का कोई अधिकार नहीं है। शरिया कोर्ट का फैसला सिर्फ एक राय या फतवा है, यह कोई कानूनी डिक्री नहीं है। इसे किसी भी व्यक्ति पर जबरदस्ती लागू नहीं किया जा सकता है।

कहा- धर्म लोगों की आस्था का विषय हाई कोर्ट ने कहा कि धर्म लोगों की आस्था का विषय है। लेकिन, कोई भी धार्मिक संस्था या निजी संस्था खुद को अदालत बताकर कानूनी फैसले नहीं ले सकती। हालांकि हाई कोर्ट ने पति द्वारा दिए गए तलाक-ए-हसन की कानूनी वैधता पर कोई भी टिप्पणी नहीं की। कहा कि बेनजीर हिना विरुद्ध भारत संघ का मामला अभी सुप्रीम कोर्ट में लंबित है। इसलिए इस बड़े सवाल पर फैसला उचित अदालत ही करेगी। साथ ही कोर्ट ने साफ किया कि महिला द्वारा पुलिस में दर्ज कराई गई एफआईआर पर कानूनी कार्रवाई जारी रहेगी। शरिया कोर्ट के किसी भी आदेश से पुलिस की क्रिमिनल जांच पर कोई असर नहीं पड़ेगा।